आइएफएस को बैड कैडर कहा जाने लगा है झारखंड में
Updated at : 17 Oct 2018 8:34 AM (IST)
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रांची : भारतीय वन सेवा (आइएफएस) के अधिकारियों को झारखंड में बैड कैडर कहा जाने लगा है. इस सेवा के अधिकारियों को न तो समय पर प्रमोशन मिल रहा है और न ही केंद्र व राज्य सरकार में प्रतिनियुक्ति में उचित स्थान. इससे अधिकारियों ने नाराजगी जतायी है. भारतीय वन सेवा संघ की झारखंड इकाई […]
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रांची : भारतीय वन सेवा (आइएफएस) के अधिकारियों को झारखंड में बैड कैडर कहा जाने लगा है. इस सेवा के अधिकारियों को न तो समय पर प्रमोशन मिल रहा है और न ही केंद्र व राज्य सरकार में प्रतिनियुक्ति में उचित स्थान. इससे अधिकारियों ने नाराजगी जतायी है.
भारतीय वन सेवा संघ की झारखंड इकाई ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है. संघ के अध्यक्ष एमपी सिंह, सचिव रवि रंजन, उपाध्यक्ष शैलजा सिंह के हस्ताक्षर से पत्र जारी किया गया है.
इसमें लिखा गया है कि पांचवें केंद्रीय वेतन आयोग में आइएफएस के अधिकारियों के लिए कई अनुशंसाएं की गयी हैं, लेकिन इसका पालन नहीं हो रहा है. इस संबंध में मुख्यमंत्री को स्मार पत्र भी दिया गया था. इसमें आइएएस और आइपीएस की तरह सुविधा का हवाला दिया गया है. दूसरे राज्य के एक बैच के अधिकारी प्रमोशन लेकर आगे बढ़ गये हैं. जबकि झारखंड में इसका लाभ नहीं मिला है.
2002 में भारतीय वन सेवा के अधिकारियों के लिए प्रमोशन की नियमावली बनायी गयी थी. इसके तहत चार साल में सीनियर टाइम स्केल में प्रमोशन का प्रावधान है. नौ साल की सेवा होने के बाद जूनियर प्रशासनिक ग्रेड में प्रमोशन का प्रावधान है. 13 साल की सेवा के बाद सेलेक्शन ग्रेड में शामिल करना है.
14 साल की सेवा के बाद वन संरक्षक के पद पर प्रमोशन का प्रावधान है. 18 साल में सीसीएफ तथा 25 साल की सेवा पूरी होने पर एपीसीसीएफ के पद पर प्रमोशन का प्रावधान है. इसी तरह 30 साल की सेवा होने पर पीसीसीएफ बनाया जाना है. इसके बाद भी कई पे कमीशन की अनुशंसा के बाद भी इसका पालन नहीं हो रहा है.
केंद्रीय प्रतिनियुक्ति की नहीं मिल रही अनुमति
पत्र में जिक्र है कि राज्य में आइएफएस के 142 पद चिह्नित हैं. इसमें 17 केंद्रीय प्रतिनियुक्ति वाले पद हैं. इससे ही आइएफएस अधिकारियों को अपर सचिव और केंद्र में संयुक्त सचिव के पद पर प्रमोशन का रास्ता तैयार होगा.
केंद्र ने जो कोटा तय किया है, उससे कम आइएफएस अधिकारी भारत सरकार में पदस्थापित हैं. केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने के लिए कई अधिकारियों ने आवेदन दिया है लेकिन इनकी संचिका अब तक लंबित है. वर्तमान में मात्र आठ अधिकारी ही केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर हैं. आइएफएस नियमावली के अनुसार कुल कैडर के करीब 25 फीसदी अधिकारी राज्य में प्रतिनियुक्ति रहेंगे. इस हिसाब से करीब 21 अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति राज्य में होनी चाहिए. जबकि वर्तमान में आठ अधिकारी ही प्रतिनियुक्त हैं.
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