सुभाष मुंडा की हत्या लाल झंडे को कमजोर करने की साजिश, दोषियों को जल्द मिले सजा-पूर्व सांसद डॉ रामचंद्र डोम

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 29 Jul 2023 6:46 PM

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सीपीएम के राज्य सचिव प्रकाश विप्लव ने प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि इस वीभत्स हत्याकांड के खिलाफ सीपीएम सहित अन्य वामदलों, सामाजिक संगठनों, जनसंगठनों व सिविल सोसायटी द्वारा राज्यव्यापी विरोध का सिलसिला जारी है. इसी कड़ी में आगामी 3 अगस्त को दलादली चौक पर एक विशाल श्रद्धांजलि सभा होगी.

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रांची: सीपीएम के पोलित ब्यूरो सदस्य व पूर्व सांसद डॉ रामचंद्र डोम ने सुभाष मुंडा हत्याकांड के हर पहलू की जांच कराए जाने और दोषियों को समय सीमा के अंदर गिरफ्तार कर उन्हें सजा दिलाए जाने की मांग की. उन्होंने कहा कि ये लाल झंडे को कमजोर करने की गहरी साजिश है. वे पार्टी के राज्य कार्यालय में प्रेस को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि सुभाष मुंडा दलादली इलाके में कम्युनिस्ट आंदोलन की तीसरी पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते थे. उनके दादा शुक्रा मुंडा एक भूतपूर्व सैनिक थे और युद्ध में उन्होंने अपना एक पैर गंवाया था. सेना से रिटायर होने के बाद वे कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़ गए थे. इस इलाके में आदिवासियों और दूसरे गरीबों के शोषण के खिलाफ हमेशा संघर्ष करते रहते थे. उन्हीं से प्रेरणा लेकर रांची के पंचपरगना क्षेत्र में गरीबों और आदिवासियों की भूमि हड़पने वाले महाजनों के खिलाफ 70 और 80 के दशक में ऐतिहासिक संघर्ष चला था. झारखंड बनने ठीक तीन महीने पहले दलादली का चाय बागान, जो आदिवासियों की जमीन थी और आजादी के बाद अंग्रेजों ने इस जमीन को अवैध तरीके से स्थानीय भूस्वामियों के हवाले कर दिया था. इसे बचाने की लड़ाई शुक्रा मुंडा के नेतृत्व में लड़ी गयी थी. इस दौरान जमींदारों द्वारा की गई फायरिंग में तीन आदिवासियों की मौत हुई थी. हालांकि आक्रोशित आदिवासियों द्वारा आत्मरक्षार्थ तीर-धनुष का इस्तेमाल किए जाने से जमींदार की भी मौत हो गयी थी.

आदिवासियों की हड़पी हुई जमीन को वापस दिलाते थे

सीपीएम के पोलित ब्यूरो सदस्य व पूर्व सांसद डॉ रामचंद्र डोम ने कहा कि दर्जनों आदिवासियों पर मुकदमा दर्ज हुआ था और बाद में कई आदिवासी रैयतों को ही आजीवन कारावास की सजा हो गयी थी. इस संघर्ष के बाद इलाके के बड़े भूस्वामियों से आदिवासियों की हड़पी गयी जमीन की वापसी करायी गयी थी. इसमें सुभाष मुंडा की खानदान की बड़ी संख्या है, जिन्हें उनकी पुश्तैनी जमीन वापस मिली थी. उसी जमीन पर सुभाष मुंडा ने अपनी आजीविका के लिए कुछ दुकानों और भवन का निर्माण कराया था. अभी जो धीमी गति से एक बात प्रचारित की जा रही है कि वे जमीन के कारोबारी थे. पूरी तरह तथ्यहीन है. सुभाष मुंडा आदिवासियों की हड़पी हुई जमीन को वापस दिलाने, जमीन माफिया द्वारा अवैध तरीके से जमीन की लूट के खिलाफ हमेशा केवल मुखर ही नहीं रहते थे, बल्कि इस लूट के खिलाफ गरीबों-आदिवासियों के पक्ष में मजबूती से खड़े भी रहते थे. सुभाष मुंडा केवल जमीन कारोबारी रहते तो उनकी हत्या पर इतना जनाक्रोश नहीं होता और उनकी शव यात्रा में पूरे इलाके से हजारों लोग शामिल थे. इनमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी थीं.

