प्लास्टिक के उपयोग के कारण बिगड़ रहा पर्यावरण

आज अंतरराष्ट्रीय प्लास्टिक बैग मुक्त दिवस है. यह हर साल तीन जुलाई को मनाया जाता है.
रांची. आज अंतरराष्ट्रीय प्लास्टिक बैग मुक्त दिवस है. यह हर साल तीन जुलाई को मनाया जाता है. इस दिवस को मनाने का मकसद यह है कि लोग प्लास्टिक के दुष्परिणामों से अवगत हों और इससे दूरी बनायें. लेकिन आज लोगों की दिनचर्या ही प्लास्टिक से जुड़ गयी है. इस प्लास्टिक के कारण शहर को कई प्रकार के दुष्परिणामों का सामना करना पड़ रहा है. लेकिन अब भी लोग स्वास्थ्य पर पड़ने वाले इन दुष्परिणामों के प्रति सचेत नहीं हो रहे हैं. लोगों को प्लास्टिक के बदले बैग का उपयोग करने पर जोर देना चाहिए.
राज्य में हर माह 60 टन पॉलीथिन का कारोबार
झारखंड में हर माह 60 टन पॉलीथिन का कारोबार हो रहा है. यह पॉलीथिन राज्य के आसपास के जिलों से राजधानी रांची में पहुंचता है. फिर यहीं से होलसेलर के पास होते हुए रिटेलर तक पहुंचता है. प्रतिबंधित पॉलीथिन का उपयोग शहर के लोग नहीं करें, इसके लिए जिला प्रशासन व नगर निगम द्वारा अभियान चलाया जाता है. लेकिन यह अभियान भी मात्र दिखावा बनकर रह गया है.सफाई व्यवस्था हुई तहस-नहस
शहर की स���ाई व्यवस्था को ध्वस्त करने में पॉलीथिन और पॉलीबैग की भूमिका अहम है. आम लोग इसका उपयोग करने के बाद जब इसे खुली जगहों या नाला में फेंक देते हैं तो यह बहकर नाले में ही जम जाता है. फिर यह पूरे नाले को ही जाम कर देता है. पॉलीथिन सड़ता नहीं है. आज भी नगर निगम द्वारा जिन जाम नालों की सफाई की जाती है, तो उसमें 70 प्रतिशत नाले केवल पॉलीथिन के कारण जाम मिलते हैं.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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By Prabhat Khabar News Desk
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