रांची : 510 प्लस टू स्कूलों में प्राचार्य नहीं, प्रभारी के भरोसे चल रहा है काम

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 04 Jan 2020 6:05 AM

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रांची : राज्य के 510 प्लस टू स्कूलों में अब तक प्राचार्यों की नियुक्ति नहीं हुई है. कारण यह है कि स्कूली शिक्षा व साक्षरता विभाग द्वारा वर्ष 2012 में प्लस टू स्कूलों में प्राचार्य व उप प्राचार्य की नियुक्ति के लिए नियमावली तो बना ली गयी, लेकिन आज तक प्राचार्य व उप प्राचार्य का […]

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रांची : राज्य के 510 प्लस टू स्कूलों में अब तक प्राचार्यों की नियुक्ति नहीं हुई है. कारण यह है कि स्कूली शिक्षा व साक्षरता विभाग द्वारा वर्ष 2012 में प्लस टू स्कूलों में प्राचार्य व उप प्राचार्य की नियुक्ति के लिए नियमावली तो बना ली गयी, लेकिन आज तक प्राचार्य व उप प्राचार्य का पद ही सृजित नहीं किया गया. राज्य गठन के बाद अब तक प्लस टू स्कूलों में तीन बार शिक्षकों की नियुक्ति हुई, पर प्राचार्य की नियुक्ति नहीं हुई. राज्य गठन के समय झारखंड में 59 प्लस टू स्कूल थे, राज्य गठन के बाद 451 हाइस्कूल को प्लस टू स्कूल में अपग्रेड किया गया.
इसमें वैसे हाइस्कूल भी शामिल हैं, जिसे पहले मध्य विद्यालय से उच्च विद्यालय और बाद में प्लस टू स्कूल में अपग्रेड किया गया. ऐसे स्कूलों में अब भी मध्य विद्यालय के शिक्षक ही प्लस टू स्कूल के प्रभारी प्राचार्य हैं. प्लस टू शिक्षक संघ प्लस टू शिक्षकों को विद्यालय का प्रभारी बनाने की मांग विभाग से करते रहे हैं. नियमावली के अनुरूप 33 फीसदी पदों को प्राेन्नति से, जबकि 67 फीसदी पदों को सीधी नियुक्ति से भरना है.
प्लस टू शिक्षक संघ के सुनील कुमार ने बताया कि प्लस टू स्कूलों में मध्य विद्यालय के शिक्षक को प्रभारी प्राचार्य बना दिया गया है. जबकि प्लस टू शिक्षकों की योग्यता मध्य विद्यालय के शिक्षक से अधिक है. प्लस टू स्कूल में प्राचार्य व उप प्राचार्य पद पर नियुक्ति के लिए नियमावली केंद्रीय विद्यालय के तर्ज पर बनायी गयी है. केंद्रीय विद्यालय में स्थायी प्राचार्य नहीं होने पर विद्यालय के वरीय पीजीटी शिक्षक को प्रभारी प्राचार्य बनाया जाता है, जबकि झारखंड में मध्य विद्यालय के शिक्षक को भी प्लस टू स्कूल का प्रभारी बना दिया जाता है.
मध्य विद्यालय में तीन हजार से अधिक पद रिक्त
राज्य के मध्य व उच्च विद्यालयों में भी प्रधानाध्यापक नहीं हैं. राज्य के 3226 मध्य विद्यालयों में प्रधानाध्यापक का पद सृजित है. इसमें से लगभग 100 विद्यालयों में ही स्थायी प्राचार्य हैं. अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश प्रवक्ता नसीम अहमद ने मध्य विद्यालयों में प्रधानाध्यापकों के रिक्त पदों को जल्द से जल्द प्रोन्नति से भरने की मांग की है. एक ओर विद्यालयों में प्रधानाध्यापक का पद रिक्त है, दूसरी ओर शिक्षक बिना प्रोन्नति के सेवानिवृत्त हो रहे हैं. इससे शिक्षकों में काफी आक्रोश है. राज्य के अपग्रेड उच्च विद्यालयों में भी आज तक प्रधानाध्यापक की नियुक्ति नहीं हुई है. राज्य में एक हजार से अधिक मध्य विद्यालयों को उच्च विद्यालय में अपग्रेड किया गया है. प्रभारी प्रधानाध्यापक के भरोसे ही अपग्रेड उच्च विद्यालय चल रहा है.
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