झारखंड में पहला, देश में तीसरे स्थान पर मोहम्मदगंज, एक ही पहाड़ में बनी हैं तीन रेल सुरंगें

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मोहम्मदगंज: एक ही पहाड़ में तीन रेल सुरंग | Prabhat Khabar Network

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मोहम्मदगंज की तीन रेल सुरंगें झारखंड की पहचान बन गई हैं. एक ही पहाड़ को काटकर बनाई गई ये इंजीनियरिंग का अद्भुत नमूना हैं. जानें क्यों इन्हें देश की प्रमुख सुरंगों में गिना जाता है.

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मोहम्मदगंज से कुंदन कुमार की रिपोर्ट

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मोहम्मदगंज. झारखंड की सीमा में रेल मार्ग के प्रवेश द्वार के रूप में मोहम्मदगंज की तीन रेल सुरंगें अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं. पूर्व मध्य रेलवे के सोन नगर से मेदिनीनगर होते हुए रांची जाने वाले रेल मार्ग पर ये सुरंगें तकनीकी कमाल और शानदार इंजीनियरिंग का नमूना हैं. एक ही पहाड़ को चीरकर, एक ही स्थान पर तीन रेल सुरंगों का निर्माण अपने आप में अनोखा नज़ारा पेश करता है.

एक ही पहाड़ में तीन सुरंगों का निर्माण

मोहम्मदगंज वन क्षेत्र के बोगदा पहाड़ में इन तीनों सुरंगों का निर्माण अलग-अलग समय में, कुछ वर्षों के अंतराल पर किया गया. हाल में तीसरी रेल पटरी को पार कराने के लिए बनायी गयी सुरंग के द्वार पर झारखंड की विरासत और प्राकृतिक पहचान को दर्शाने वाली चित्रकारी भी की गयी है. पत्थरों पर बाघ, हिरण और स्थानीय लोककला की आकृतियां उकेरी गयी हैं, जो इस जगह के आकर्षण को और बढ़ाती हैं.

तीनों सुरंगें एक-दूसरे के समानांतर

तीनों रेल सुरंगें एक ही पहाड़ में एक-दूसरे के समानांतर बनी दिखाई देती हैं. पहाड़ से सटा भीम चूल्हा और भीम बराज भी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है. यहां आने वाले सैलानियों के लिए सुरंगों का यह समूह रोमांच और खूबसूरती का अनोखा मेल पेश करता है.

सुरंगों के साथ पहाड़ और कोयल नदी का नज़ारा

सुरंगों के अंदर पैदल जाना थोड़ा जोखिम भरा हो सकता है. इसलिए, पर्यटक पहाड़ की सुरक्षित ऊंचाई तक चढ़कर सुरंगों, रेल लाइन, आसपास की पहाड़ियों और कोयल नदी की मनमोहक प्राकृतिक छटा का आनंद लेते हैं. एक साथ तीनों सुरंगों को देखना और ट्रेन में बैठकर इन सुरंगों को पार करना यात्रियों के लिए कुछ पल का रोमांचक अनुभव बन जाता है.

ट्रेन के सुरंग से निकलते ही बदल जाता है नज़ारा

सुरंग से ट्रेन के बाहर निकलते ही दृश्य और भी मनोरम हो जाता है. एक ओर ऊंची पहाड़ी और दूसरी ओर कोयल नदी की बहती जलधारा प्रकृति की सुंदरता का अनोखा एहसास कराती है. सुरंग से निकलते ही अचानक सामने दिखने वाला कोयल नदी का नज़ारा देखकर यात्री अक्सर वाह-वाह कर उठते हैं. पहाड़ की ऊंचाई से सुरंग से सरपट निकलती ट्रेन को देखना भी अपने आप में एक अलग अनुभव है.

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90 से 100 मीटर के बीच है सुरंगों की लंबाई

रेल कर्मियों के अनुसार, तीनों सुरंगों की लंबाई करीब 90 से 100 मीटर के बीच है और ये सुरंगें घुमावदार हैं. तकनीकी कमाल, प्राकृतिक सौंदर्य और रेल यात्रा के रोमांच का यह मेल मोहम्मदगंज की तीनों सुरंगों को झारखंड के इस इलाके का खास आकर्षण बनाता है.

तकनीकी कमाल और प्राकृतिक सौंदर्य के इस अनोखे मेल के कारण, मोहम्मदगंज की सुरंगें देश की कुछ प्रमुख रेल सुरंगों में गिनी जाती हैं.

देश में तीन प्रमुख रेल सुरंग वाले खंड

पहला स्थान: मध्य प्रदेश का छिंदवाड़ा-नागपुर सेक्शन

दूसरा स्थान: महाराष्ट्र में कोंकण रेलवे का खंडाला घाट-करबूड़े

तीसरा स्थान: झारखंड का मोहम्मदगंज (बोगदा पहाड़)

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