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Crime Against Women: पति और परिवार ही करता है महिलाओं पर अत्याचार, झारखंड में ऐसी है स्थिति

Updated at : 29 Sep 2022 5:50 PM (IST)
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Crime Against Women: पति और परिवार ही करता है महिलाओं पर अत्याचार, झारखंड में ऐसी है स्थिति

Crime Against Women in Jharkhand: झारखंड में महिलाओं के खिलाफ अपराध में वृद्धि हुई है. हालांकि, वर्ष 2020 में वर्ष 2019 की तुलना में महिलाओं के खिलाफ अपराध की संख्या में कमी दर्ज की गयी. 2019 में झारखंड में 8,760 मुकदमे दर्ज किये गये थे, जबकि वर्ष 2020 में यह घटकर 7,630 रह गया था.

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Crime Against Women: भारत में महिलाओं पर अत्याचार के मामले बढ़ रहे हैं. उन पर सबसे ज्यादा अत्याचार अपने ही लोग करते हैं. पति या परिवार की सबसे ज्यादा प्रताड़ना महिलाओं को झेलनी पड़ती है. नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB-2021) की हालिया रिपोर्ट में ये बात कही गयी है. इसमें बताया गया है कि देश में वर्ष 2021 में महिलाओं के खिलाफ अपराध के 4,28,278 केस दर्ज किये गये. इसमें 31.8 फीसदी मामले पति या परिवार की क्रूरता का है.

महिलाओं के शील हनन से जुड़े हैं 20.8 फीसदी मामले

पति और परिवार की प्रताड़ना के बाद नंबर आता है महिलाओं के शील हनन से जुड़े आपराधिक मामलों का. वर्ष 2021 में महिलाओं के खिलाफ दर्ज कुल आपराधिक मामलों में 20.8 फीसदी हिस्सेदारी शील हनन से जुड़े थे. 17.6 फीसदी मामले महिलाओं के अपहरण का है, जबकि 7.4 फीसदी बलात्कार के मामले दर्ज किये गये हैं. महिलाओं के खिलाफ अपराध में वृद्धि का आलम यह है कि वर्ष 2020 में एक लाख महिलाओं में 56.5 को किसी न किसी प्रकार की हिंसा झेलनी पड़ी, जबकि वर्ष 2021 में यह आंकड़ा बढ़कर 64.5 हो गया.

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झारखंड में चार्जशीट की दर राष्ट्रीय स्तर से बेहतर

झारखंड में भी महिलाओं के खिलाफ अपराध में वृद्धि दर्ज की गयी है. हालांकि, वर्ष 2021 में वर्ष 2019 की तुलना में महिलाओं के खिलाफ अपराध की संख्या में कमी दर्ज की गयी है. एनसीआरबी के रिकॉर्ड बताते हैं कि वर्ष 2019 में झारखंड में 8,760 मुकदमे दर्ज किये गये थे, जबकि वर्ष 2020 में यह घटकर 7,630 रह गया. वर्ष 2021 में इस आंकड़े में वृद्धि दर्ज की गयी और यह बढ़कर 8,110 हो गया. हालांकि, चार्जशीट की दर के मामले में झारखंड का रिकॉर्ड राष्ट्रीय स्तर से बेहतर है. झारखंड में 79.7 फीसदी मामलों में चार्जशीट हो जाती है, जबकि देश में मात्र 77.1 फीसदी मामलों में चार्जशीट पेश की जाती है.

झारखंड की 43 फीसदी महिलाओं का होता है अपराध से सामना

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो ने आबादी का जो प्रोजेक्शन दिया है, उसमें कहा गया है कि झारखंड में महिलाओं की आबादी 1 करोड़ 88 लाख 50 हजार है. इनमें से 43 फीसदी महिलाओं का किसी न किसी रूप में अपराध से सामना होता है. वहीं, देश में 64.5 फीसदी महिलाओं के खिलाफ अपराध होते हैं. केंद्रशासित प्रदेशों की बात करें, तो महिलाओं के खिलाफ अपराध का आंकड़ा 104.5 फीसदी है. सबसे बुरी स्थिति राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की है, जहां महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले 147.6 फीसदी हैं.

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केंद्रशासित प्रदेशों का हाल

अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह में महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले 89.4 फीसदी हैं, जबकि चंडीगढ़ में 61.7 फीसदी, दादर एवं नगर हवेली और दमन एवं दीव में 25.3 फीसदी, लद्दाख में 13.8 फीसदी, लक्षद्वीप में 27.3 फीसदी और पुडुचेरी में 18.5 फीसदी मामले वर्ष 2021 में दर्ज किये गये. जम्मू-कश्मीर में महिलाओं के खिलाफ अपराध के 61.6 फीसदी मामले दर्ज किये गये.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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