पलामू के मेदिनीनगर में खूब मनी दिवाली, कहीं लक्ष्मी तो कहीं काली पूजा की धूम

पलामू जिले के मेदिनीनगर में धूमधाम के साथ दिवाली मनाई गई. कोरोना काल के बाद पहली बार सभी घरों से बाहर निकल कर खूब मौज किये. दुकानों को सजाया गया तो घरों को भी रोशन किया गया. घर और दुकानों को सजाने में लाइट्स के साथ पारंपरिक मिट्टी के दिए भी जलाए गए.
सैकत चटर्जी, पलामू
Palamu News: पलामू जिले के मेदिनीनगर में धूमधाम के साथ दिवाली मनाई गई. कोरोना काल के बाद पहली बार सभी घरों से बाहर निकल कर खूब मौज किये. दुकानों को सजाया गया तो घरों को भी रोशन किया गया. घर और दुकानों को सजाने में लाइट्स के साथ पारंपरिक मिट्टी के दिए भी जलाए गए. दिवाली की शाम तक 200 रुपये प्रति 100 पीस के दर से मिट्टी के दीये बिके. पटाखों की दुकानों में देर रात तक खरीदारी होती रही.

लाइट लैंप की रही डिमांड
इस बार लाइट लैंप जिसे स्थानीय लोग फानूस कहते हैं, की काफी डिमांड रही. यह 40 से 80 रुपये प्रति पीस की दर से बिकी. मिठाई की दुकानों में भी देर शाम तक भीड़-भाड़ दिखी. मिष्ठान भंडार में दिवाली स्पेशल मिठाई 1300 रुपये प्रति किलो की दर से बिकी. शहर के आभूषण दुकानों को खास सजाया गया. पुलिस के जवान भी बाजार इलाके में चौकस रहे.

काली पूजा पर जुटे श्रद्धालू
दीपावली की उत्साह के साथ-साथ बंगीय दुर्गा बाड़ी व रेलवे क्लब में काली पूजा हुई. दिवाली के अवसर पर बंगीय दुर्गा बाड़ी, रेलवे क्लब समेत कई जगहों पर मां काली की पूजा अर्चना हुई. रेड़मा व छह महान काली मंदिर में विशेष पूजा अर्चना किया गया. बंगीय दुर्गा बड़ी में पुरोहित देवी प्रसाद बनर्जी ने पूजा कराया. इस अवसर पर मां काली की प्रतिमा को चांदी के गहनों से सजाया गया.

सड़क पर ही दिवाली मनाती देवगन व उसकी टोली
उत्तरप्रदेश के सोनभद्र जिले के खैराही गाओं के देवगन व उसके टोली के लगभग 50 महिला-पुरुष सड़क पर ही दिवाली मनाई. देवगन ने बताया की उनका गांव पहाड़ी पर बसा हुआ है, न तो खेती होती है न ही कमाने का कोई अन्य साधन है. भीख मांगना ही उनका मुख्य पेशा है. पिछले कई दिनों से देवगन की टोली मेदिनीनगर के स्टेशन रोड के सड़क किनारे डेरा डाले हुए है. सुबह से शाम तक भीख मांगना और रात को सड़क पर सोना ऐसी ही बीती उनकी इस बार की दिवाली. हां, यह जरूर हुआ की दिवाली के मौके पर इसे यादगार बनाने के लिए इसी टोली के सरजू ने डफली निकाल कर बजाये और कई ने गीत गाये तो कई ने सड़क पर ही नाच कर दिवाली मनाई.

जब नहीं बिका कमल का कमल
दिवाली के दिन पूजा के लिए कमल के फूल की खूब डिमांड रहती है. लोग दो चार घंटे के लिए कमल के फूल की दुकान लगाते हैं. 10 साल का कमल कुमार भी इसी उम्मीद में बेलवाटिका चौक पर कमल फूल बेचने बैठा था. पर सुबह से रात तक उसका कमल नहीं बिका. कमल नहीं बिकने से मायूस कमल देर रात तक सड़क किनारे बैठा रहा. बहुत पूछने पर भी वो अपने पिता का नाम और घर का पता नहीं बताया.
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लेखक के बारे में
By Rahul Kumar
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