दक्षिण अफ्रीका में विधानसभा अध्यक्ष रबींद्र नाथ महतो ने जलवायु संकट पर रखी बात, कहा- संसदें बनें तैयारी के सदन

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दक्षिण अफ्रीका में अध्यक्ष ने दिया व्याख्यान | Prabhat Khabar Network

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जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर दक्षिण अफ्रीका में आयोजित राष्ट्रमंडल संसदीय संघ के सम्मेलन में विधानसभा अध्यक्ष रबींद्र नाथ महतो ने अहम बातों पर प्रकाश डाला. उन्होंने जलवायु अनुकूलन को केवल पर्यावरण से परे विकास और जनसुरक्षा से जोड़ने की वकालत की.

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रांची: राष्ट्रमंडल संसदीय संघ के सम्मेलन में बुधवार को विधानसभा अध्यक्ष रबींद्र नाथ महतो ने पार्लियामेंटरी लीडरशिप इन क्लाइमेट एडप्टेशन एंड रिजिलियेंस विषय पर अपनी बात रखी. सम्मेलन का आयोजन दक्षिण अफ्रीका के केपटाउन में किया जा रहा है. राष्ट्रमंडल संसदीय संघ का यह सम्मेलन 13 से 19 सितंबर तक विभिन्न सत्रों में आयोजित हो रहा है. झारखंड शाखा के डेलीगेट के रूप में श्री महतो इसमें भाग ले रहे हैं.

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जलवायु अनुकूलन को विकास और जनसुरक्षा से जोड़ा

रबींद्र नाथ महतो ने कहा कि जलवायु अनुकूलन को केवल पर्यावरण नीति का विषय नहीं, बल्कि विकास, जनसुरक्षा और आजीविका की रक्षा का महत्वपूर्ण माध्यम माना जाना चाहिए. अनियमित वर्षा, जल स्रोतों का तेजी से सूखना, अत्यधिक गर्मी तथा कृषि और आजीविका पर बढ़ता दबाव वर्तमान समय की प्रमुख चुनौतियां हैं. उन्होंने कहा कि भारत ने क्लाइमेट जस्टिस को ध्यान में रखते हुए जलवायु अनुकूलन और जलवायु सहनशीलता के लिए घरेलू स्तर पर निवेश किया है. भारत ने 2035 तक 2005 के स्तर की तुलना में उत्सर्जन तीव्रता में 47 प्रतिशत कमी का लक्ष्य तय किया है. इसके अलावा 60 प्रतिशत गैर-जीवाश्म विद्युत क्षमता और 3.5 से 4.0 अरब टन अतिरिक्त कार्बन सिंक का लक्ष्य भी निर्धारित किया गया है.

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टिकाऊ बुनियादी ढांचे पर दिया जोर

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि भविष्य की जलवायु परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए आज बनाई जा रही सड़क, स्कूल, अस्पताल और जल प्रणालियों को टिकाऊ बनाया जाना चाहिए. जलवायु संबंधी निर्णयों में किसान, वैज्ञानिक, आदिवासी समुदाय, महिलाएं, श्रमिक, युवा और दिव्यांगजनों की प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि बाढ़ और सूखे के बाद केवल राहत पर निर्भर रहने के बजाय पूर्व तैयारी, जल संरक्षण, वाटरशेड विकास और वर्षा जल संचयन को मजबूत करने की आवश्यकता है.

संसदों को तैयारी के केंद्र के रूप में विकसित करने की जरूरत

उन्होंने कहा कि संसद कानून, बजट, जांच-परख और प्रतिनिधित्व के माध्यम से जलवायु अनुकूलन के प्रयासों को और अधिक सशक्त बना सकती है. सहनशीलता विकास में बाधा नहीं, बल्कि बेहतर और टिकाऊ विकास की आधारशिला है. उन्होंने कहा कि हमारी संसदें केवल बहस के सदन नहीं, बल्कि भविष्य की चुनौतियों से निपटने की तैयारी के सदन बनें.

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