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3 अगस्त को दलादली चौक पर एक विशाल श्रद्धांजलि सभा

सीपीएम के राज्य सचिव प्रकाश विप्लव ने प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि इस वीभत्स हत्याकांड के खिलाफ सीपीएम सहित अन्य वामदलों, सामाजिक संगठनों, जनसंगठनों व सिविल सोसायटी द्वारा राज्यव्यापी विरोध का सिलसिला जारी है. इसी कड़ी में आगामी 3 अगस्त को दलादली चौक पर एक विशाल श्रद्धांजलि सभा होगी, जिसे वामदलों के राज्य नेतृत्व के अलावा सीपीएम की पोलित ब्यूरो सदस्य बृंदा कारात भी संबोधित करेंगी. प्रकाश विप्लव ने कहा कि इस घटना के बाद मुख्यमंत्री सचिवालय से संपर्क करने की लगातार कोशिश की गयी ताकि पार्टी का एक शिष्टमंडल मुख्यमंत्री से मिल सके, लेकिन मुख्यमंत्री सचिवालय ने दर्जनों बार संपर्क किए जाने के बावजूद कोई जवाब नहीं दिया. पार्टी के जिला सचिव सुखनाथ लोहरा ने प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि सुभाष मुंडा के नेतृत्व में नगड़ी प्रखंड में केंद्र सरकार के पायलट प्रोजेक्ट के खिलाफ संघर्ष हो या सिलागाईं में बीर बुधु भगत के स्मारक को बचाने की लड़ाई. सुभाष मुंडा हमेशा संघर्ष की अगली कतार में रहे. उल्लेखनीय है कि सुभाष मुंडा जैसे आदिवासी नेता की हत्या पर आंसू बहाने वाले भाजपा के लोग उस वक्त चुप क्यों थे, जब अर्जुन मुंडा जिस मंत्रालय के मंत्री हैं, उनके ही मंत्रालय के प्रस्ताव पर बीर बुधु भगत स्मारक की जगह एकलव्य विद्यालय बनाया जा रहा था, जबकि सुभाष मुंडा और वहां के ग्रामीणों की मांग थी कि एकलव्य विद्यालय का निर्माण स्मारक स्थल पर नहीं कर, उसे अन्यत्र बनाया जाए. हालांकि काफी संघर्षों के बाद स्मारक की रक्षा की गयी.

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रैली निकालकर भाकपा-माले ने किया था विरोध प्रदर्शन

आपको बता दें कि माकपा के युवा नेता सुभाष मुंडा की हत्या के खिलाफ अपराधियों की गिरफ़्तारी की मांग पर पिछले दिनों आदिवासी संगठनों के रांची बंद के समर्थन में भाकपा-माले कार्यकर्ताओं ने अल्बर्ट एक्का चौक पर विरोध प्रदर्शन किया था. सुभाष मुंडा हत्याकांड की उच्च स्तरीय जांच कराओ, हत्यारों को गिरफ्तार करो, भूमाफिया-पुलिस-नेता गठजोड़ मुर्दाबाद के जोरदार नारों के साथ माले कार्यकर्ताओं ने पार्टी कार्यलय से शहीद चौक होते हुए अल्बर्ट एक्का चौक तक रैली निकाल कर विरोध प्रदर्शन किया था. भाकपा-माले के पोलित ब्यूरो सदस्य जनार्दन प्रसाद ने कहा कि भूमाफिया, पुलिस अधिकारियों और राजनेताओं की एक नापाक गठजोड़ कायम हो गयी है. सुभाष मुंडा की हत्या इसी की परिणति है. दुकान में घुस कर सारेआम हत्या राज्य की विधि व्यवस्था को चुनौती देना है. केन्द्रीय कमिटी सदस्य शुभेंदु सेन ने कहा कि माकपा के यूवा नेता की हत्या समान्य घटना नहीं है. इसके राजनीतिक साठगांठ और सरंक्षण की भी गंभीरता से जांच की जानी चाहिए. हटिया विधानसभा में इसके पूर्व भी लाल झंडे के उभरते नेता बिशुन महतो की हत्या हुई है. हटिया को वधशाला बनने से बचाना चाहिए. माले नेताओं ने कहा कि झारखंड में राजनीतिक हत्यों पर विराम लगाएं.

