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Ranchi news : हरमू नदी व बड़ा तालाब की सफाई पर हाइकोर्ट ने मांगा जवाब

Updated at : 16 Apr 2025 9:01 PM (IST)
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Ranchi news : हरमू नदी व बड़ा तालाब की सफाई पर हाइकोर्ट ने मांगा जवाब

मामला जलस्रोतों व बड़ा तालाब के अतिक्रमण तथा साफ-सफाई का. रांची नगर निगम को विस्तृत शपथ पत्र दायर करने का निर्देश.

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रांची.

झारखंड हाइकोर्ट ने राज्य की नदियों, जलस्रोतों व बड़ा तालाब के अतिक्रमण तथा साफ-सफाई को लेकर स्वत: संज्ञान से दर्ज जनहित याचिका पर सुनवाई की. चीफ जस्टिस एमएस रामचंद्र राव व जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार व रांची नगर निगम का पक्ष सुना. पक्ष सुनने के बाद खंडपीठ ने हरमू नदी व बड़ा तालाब की साफ-सफाई पर विस्तृत शपथ पत्र दायर करने का निर्देश दिया. खंडपीठ ने रांची नगर निगम को मौखिक रूप से कही गयी बातों को शपथ पत्र के माध्यम से दाखिल करने का निर्देश दिया. मामले की अगली सुनवाई नाै जून को होगा.

नगर निगम का पक्ष

इससे पूर्व रांची नगर निगम की ओर से अधिवक्ता एलसीएन शाहदेव ने खंडपीठ को बताया कि 10-11 अप्रैल को नगर निगम की ओर से हरमू नदी की साफ-सफाई की गयी है. कूड़ा-कचरा हटाया गया है. निगम की ओर से समय-समय पर हरमू नदी की सफाई की जाती है. अधिवक्ता श्री शाहदेव ने इस संदर्भ में खंडपीठ को हरमू नदी की सफाई से संबंधित अलग-अलग फोटोग्राफ भी दिखाये. वहीं, राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता जय प्रकाश ने बताया कि कांके रोड के विद्यापति नगर में एक तालाब भर दिया गया है. उस पर लंबे समय से जमाबंदी चल रही है. जमाबंदी रद्द कराने के लिए सरकार सूट फाइल करेगी. अतिक्रमण हटाने के लिए एक जिला से टास्क फोर्स की जानकारी नहीं आ पायी है. उन्होंने समय देने का आग्रह किया.

झारखंड सिविल सोसाइटी का पक्ष

मौके पर एमीकस क्यूरी अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा भी उपस्थित थे. हस्तक्षेपकर्ता झारखंड सिविल सोसाइटी की ओर से अधिवक्ता शुभम कटारूका ने बताया कि बड़ा तालाब में जब तक इसकी गहराई से गाद को नहीं निकाला जायेगा, तब तक पूरी तरह से बड़ा तालाब साफ नहीं हो सकेगा. हरमू नदी में घरों से निकला हुआ कचरा जा रहा है. गंदा पानी भी सीधे नदी में जा रहा है. नदी का पानी काला है. ऐसे में हरमू नदी की सफाई तथा गंदा पानी को साफ करने के लिए जगह-जगह एसटीपी लगाना जरूरी है. उल्लेखनीय है कि जलस्रोतों के अतिक्रमण व साफ-सफाई से संबंधित प्रकाशित खबर को झारखंड हाइकोर्ट ने गंभीरता से लेते हुए उसे जनहित याचिका में तब्दील कर दिया था. पूर्व में कोर्ट ने सरकार को राज्य के सभी जिलों में जलस्रोतों के संरक्षण, अतिक्रमण, संग्रहित जल की स्थिति आदि के बारे में अद्यतन जानकारी प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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