बारिश ने किसानों के चेहरों पर ला दी रौनक, खिजरी के लपरा पंचायत से धान रोपाई की शुरुआत

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फ़ोटो 1 - मंगरुत्तरी में धनरोपनी करते मजदूर. | Prabhat Khabar Network

मंगरुत्तरी में धनरोपनी करते मजदूर | Prabhat Khabar Network

मैक्लुस्कीगंज और आसपास के क्षेत्रों में अच्छी बारिश के बाद किसानों ने धान की रोपाई शुरू कर दी है. लपरा पंचायत क्षेत्र के किसानों ने पहले पारंपरिक पूजन किया. और इसके बाद खेतों में रोपनी कार्य की शुरूआत की.

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रांची / मैक्लुस्कीगंजः धान रोपनी के लिए बारिश का इंतजार कर रहे किसानों के चेहरे पर अब रौैनक आ गई है. जुलाई के मध्य में हो रही झमाझम बारिश के साथ किसान अपने-अपने खेतों में उतार आए हैं. और धान रोपाई की तैयारी में जुट गए हैं. मैक्लुस्कीगंज के खलारी प्रखंड अंतर्गत लपरा पंचायत क्षेत्र में किसानों ने खेतों की जुताई के बाद धान रोपनी शुरू कर दी है. इससे पहले पंचायत के सभी गांवों के किसानों ने पारंपरिक पूजन किया. इसके बाद पंचायत के मंगरुत्तरी निवासी बाबूराम मुंडा की नम्बर खेत में धान रोपनी शुरू की गई.

तेजी से चल रहा खेतों की जुताई का कार्य

दूसरी ओर लपरा पंचायत के नावाडीह, हेसालौंग, जोभिया व मायापुर पंचायत के दुल्ली, केदल, हरहु, सरना, कोनका सहित कुछ क्षेत्रों में भी खेतों की जुताई कर उन्हें रोपाई के लिए तैयार किया जा रहा है. खेतों की जुताई का कार्य ट्रैक्टरों से तेजी से चल रहा है. बीच जुलाई में शुरू हुई बारिश ने किसानों के चेहरों पर खुशी ला दी है. कुछ किसानों ने देरी से बिचड़ा लगाया था, उनका बिचड़ा अभी ठीक से तैयार नहीं हो पाया है जिसके कारण अभी वे रोपनी की शुरूआत नहीं कर पाए हैं. हालांकि अच्छी पैदावार की उम्मीद से उनके चेहरे खुशी की झलक साफ देखी जा सकती है.

किसानों को धान रोपाई के लिए करनी पड़ रही जेब ढीली

किसानों ने बताया कि वर्षा ने साथ दिया तो इस बार धान के फसल के लिए मौसम पूरी तरह अनुकूल है. ऐसा मौसम रहा तो पैदावार अच्छी होने की संभावना है. उन्होंने बताया कि रोपाई के लिए शुरुआत में मजदूर तो मिल रहे हैं, लेकिन 8-10 दिनों के बाद मजदूर मिलना मुश्किल हो सकता है. मजदूरों ने अपने दाम भी बढ़ा दिए हैं. मजदूर धान की रोपाई की मजदूरी 300 और 250 सौ रुपये प्रति दिन के हिसाब से ले रहे हैं. इससे किसानों को जेब काफी ढीली करनी पड़ रही है.

पाहाणों व जानकारों की किसानों को सलाह

पानी की निकासी करें, जिन स्थानों पर बिचड़ा दिया गया है, वहां मेड़ काटकर अतिरिक्त पानी खेतों से बहा दें ताकि बिचड़ा डूबकर खराब न हो, तैयार हो चुके बिचड़े के लिए रोपाई का यह समय बिल्कुल सही है, किसान निसंकोच रोपाई का कार्य शुरू कर सकते हैं.


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Rohit Kumar Maht

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By Rohit Kumar Maht

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