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हेमंत सोरेन सरकार पर रघुवर दास ने साधा निशाना

इधर, झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी के विधायकों का एक प्रतिनिधिमंडल शनिवार को दिवंगत सुभाष मुंडा के परिजनों से मिला. इस क्रम में इन्होंने सुभाष मुंडा को श्रद्धांजलि अर्पित की एवं परिवार के प्रति गहरी शोक संवेदना व्यक्त की. इस अवसर पर पूर्व सीएम व बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रघुवर दास ने कहा कि सुभाष मुंडा झारखंड का एक सामाजिक सितारा था. अपराधियों की गोली ने इस सितारा को बुझा दिया. यह समाज के लिए अपूरणीय क्षति है. उन्होंने कहा कि राज्य के मुखिया हेमंत सोरेन हैं. वे खुद आदिवासी हैं. उनके होते हुए भी आदिवासियों पर रोज हमले हो रहे हैं. समाज पूरी तरह असुरक्षित महसूस कर रहा है. ऐसा लगता है कि झारखंड में आराजकता का माहौल है. इस सरकार को भू माफिया, खनन माफिया, बालू माफिया तत्व के लोग चला रहे हैं. इन्होंने राज्य की हेमंत सरकार से कहा है कि समाजहित और आदिवासियों की रक्षा का दर्द है तो सुभाष मुंडा हत्याकांड की सीबीआई जांच के लिए गृह मंत्रालय भारत सरकार को अनुशंसा करें. इन्होंने परिवार को ढाढ़स बंधाया कि पूरा भाजपा परिवार आपके साथ है.

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जमीन कारोबारियों से हो रही पूछताछ

आपको बता दें कि माकपा नेता सुभाष मुंडा हत्याकांड में शूटरों को सुपारी देकर हत्या करानेवालों की तलाश जारी है. इस क्रम में पुलिस की विभिन्न टीमों ने रांची जिला और जिले से बाहर 30 स्थानों पर छापेमारी की. मामले में पुलिस ने करीब 45 जमीन कारोबारियों के अलावा वैसे 14 जमीन कारोबारियों से पूछताछ की है, जिन पर फायरिंग आदि को लेकर मामला दर्ज है. पुलिस ने इनकी संलिप्तता पर जांच के लिए सात लोगों को हिरासत में लिया है. एसआईटी की जांच जारी है.

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डीजीपी अजय कुमार सिंह ने दिया है तेजी से जांच का निर्देश

सीपीएम नेता व हटिया विधानसभा क्षेत्र के युवा चेहरा सुभाष मुंडा हत्याकांड में लापरवाही बरतने के आरोप में नगड़ी थाना प्रभारी को सस्पेंड कर दिया गया और रोहित कुमार को नया थाना प्रभारी बनाया गया है. इस मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित की गयी है. झारखंड के डीजीपी अजय कुमार सिंह ने रांची के एसएसपी व एसआईटी को सख्त निर्देश दिया है कि सुभाष मुंडा हत्याकांड में अविलंब कार्रवाई करें और अपराधियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार करें. आपको बता दें कि सुभाष मुंडा की हत्या अपराधियों ने उनके रांची के दलादिली स्थित ऑफिस में घुसकर 26 जुलाई की रात करीब 8 बजे कर दी थी. इससे आक्रोशित लोगों ने तोड़फोड़ और आगजनी की थी. रांची बंद बुलाया गया था. इससे नगड़ी की दुकानें बंद रही थीं और बंद समर्थक रांची में भी बंद कराने सड़क पर उतरे थे. काफी मशक्कत के बाद आक्रोशित लोग माने और सड़क जाम हटाया था.

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झारखंड में विधि व्यवस्था को बताया था चौपट

पिछले दिनों सीपीएम के युवा नेता सुभाष मुंडा की दलादिली चौक में उनके ऑफिस में हत्या की भाकपा के राज्य सचिव महेंद्र पाठक ने भी निंदा की थी. श्री पाठक ने कहा था कि राज्य में विधि व्यवस्था चौपट हो चुकी है. राज्य में रोजाना हत्या, बलात्कार की घटनाएं घट रही हैं. राज्य में कोई भी व्यक्ति सुरक्षित नहीं है. राज्य के जनप्रतिनिधि ,नेतृत्व करने वाले और पुलिस वाले भी असुरक्षित महसूस कर रहे हैं. राज्य में कोयला, लोहा, बॉक्साइट, बालू जमीन माफियाओं के द्वारा घटना को अंजाम दिया जा रहा है. रांची की राजधानी में जमीन माफिया हावी हैं. राजधानी में आईएएस, आईपीएस से लेकर थानेदार तक जमीन के कारोबार में संलिप्त हैं, जिसका उदाहरण रांची के उपायुक्त छवि रंजन हैं, जो सलाखों के पीछे हैं. इसी से अनुमान लगाया जा सकता है कि राज्य की आम जनता सुरक्षित नहीं है. झारखंड में विधि व्यवस्था चौपट हो गयी है.

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