रांची : जपला सीमेंट फैक्ट्री परिसर में इंडस्ट्रियल एरिया बसाने की तैयारी
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :15 Aug 2018 6:36 AM (IST)
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सुनील चौधरी रांची : जपला सीमेंट फैक्टरी परिसर में उद्योग विभाग इंडस्ट्रियल एरिया बसाना चाहता है. ताकि एमओयू कर चुकी कंपनियों को वहां जमीन दी जा सके. इससे संबंधित एक प्रस्ताव बनाकर मुख्यमंत्री की मंजूरी के लिए भेजा गया है. हालांकि, अबतक मुख्यमंत्री द्वारा मंजूरी नहीं दी गयी है. फिलहाल प्रस्ताव सीएम के पास ही […]
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सुनील चौधरी
रांची : जपला सीमेंट फैक्टरी परिसर में उद्योग विभाग इंडस्ट्रियल एरिया बसाना चाहता है. ताकि एमओयू कर चुकी कंपनियों को वहां जमीन दी जा सके. इससे संबंधित एक प्रस्ताव बनाकर मुख्यमंत्री की मंजूरी के लिए भेजा गया है. हालांकि, अबतक मुख्यमंत्री द्वारा मंजूरी नहीं दी गयी है. फिलहाल प्रस्ताव सीएम के पास ही है.
जपला सीमेंट फैक्टरी परिसर 176 एकड़ में है, जिसमें 99 एकड़ में फैक्टरी है और 77 एकड़ में आवासीय परिसर, स्कूल, प्ले ग्राउंड, डायरेक्टर बंगला है. उद्योग विभाग द्वारा 99 एकड़ में औद्योगिक क्षेत्र बनाने का प्रस्ताव दिया गया है. इसमें 50 से अधिक लघु उद्योग खुल सकते हैं.
उपेंद्र सिंह के प्रस्ताव पर नहीं बनी बात
वर्ष 1992 से बंद पड़ी जपला सीमेंट फैक्टरी के मशीनों की नीलामी पटना उच्च न्यायालय ने इसी साल मई माह में करायी. इसे उपेंद्र निखिल हाइटेक कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड ने 12.56 करोड़ की बोली लगाकर हासिल कर लिया. इसके प्रोपराइटर उपेंद्र सिंह ने फैक्टरी को दोबारा खोलने की बात कही थी.
उद्योग विभाग द्वारा उन्हें प्रस्ताव तैयार करने निर्देश दिया. सूत्रों ने बताया कि उपेंद्र सिंह ने फैक्टरी को दोबारा चालू करने के लिए 500 करोड़ रुपये का डीपीआर तैयार करके दिया था. लेकिन सरकार की ओर से कहा गया कि इतनी बड़ी रकम किस आधार पर प्रोपराइटर को दिया जाये. भविष्य में फैक्टरी चलेगी या नहीं इसे लेकर सरकार आशंकित है. ऐसे में अब तक इस पर कोई फैसला नहीं हुआ है.
इसी बीच उद्योग विभाग द्वारा नया प्रस्ताव दिया गया, जिसमें मशीन आदि हटने के बाद वहां इंडस्ट्रियल एरिया बसाने की बात कही गयी है. हालांकि, यह अभी आरंभिक स्तर पर ही है. इस पर कोई फैसला नहीं हुआ. उद्योग निदेशक के रविकुमार से जब इस बाबत पूछा गया तो उन्होंने कहा कि अंतिम रूप से कोई फैसला जपला सीमेंट फैक्टरी को लेकर नहीं हुअा है.
1992 से बंद है जपला सीमेंट फैक्टरी
जपला सीमेंट फैक्टरी की स्थापना वर्ष 1917 में मार्टिन बर्न कंपनी द्वारा की गयी थी. तब से लेकर 1984 तक इस कंपनी का प्रबंधन लगातार बदलता रहा.
आरंभ में यह कंपनी 1984 में बंद हुई थी. फिर बिहार सरकार के हस्तक्षेप के बाद 1990 में खुली. तब बिहार सरकार द्वारा कंपनी को पांच करोड़ रुपये की सहायता देने की बात कही गयी थी. सरकार द्वारा 2.5 करोड़ रुपये दिये गये. बाकी राशि नहीं दी गयी. इसी को आधार बनाते हुए प्रबंधन द्वारा इसे चलाने से इनकार कर दिया.
1992 से कंपनी बंद है. इस कंपनी में पांच हजार मजदूर कार्यरत थे. मजदूरों ने बकाये भुगतान को लेकर पटना हाइकोर्ट का रुख किया. वर्ष 2016 में पटना हाइकोर्ट के आदेश पर लिक्विडेटर नियुक्त किया गया. मजदूरों का बकाया लगभग 20 करोड़ रुपये है. लिक्वेडेटर द्वारा मजदूरों के बकाया भुगतान कराने के लिए मशीनों की नीलामी करायी गयी. उपेंद्र सिंह ने 12.56 करोड़ की बोली लगाकर इसे हासिल किया.
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