हिंदी दिवस पर आयोजित विचार गोष्ठी: आयुक्त कुमुद सहाय ने कहा,भारतीय समाज और संस्कृति का अहम हिस्सा है हिंदी भाषा
प्रमंडलीय आयुक्त कक्ष में हिंदी पखवाड़ा दिवस पर मौजूद अतिथि व अन्य | Prabhat Khabar Network
मेदिनीनगर में हिंदी पखवाड़ा दिवस समारोह का आयोजन किया गया. इस अवसर पर आयोजित विचार गोष्ठी में अधिकारियों ने राजभाषा के रूप में हिंदी के महत्व और उपयोगिता पर विस्तार से चर्चा की. जानिए क्या हुई मुख्य बातें.
मेदिनीनगर : बुधवार को पलामू प्रमंडलीय आयुक्त कार्यालय में हिंदी पखवाड़ा दिवस समारोह का आयोजन हुआ. इस अवसर पर आयोजित विचार गोष्ठी में अधिकारियों व पदाधिकारियों ने हिंदी भाषा के महत्व, उसकी उपयोगिता और राजभाषा के रूप में हिंदी के व्यापक प्रयोग के बारे में विचार व्यक्त किये. वक्ताओं ने कार्यालय के कार्यों में हिंदी भाषा का सर्वाधिक प्रयोग करने और सरकारी कार्यों में प्रभावी तरीके से हिंदी भाषा के उपयोग पर बल दिया.
मौके पर प्रमंडलीय आयुक्त कुमुद सहाय ने कहा कि हिंदी भाषा भारतीय समाज और संस्कृति का अहम हिस्सा है. हिंदी की समृद्ध परंपरा और व्याप्क शब्द संपदा इसे प्रभावशाली भाषा बनाती है. आधुनिकता के दौर में हिंदी भाषा की अहमियत कम नही होगी. आज भी हिंदी भाषा प्रासंगिक है.विश्व के विभिन्न देशों में रहने वाले हिंदीभाषी लोग इसका प्रयोग करते है. इस तरह हिंदी भाषा विश्व में अपनी पहचान बना चुकी है. उन्होंने कहा कि अन्य भाषाओं की तुलना में हिंदी भाषा सहज व सरल है. लोगों को दैनिक जीवन में इस भाषा का अधिकाधिक प्रयोग करना चाहिए. भाषाओं के परस्पर समन्वय से हिंदी के साथ-सा्थ स्थानीय भाषा का भी विकास होगा.
लोगों को हिंदी भाषा सीखना अनिवार्य है. हिंदी के साथ-साथ स्थानीय भाषाओं को भी समृद्ध करने का प्रयास किया जाना चाहिए. हिंदी भाषा का अधिक प्रयोग करने से ही यह समृद्ध होगा. डीपीआरओ डा असीम कुमार ने कहा कि हिंदी हमारी भाषा, संस्कृति और विरासत से जुड़ी है. जबकि अन्य भाषाएं वर्तमान समय में वैश्विक स्तर पर संवाद एवं ज्ञान विज्ञान का महत्वपूर्ण माध्यम है. ऐसी स्थिति में हिंदी भाषा के लिए सार्थक प्रयास किया जाना चाहिए.
जीएलए कालेज के प्रभारी प्राचार्य डा ऋचा सिंह ने हिंदी भाषा की महता और उसकी गरिमा पर विस्तार से प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि हिंदी भाषा का अधिक प्रयोग करने से ही वह समृद्ध होगी. वर्तमान समय में कामकाज के लिए अंग्रेजी भाषा का प्रयोग करने की प्रवृति बढ़ रही है. इस कारण हिंदी भाषा का प्रयोग कम हो गया है. ऐसी स्थिति में हम सभी हिंदी भाषियों का यह दायित्व है कि कामकाज के साथ-साथ बोलचाल के लिए हिंदी भाषा का प्रयोग करें.
हिंदी हमारी भाषा,संस्कृति एवं पहचान भी है. बदलते परिवेश में हिंदी को तकनीक शिक्षा व रोजगार से जोड़कर उसे अधिक समृद्ध बनाया जा सकता है. हिंदी विभागाध्यक्ष डा विभा शंकर ने कहा कि दूसरी भाषाओं का हमें सम्मान करना चाहिए.परिवेश के मुताबिक सहूलियतके अनुसार हिंदी व अंग्रेजी भाषा में कामकाज किया जा सकता है. लेकिन अपनी संस्कृति व सभ्यता की पहचान बनी हिंदी भाषा का त्याग करना उचित नही है.हिंदी भाषा को समृद्ध बनाने के लिए यह आवश्यक है कि हम सभी दृढ़ संकल्पित होकर सार्थक प्रयास करें.
हिंदी भाषा में जो मिठास व अपनापन का भाव छिपा है वह किसी अन्य भाषा में नही मिलेगा. श्री सदगुरु हरि प्रताप प्लस टू विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक वृजकिशोर तिवारी ने हिंदी भाषा के बारे में विस्तार से बताया. उन्होंने कहा कि हिंदी भाषा की जड़े संस्कृत से जुड़ी है और इसकी समृद्ध परंपरा रही है.हिंदी के प्रति भारतीयों के अलावा विदेशियों को भी गहरा लगाव है.
वरिष्ठ पत्रकार सतीश सुमन ने हिंदी भाषा को सशक्त बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास करने की जरूरत बताया. कहा कि हिंदी केवल संवाद का माध्यम नही, बल्कि हमारी संस्कृति व परंपरा से जुड़ी है. मौके पर आयुक्त के सचिव रोहित सिन्हा, एसओ राजेश गुप्ता, अरविंद पासवान, वरिष्ठ पत्रकार चंद्रशेखर सिंह, राजेश साहू सहित कई गणमान्य लोग मौजूद थे.
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