आचार संहिता उल्लंघन मामले में सीएम हेमंत सोरेन को बड़ी राहत, 11 नवबंर तक नहीं होगी कोई कार्रवाई

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आचार संहिता उल्लंघन मामले में सीएम हेमंत सोरेन को अदालत से बड़ी राहत मिली है. हाईकोर्ट के आदेश के बाद अदालत ने 11 नंवबर तक कार्रवाई पर रोक लगा दी. ये मामला साल 2019 में लोकसभा चुनाव के दौरान का है
रांची : मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से जुड़े आचार संहिता उल्लंघन के मामले में मंगलवार को एमपी-एमएलए की विशेष न्यायाधीश अनामिका किस्कू की अदालत में सुनवाई हुई़ अदालत ने हाइकोर्ट के आदेश पर 11 नवंबर 2022 तक कार्रवाई पर रोक लगा दी है़ मुख्यमंत्री की ओर से सशरीर उपस्थिति पर छूट के लिए अदालत में याचिका दाखिल की गयी थी.
उस याचिका को अदालत ने 28 जून के सुनवाई के बाद खारिज कर दी थी और अगली सुनवाई के लिए 12 जुलाई की तिथि निर्धारित की थी़ उसी मामले में मंगलवार को सुनवाई हुई़
लोकसभा चुनाव 2019 में मतदान के दिन छह मई को बूथ नंबर 388 (संत फ्रांसिस स्कूल, हरमू) में हेमंत सोरेन पत्नी कल्पना सोरेन के साथ मतदान करने गये थे. हेमंत सोरेन अपने गले में पार्टी का पट्टा लटकाये हुए मतदान स्थल पर पहुंचे थे़ उसे आचार संहिता का उल्लंघन मानते हुए कार्यपालक दंडाधिकारी राकेश रंजन उरांव ने अरगोड़ा थाना में जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा के तहत (कांड संख्या 149/2019) नामजद प्राथमिकी दर्ज करायी थी.
हाइकोर्ट के जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की अदालत ने साहेबगंज के बड़हरवा टोल टैक्स टेंडर मामले में मारपीट और जान से मारने की धमकी की सीबीआइ से जांच कराने को लेकर दायर क्रिमिनल रिट याचिका पर सुनवाई की.
अदालत ने प्रार्थी का पक्ष सुनने के बाद मामले में प्रतिवादी ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम व सीएम के विधायक प्रतिनिधि पंकज मिश्रा को नोटिस जारी किया. राज्य सरकार व सीबीआइ को जवाब दायर करने को कहा. अदालत ने साहिबगंज के पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिया कि प्रार्थी को सुरक्षा मुहैया करायी जाये. यदि प्रार्थी की सुरक्षा में चूक हुई, तो पुलिस अधीक्षक व बड़हरवा थाना प्रभारी पूर्णत: जिम्मेवार होंगे.
अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए चार सप्ताह के बाद की तिथि निर्धारित करने को कहा. इससे पूर्व प्रार्थी की अोर से अधिवक्ता अभय कुमार मिश्र ने पक्ष रखते हुए अदालत को बताया कि वर्ष 2020 में साहिबगंज के बड़हरवा टोल टैक्स टेंडर में शामिल होने प्रार्थी जा रहा था. इस दाैरान उसके साथ मारपीट की गयी. टेंडर में भी शामिल होने नहीं दिया गया. मंत्री आलमगीर आलम के फोन से सीएम के विधायक प्रतिनिधि पंकज मिश्रा ने धमकी दी थी. बाद में जान से मारने की धमकी दी जाने लगी. इसके बाद प्रार्थी शंभु नंदन कुमार ने घटना को लेकर वर्ष 2020 में प्राथमिकी दर्ज करायी थी. उन्होंने अदालत से मामले की जांच सीबीआइ से कराने व सुरक्षा मुहैया कराने का भी आग्रह किया.
Posted By: Sameer Oraon
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By Prabhat Khabar News Desk
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