रांची : झारखंड राज्य हज समिति का किया जायेगा पुनर्गठन, याचिका निष्पादित
Updated at : 14 Dec 2018 9:01 AM (IST)
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रांची : हाइकोर्ट के जस्टिस राजेश शंकर की अदालत में गुरुवार को झारखंड राज्य हज समिति के गठन को चुनौती देनेवाली याचिका पर सुनवाई हुई. अदालत ने समिति का पुनर्गठन करने का आदेश दिया. साथ ही अदालत ने सरकार की अोर से महाधिवक्ता के पक्ष को रिकॉर्ड पर लेते हुए याचिका को निष्पादित कर दिया. […]
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रांची : हाइकोर्ट के जस्टिस राजेश शंकर की अदालत में गुरुवार को झारखंड राज्य हज समिति के गठन को चुनौती देनेवाली याचिका पर सुनवाई हुई.
अदालत ने समिति का पुनर्गठन करने का आदेश दिया. साथ ही अदालत ने सरकार की अोर से महाधिवक्ता के पक्ष को रिकॉर्ड पर लेते हुए याचिका को निष्पादित कर दिया. इससे पूर्व सरकार की अोर से जवाब दाखिल नहीं करने पर महाधिवक्ता अजीत कुमार को उपस्थित होना पड़ा. उन्होंने स्वीकार किया कि राज्य हज समिति के गठन में त्रुटियां हैं. सरकार इसमें शीघ्र सुधार कर लेगी. प्रार्थी की अोर से अधिवक्ता मो मुख्तार खान ने बताया कि समिति का गठन संवैधानिक नहीं है. इसे भंग कर नयी समिति का गठन किया जाना चाहिए.
उल्लेखनीय है कि प्रार्थी शमीम अली (एस अली) ने याचिका दायर कर झारखंड राज्य हज समिति के गठन को चुनाैती दी थी. प्रार्थी का कहना था कि हज समिति अधिनियम-2002 का अनुपालन नहीं किया गया. उक्त अधिनियम की धारा-18 के अनुसार, स्थानीय निकाय कोटे से तीन मुस्लिम सदस्य लेना है, जिसमें दो फर्जी वार्ड पार्षदों को सदस्य बना दिया गया. मुस्लिम विद्वान कोटे से तीन सदस्यों को लेना है, लेकिन दो सदस्य ही बनाये गये.
पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन, फाइनेंस, एजुकेशन, कल्चर या सोशल वर्क कोटे से पांच लोगों को सदस्य बनाना था, लेकिन सात लोगों को सदस्य बना दिया गया. वहीं संसद, विधानसभा व विधान परिषद से तीन सदस्य को लिए जाना था. इस कोटे से राज्यसभा व विधानसभा से दो सदस्य को लिया गया.
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