आदिवासियाें की पहचान सरना, मसना व अखड़ा से : मेघा

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 03 Jul 2018 5:07 AM

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रांची़ : झारखंड आदिवासी सरना विकास समिति, धुर्वा के अध्यक्ष मेघा उरांव ने कहा कि आदिवासियाें की पहचान सरना, मसना, अखड़ा, धुमकुड़िया, पाहन, पड़हा आदि से है, न कि गिरजाघर, पादरी, पास्टर, सिस्टर, फादर आदि से़ सरना- ईसाई को लड़ाने का काम ईसाइयों ने किया, जिसके उदाहरण नेम्हा बाइबल व अन्य किताबें है़ं आदिवासियों का […]

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रांची़ : झारखंड आदिवासी सरना विकास समिति, धुर्वा के अध्यक्ष मेघा उरांव ने कहा कि आदिवासियाें की पहचान सरना, मसना, अखड़ा, धुमकुड़िया, पाहन, पड़हा आदि से है, न कि गिरजाघर, पादरी, पास्टर, सिस्टर, फादर आदि से़ सरना- ईसाई को लड़ाने का काम ईसाइयों ने किया, जिसके उदाहरण नेम्हा बाइबल व अन्य किताबें है़ं

आदिवासियों का आदि धर्म हजारों वर्ष पुराना है़ ईसाई धर्म मानने वाले बतायें कि ईसाई धर्म भारत में कब आया? उन्होंने यह धर्म कब स्वीकार किया?

आरक्षण से वंचित करने पर पुनर्विचार करे सरकार : मंच
आग्रह
मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव को आदिवासी बुद्धिजीवी मंच ने ज्ञापन सौंपा
झारखंड के 32 आदिवासी समूहों को एसटी के रूप में अधिसूचित किया गया है
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