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PHOTOS: पलामू में कोयल नदी के तट पर छठव्रतियों ने ऐसे दिया भगवान सूर्य को अर्घ्य

Updated at : 18 Nov 2023 6:54 PM (IST)
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पलामू के मेदिनीनगर में धूमधाम से छठ पूजा की शुरुआत हुई. शनिवार को खीर प्रसाद के पहले छठ व्रती नहाने के लिए कोयल नदी तट पर पहुंचीं. भगवान भास्कर को नमन किया. कोयल रिवर फ्रंट पर काफी भीड़ रही. रिवर फ्रंट बनने के बाद पहली बार छठ है. देखें यहां की आकर्षक तस्वीरें.

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Chhath Mahaparv|Chhath Puja|पलामू में बहने वाली कोयल नदी को गंगा के समान पवित्र माना जाता है. नदी में इस बार छठ के दौरान पानी बहुत ज्यादा नहीं है. इसलिए छठ करने वाले व्रती आराम से कुछ दूर तक जाकर समूह में पूजा-अर्चना कर रहे हैं. इस दौरान छठ करने वाले लोगों के घर के लोग भी यहां भारी संख्या में पहुंचे.

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कोयल नदी में नहाने के बाद छठ व्रतियों ने तट पर आकर पूजा की और भगवान भास्कर को नमन किया. कोयल नदी में सीढ़ी बन जाने की वजह से लोगों को ऊपर आकर पूजा करने में काफी सहूलियत हो रही है.

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ऐसे छठव्रती, जो पहले आ गए थे, वे काफी देर तक पानी में खड़े रहे और सूर्य के डूबने का इंतजार किया. जब सूर्यास्त होने लगा, तब उन्होंने पूजा संपन्न किया और उसके बाद अपने-अपने घरों को लौटे.

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सूर्य देव की आराधना के महापर्व छठ का व्रत रखने वाली महिलाओं ने एक-दूसरे को सिंदूर लगाया. सिंदूर लगाने में वैसी महिलाएं भी शामिल हुईं, जिन्होंने छठ का व्रत नहीं रखा है.

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आमतौर पर पर्व में लाल वस्त्र की महत्ता होती है. लेकिन, छठ पर्व में पीला वस्त्र पहनकर भी लोग पूजा करते हैं. ऐसी ही कुछ महिलाएं पलामू के कोयल नदी के तट पर पहुंचीं थीं, जिन्होंने पीले रंग की साड़ी में सूर्य देवता की पूजा की.

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पलामू प्रमंडल के मुख्यालय मेदिनीपुर में कोयल नदी के तट पर भगवान सूर्य देव को हर साल जल अर्पण करने के लिए छठ व्रतियों की भीड़ उमड़ती है. इस बार भी लोग आ रहे हैं, लेकिन छठ घाट की व्यवस्था सुधर जाने की वजह से बहुत ज्यादा भीड़ नहीं हो रही.

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खरना के दिन नहाने के बाद कुछ महिलाओं ने तट पर ही पूजा-अर्चना की. कुछ ऐसे भी लोग थे, जो अलग वेश-भूषा में आए थे. वह कोयल के तट पर आकर्षण का केंद्र बने हुए थे.

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छठ व्रतियों ने पूरी श्रद्धा के साथ कोयल के तट पर पूजा-अर्चना की और जब सूर्यास्त होने लगा, तब अस्ताचलगामी भगवान भास्कर को पूरी श्रद्धा के साथ अर्घ्य दिया. रविवार को एक बार फिर शाम को लोग कोयल के तट अर्घ्य देने के लिए उमड़ेंगे.

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झारखंड में 19 और 20 नवंबर छठ महापर्व मनाया जा रहा है. 17 नवंबर को नहाय-खाय के साथ इस महापर्व की शुरुआत हुई. 18 नवंबर को खरना के साथ 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू हो जाएगा. 19 नवंबर शाम में सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा और 20 नवंबर को सुबह के अर्घ्य के साथ छठ महापर्व का समापन होगा.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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