रांची : मेडिकल डायरेक्टर की नियुक्ति का जोरदार विरोध

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 11 Jun 2019 9:23 AM

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रांची : संत बरनाबास अस्पताल में नये मेडिकल डायरेक्टर की नियुक्ति के खिलाफ अस्पताल के डॉक्टरों और स्टाफ ने मोर्चा खोल दिया है. सोमवार को उन्होंने अस्पताल के अध्यक्ष, बिशप बीबी बास्के को ज्ञापन सौंपा. इसमें कहा गया है कि एक जून से एक नये मेडिकल डायरेक्टर की नियुक्ति दो लाख रुपये प्रतिमाह (व अन्य […]

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रांची : संत बरनाबास अस्पताल में नये मेडिकल डायरेक्टर की नियुक्ति के खिलाफ अस्पताल के डॉक्टरों और स्टाफ ने मोर्चा खोल दिया है. सोमवार को उन्होंने अस्पताल के अध्यक्ष, बिशप बीबी बास्के को ज्ञापन सौंपा. इसमें कहा गया है कि एक जून से एक नये मेडिकल डायरेक्टर की नियुक्ति दो लाख रुपये प्रतिमाह (व अन्य सुविधाएं) पर की गयी है. चैरिटेबल अस्पताल ऐसे खर्च नहीं उठा सकता. इस अस्पताल के डॉक्टरों और स्टाफ इस नियुक्ति से सहमत नहीं हैं.
डॉक्टरों और अन्य स्टाफ का कहना है कि इस नियुक्ति से अस्पताल पर वित्तीय बोझ बढ़ेगा. उन्हें देय वेतन भी न्यायोचित नहीं है, क्योंकि उन्हें जो कार्य दिया गया है, वह एक ऑफिस मैनेजर का है. यही कार्य पूर्व में अस्पताल के एेडमिनिस्ट्रेटर 50,000 रुपये प्रतिमाह पर करते थे. इसलिए अनुरोध है कि 72 घंटों में इस नियुक्ति पर स्थिति स्पष्ट करें, अन्यथा अस्पताल के डॉक्टर और स्टाफ इस नियुक्ति के खिलाफ लोकतांत्रिक तरीका अपनायेंगे़
10 साल से बिना किसी पारिश्रमिक के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट के पद पर रहे डॉ केनेथ सोयमुरुम : ज्ञापन में कहा गया है कि यह अस्पताल एक रजिस्टर्ड सोसाइटी द्वारा संचालित है और नियुक्ति, निलंबन, सेवा समाप्ति या पदोन्नति सोसाइटी और इसकी कमेटियाें द्वारा होने चाहिए. डॉ केनेथ सोयमुरुम इस अस्पताल में 10 साल से बिना किसी पारिश्रमिक के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट के पद पर कार्यरत थे. उस समय अस्पताल की आर्थिक स्थिति अत्यंत बदतर थी. इसके बाद अस्पताल की स्थिति में लगातार सुधार हुआ है.
वहीं, अस्पताल के कर्मचारियों का वेतन पुनरीक्षण अब तक नहीं हुआ है, क्योंकि अस्पताल की आमदनी का ज्यादातर हिस्सा अस्पताल के विकास और मरीजों की बेहतरी पर खर्च किया जा रहा है. दूसरे अस्पतालों की तुलना में इस अस्पताल का परामर्श शुल्क बहुत कम है. इसके बाद भी परामर्श के जो पैसे मिलते हैं, उसका 10 फीसदी अस्पताल के विकास के लिए दिया जाता है. अस्पताल के सर्विस रूल के अनुसार इसमें मेडिकल डायरेक्टर का कोई पद नहीं है. इस नियुक्ति से छोटानागपुर डायसिस एग्जिक्यूटिव कमेटी के क्षेत्राधिकार का हनन हुआ है.
मेडिकल डायरेक्टर को दिया गया कार्य
नये मेडिकल डायरेक्टर की नियुक्ति पत्र के अनुसार उन्हें अस्पताल का एकाउंट मेंटेंन करने, एनुअल रिपोर्ट, मेंटेनेंस ऑफ कैश बुक, आॅडिट आदि कार्य दिये गये हैं.
डायसिस का निर्णय है
डायसिस ने मेडिकल डायरेक्टर की नियुक्ति का निर्णय लिया है. अस्पताल में एक भी स्थायी डॉक्टर नहीं था. इसलिए यह नियुक्ति जरूरी थी.
बिशप बीबी बास्के, चेयरमैन, संत बरनाबास अस्पताल
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