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विवि सिर्फ डिग्री बांटने वाला नहीं, सामाजिक दायित्व का निर्वहन करनेवाला संस्थान बने : कृषि मंत्री

Updated at : 26 Jun 2025 11:40 PM (IST)
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विवि सिर्फ डिग्री बांटने वाला नहीं, सामाजिक दायित्व का निर्वहन करनेवाला संस्थान बने : कृषि मंत्री

--बीएयू ने मनाया 45वां स्थापना दिवस : प्रगतिशील किसान, टॉपर विद्यार्थी व शिक्षक सम्मानित

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–बीएयू ने मनाया 45वां स्थापना दिवस : प्रगतिशील किसान, टॉपर विद्यार्थी व शिक्षक सम्मानित : विश्वविद्यालय परिसर स्थित कृषि इंजीनियरिंग कॉलेज भवन का हुआ उदघाटन : विधायक सुरेश कुमार बैठा ने विद्यार्थियों की नौकरी व छात्रवृत्ति का मुद्दा उठाया विशेष संवाददाता, रांची राज्य की कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा है कि विवि सिर्फ डिग्री बांटने वाला संस्थान नहीं, बल्कि सामाजिक दायित्व का निर्वहन करने वाला बनें. भविष्य को तैयार करने का काम करें. यही शिक्षा वास्तव में अपने समाज, अपने राज्य और अपने देश के हित में होगा. मेधा, विजन, सोच व समर्पण से ही संस्थान की पहचान बनती है. संस्थान के सामने कई तरह की चुनौतियां हैं और उन तमाम चुनौतियों का सामना करने के लिए सरकार तैयार है. सरकार, संस्थान, राजभवन और छात्रों के संयुक्त प्रयास से ही विवि को आगे बढ़ाया जा सकता है. यहां व्यक्तिगत स्वार्थ और सोच को दूर रखते हुए विवि के उद्देश्य को पूर्ण करने की दिशा में कदम बढ़ाना होगा. मंत्री नेहा तिर्की गुरुवार को बिरसा कृषि विवि के 45वें स्थापना दिवस समारोह पर रांची कृषि महाविद्यालय सभागार में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रही थीं. इससे पूर्व मंत्री ने विवि परिसर स्थित कृषि इंजीनियरिंग कॉलेज भवन का उदघाटन किया. मंत्री ने कहा कि विवि को राज्य के किसानों के सामाजिक, आर्थिक और तकनीकी सुदृढ़ीकरण का केंद्र बनना चाहिए. विवि के वैज्ञानिकों, शिक्षकों व विद्यार्थियों को किसानों तक पहुंचने की आवश्यकता है. नियमित रूप से गांव का भ्रमण जरूरी है. मंत्री ने कई विद्यार्थियों से पूछा कि वह कृषि, पशुपालन, वानिकी जैसे विषयों को क्यों पढ़ने आये हैं, इस पर सलाह दी कि जब वे नौकरी में आ जायें, तो अपने समय और संसाधन का कुछ अंश समाज के लिए भी अर्पित करें. कांके विधायक सुरेश कुमार बैठा ने विवि में अध्ययनरत विद्यार्थियों की नौकरी व छात्रवृत्ति का मुद्दा उठाया. कृषि सचिव अबू बकर सिद्दिख ने कहा कि विवि एक पासपोर्ट की तरह है, इसी से छात्रों का भविष्य है. ज्ञान के लिए विवि जरूरी है. शिक्षकों को शिक्षा के क्षेत्र किसी तरह का कोई समझौता नहीं करना चाहिए. इससे पूर्व विवि के कुलपति डॉ सतीश चंद्र दुबे ने कहा कि क्लाइमेट रेसिलियंट और बायो फोर्टिफाइड फसल प्रभेदों का विकास तथा कृषि पद्धति में बागवानी और पशुपालन का समावेश करना विवि का भावी कार्यक्रम है. विवि में शिक्षकों, वैज्ञानिकों, अधिकारियों व कर्मचारियों की कमी, कर्मियों के लिए एसीपी/एमएसीपी लागू करने की ओर भी मंत्री का ध्यान आकृष्ट कराया. संचालन शशि सिंह ने किया. जो सम्मानित किये गये : इस अवसर पर किसान संगीता कुमारी (बोकारो), सीताराम दांगी (चतरा), तरुणा मुर्मू (गिरिडीह), दीपक कुमार (पाकुड़), गोपाल भगत (रांची) को सम्मानित किया गया. 84 वर्ष से अधिक छह सेवानिवृत्त कर्मियों में शिक्षक डॉ ज्योतींद्र प्रसाद श्रीवास्तव, डॉ कृष्णा प्रसाद सिंह, डॉ रामदेव प्रसाद गुप्ता तथा कर्मचारियों में बिनोद बिहारी सिन्हा, रामानंदी प्रसाद सिंह व कन्हैया प्रसाद श्रीवास्तव को सम्मानित किया गया. निबंध प्रतियोगिता में शिक्षिका डॉ नंदिनी, वंदना चौबे सहित विद्यार्थी इशा श्रीवास्तव, चंदन यादव, स्मिता शालिनी कुल्लू, कर्मचारियों में अखिलेश, भारती को सम्मानित किया गया.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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DEEPESH KUMAR

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