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कोरोना संक्रमण के दौरान झारखंड के 14 जिलों में नहीं थी पर्याप्त दवा, इस जिले की स्थिति तो सबसे खराब- रिपोर्ट

कोरोना संक्रमण के दौरान झारखंड के 14 जिलों में दवाओं की भारी कमी थी. केवल 10 जिलों ही ऐसे थे जहां किसी प्रकार कोई कमी नहीं थी. बस, ट्रेन और हवाई जहाज से रांची आनेवाले 1,55,185 लोगों की कोविड जांच नहीं हो सकी. इसका खुलासा झारखंड सरकार ने खुद अपनी रिपोर्ट में की.

By Prabhat Khabar Print Desk
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कोरोना काल में झारखंड में नहीं थी दवाओं की पर्याप्त स्टॉक
कोरोना काल में झारखंड में नहीं थी दवाओं की पर्याप्त स्टॉक
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Coronavirus In Jharkhand रांची : कोरोना संक्रमण के इलाज के दौरान राज्य के 14 जिलों के सरकारी अस्पतालों (आइसीयू) में किसी न किसी तरह की दवा की कमी थी. सिर्फ दस जिलों के सरकारी अस्पतालों में ही कोविड-19 के इलाज के लिए सभी तरह की दवाएं पर्याप्त मात्रा में थीं. इसका खुलासा राज्य सरकार द्वारा तैयार रिपोर्ट में किया गया है. रिपोर्ट के अनुसार, बस, ट्रेन और हवाई जहाज से रांची आनेवाले 1,55,185 लोगों की कोविड जांच नहीं हो सकी. दवाओं की उपलब्धता के सिलसिले में तैयार इन आंकड़ों में रिम्स का ब्योरा शामिल नहीं है.

54 तरह की दवाओं का हुआ इस्तेमाल :

सरकार द्वारा तैयार दस्तावेज में कोविड-19 के इलाज में कुल 54 तरह की दवाओं के इस्तेमाल का उल्लेख किया गया है. इसमें 22 तरह के इंजेक्शन, 16 तरह के टैबलेट के अलावा आइवी फ्ल्यूड और इनहेलर शामिल हैं. बोकारो, लोहरदगा और पाकुड़ जिले में जिंकोविट टैबलेट भी पर्याप्त मात्रा में नहीं थे. पलामू और पाकुड़ जिले में विटामिन-डी और गोड्डा जिले में विटामिन-सी भी पर्याप्त नहीं थे.

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पलामू जिले में सबसे ज्यादा 26 तरह की दवाओं की कमी थी. पलामू में इंजेक्शन मिथाइल पेडनिसिलिन (60 एमजी), इंजेक्शन नोराडरनालिन, डॉक्सीसाइक्लिन कैप्सूल (100 एमजी), इंजेक्शन टेजोबेक्टम- पिपरासिलिन( 4.5एमजी) और इंजेक्शन कैल्सियम ग्लूकोनेट सहित अन्य प्रकार की दवाएं पर्याप्त नहीं थीं.

इसके बाद धनबाद में 25 तरह की दवाओं की कमी थी. यहां किसी भी तरह का इनहेलर और नेंबुलाइजर सोल्यूशन पर्याप्त मात्रा में नहीं थे. वहीं डेक्सामेथासन, इंजेक्शन पारासिटामोल, इंजेक्शन कैल्सियम ग्लूकोज, इंजेक्शन पेंटाप्राडोल (40 एमजी), इंजेक्शन सिप्राफ्लोक्सासिन (500 एमजी), टैबलेट फ्लेविपिराविर (200 एमजी) सहित अन्य प्रकार की दवाओं की कमी थी. गोड्डा और पाकुड़ जिले में 20-20 तरह की दवाओं की कमी थी.

इन जिलों में भी अलग-अलग तरह के इंजेक्शन, इनहेलर और टैबलेट सहित अन्य प्रकार की दवाएं कम थीं. साहिबगंज में सबसे कम सिर्फ एक दवा की कमी थी. इस जिले में मिथाइल पेडनिसिलिन (60एमजी) नामक इंजेक्शन पर्याप्त नहीं था.

जिलावार दवा की कमी का ब्योरा

जिला कमी उदाहरण

बोकारो 06 इनहेलर,इंजेक्शन

चतरा 00 सभी दवाएं उपलब्ध

देवघर 09 इंजेक्शन,इंसुलीन,टैबलेट

धनबाद 25 इनहेलर,कैप्सूल, इंजेक्शन

दुमका 20 इंजेक्शन,नेबुलाइजर, इनहेलर

गढ़वा 02 इंजेक्शन,आइवी फ्लूड

गिरिडीह 10 इंजेक्शन,इनहेलर, टैबलेट

गोड्डा 20 इंजेक्शन,आइवी फ्लूड,टैबलेट

गुमला 00 सभी दवाएं उपलब्ध

हजारीबाग 00 सभी दवाएं उपलब्ध

जामताड़ा 24 इंजेक्शन,आइवी फ्लू़ड,टैबलेट

खूंटी 00 सभी दवाएं उपलब्ध

जिला कमी उदाहरण

कोडरमा 00 सभी दवाएं उपलब्ध

लातेहार 03 इंजेक्शन

लोहरदगा 22 इंजेक्शन,टैबलेट,इनहेलर

पाकुड़ 20 इंजेक्शन,नेबुलाइजर, टैबलेट

पलामू 26 इंजेक्शन,नेबुलाइजर,इंसुलीन

प सिंहभूम 00 सभी दवाएं उपलब्ध

पू सिंहभूम 04 नेबुलाइजर,आइवी फ्लूड

रामगढ़ 00 सभी दवाएं उपलब्ध

रांची 00 सभी दवाएं उपलब्ध

साहिबगंज 01 इंजेक्शन

सरायकेला 00 सभी दवाएं उपलब्ध

सिमडेगा 00 सभी दवाएं उपलब्ध

Posted By : Sameer Oraon

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Published Date

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