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झारखंड में डायन-बिसाही के नाम पर 7 माह में 17 हत्या, जानें किस राज्य में हुए सबसे ज्यादा मर्डर

Updated at : 08 Sep 2022 4:17 PM (IST)
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झारखंड में डायन-बिसाही के नाम पर 7 माह में 17 हत्या, जानें किस राज्य में हुए सबसे ज्यादा मर्डर

Witchcraft in India: दो साल में झारखंड में डायन-बिसाही के आरोप में 38 लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया. वर्ष 2021 में 21 लोगों की हत्या कर दी गयी, जबकि वर्ष 2022 में 7 महीने में (जुलाई तक) 17 लोगों को डायन-बिसाही या जादू-टोना के मामले में मौत के घाट उतार दिया गया.

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Witchcraft in India: झारखंड में डायन-बिसाही और उससे होने वाली मौत के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं. हाल ही में राजधानी रांची के सोनाहातू में तीन महिलाओं (राइलू देवी, ढोली देवी और आलोमनी देवी) की पत्थर से कूचकर हत्या कर दी गयी थी. इसके बाद गढ़वा जिला में एक महिला और उसके पति को डायन बताकर उस पर लाठी-डंडों से मार-मारकर अधमरा कर दिया. दंपती की शिकायत पर भवनाथपुर थाना की पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया.

दो साल में 38 लोगों को मौत के घाट उतारा गया

महज दो साल में झारखंड में डायन-बिसाही के आरोप में 38 लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया. वर्ष 2021 में 21 लोगों की हत्या कर दी गयी, जबकि वर्ष 2022 में 7 महीने में (जुलाई तक) 17 लोगों को डायन-बिसाही या जादू-टोना के मामले में मौत के घाट उतार दिया गया. ये झारखंड पुलिस के आंकड़े हैं. हालांकि, नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़े कुछ और कहते हैं.

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व्यक्तिगत लाभ के लिए हुई 480 लोगों की हत्या

वर्ष 2022 में वर्ष 2021 के आंकड़े एनसीआरबी ने जारी किये, जिसमें बताया गया है कि झारखंड में व्यक्तिगत लाभ के लिए 480 लोगों की हत्या की गयी, जबकि व्यक्तिगत दुश्मनी या बदले की भावना से 220 लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया. दहेज हत्या के 42 मामले सामने आये. वहीं डायन-बिसाही या जादू-टोना मामले में 3 लोगों की हत्या की गयी. हालांकि, राज्य पुलिस के आंकड़ों में इस मामले में मरने वालों की संख्या 21 रही.

डायन-बिसाही मामले में सबसे ज्यादा 20 मौतें छत्तीसगढ़ में

डायन-बिसाही मामले में सबसे ज्यादा मौतें छत्तीसगढ़ में हुईं. यहां 20 लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया. मध्यप्रदेश में 18, आंध्रप्रदेश में 6, बिहार में 4, गुजरात में 2, ओड़िशा में 2, राजस्थान में 1, तेलंगाना में 11, उत्तर प्रदेश में 1 हत्या जादू-टोना की वजह से हुई. इस तरह एक साल में 68 लोगों को डायन-बिसाही मामले में मार दिया गया. केंद्रशासित प्रदेशों में ऐसी कोई घटना सामने नहीं आयी.

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झारखंड में वर्ष 2022 में 7 महीने में 17 लोगों की हत्या

झारखंड में वर्ष 2022 के 7 महीने में 17 लोगों को मार डाला गया. झारखंड पुलिस के आंकड़ों पर गौर करेंगे, तो पायेंगे कि सिर्फ जुलाई में 7 लोगों को मार डाला गया. राजधानी रांची में 1, उपराजधानी दुमका में 1, जामताड़ा में 1, गुमला में 1, सिमडेगा में 1, खरसावां में 1 और गढ़वा में 1 व्यक्ति की हत्या डायन-बिसाही के शक में कर दी गयी.

मार्च, अप्रैल और मई में डायन-बिसाही के नाम पर नहीं हुई हत्या

मार्च, अप्रैल और मई में ऐसी कोई घटना नहीं हुई. जनवरी में कुल 4 लोगों को मार डाला गया. ये घटनाएं गिरिडीह, खूंटी, गुमला और पश्चिमी सिंहभूम में हुईं. फरवरी के महीने में सिर्फ लातेहार में डायन-बिसाही के शक में एक व्यक्ति को मौत के घाट उतार दिया गया. जून में 5 लोगों को मार डाला गया. ये घटनाएं दुमका, लोहरदगा, लातेहार और गढ़वा में हुईं. दुमका में 2 लोगों की हत्या कर दी गयी.

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वर्ष 2021 में 21 लोगों की हुई मौत

वर्ष 2021 में एक साल में 21 लोगों को मार डाला गया. सबसे ज्यादा 5 हत्याएं मार्च में हुईं. जुलाई और सितंबर में 3-3 लोगों की हत्या हुई, जबकि फरवरी, मई, अगस्त और नवंबर में 2-2 लोगों को मौत के घाट उतार डाला गया. फरवरी में गुमला और लातेहार में जादू-टोना के शक में एक-एक व्यक्ति की हत्या हुई, जबकि मार्च में रांची, दुमका, साहिबगंज, पाकुड़ और पश्चिमी सिंहभूम में कुल 5 लोगों की मौत हुई.

अप्रैल व अक्टूबर में जादू-टोना से कोई मौत नहीं

मई में गिरिडीह और खूंटी में एक-एक व्यक्ति की हत्या की गयी, जबकि जून में सिर्फ गढ़वा में ऐसी एक घटना सामने आयी. जुलाई में पाकुड़, खूंटी और गुमला में ऐसी एक-एक घटना हुई. अगस्त में लोहरदगा और हजारीबाग में 1-1 वारदात हुई, जबकि सितंबर में तीन घटनाएं हुईं. खूंटी में 2 और गुमला में एक व्यक्ति की हत्या कर दी गयी. नवंबर में रांची और खूंटी में ऐसी घटनाएं हुईं, जबकि दिसंबर में हजारीबाग में एक व्यक्ति की हत्या करदी गयी. अप्रैल और अक्टूबर में डायन-बिसाही माले में राज्य में हत्या की कोई घटना नहीं हुई.

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प्रभात खबर की अपील

डायन-बिसाही, ओझा-गुणी, तंत्र-मंत्र, टोना-टोटका के नाम पर देश के अलग-अलग हिस्सों में लोगों को मार डाला जाता है. झारखंड में भी ऐसी घटनाएं होती हैं. हत्या की मूल वजह कुछ और होती है, लेकिन उसे डायन-बिसाही या जादू-टोना का नाम दे दिया जाता है. सर्पदंश, बीमारी व अन्य कारणों से होने वाली मौतों के कारण अंधविश्वास में फंसकर अपराधी न बनें. किसी के साथ मार-पिटाई न करें. हत्यारा न बनें. सर्पदंश या बीमारी का इलाज डॉक्टर कर सकते हैं. सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर मुफ्त इलाज करते हैं. वहां जायें. अपराध करने से बचें.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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