जंगल के बीच आस्था का केंद्र है बाबा वीर कुंवर चेगौना धाम, राहगीरों का भी झुक जाता है शीश
बाबा वीर कुंवर चेगौना धाम| Prabhat Khabar Network
छतरपुर के चेगौना धाम में स्थित बाबा वीर कुंवर का मंदिर आस्था और प्रकृति का अद्भुत संगम है. यह स्थल स्थानीय लोगों और दूर-दराज के श्रद्धालुओं के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक केंद्र बना हुआ है. पशुपालकों के संरक्षक माने जाने वाले बाबा वीर कुंवर के दर्शन के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं. जंगल की हरियाली के बीच स्थित यह धाम श्रद्धालुओं को शांति और सुकून प्रदान करता है.
निखिल सिन्हा की रिपोर्ट
छतरपुर (पलामू): एनएच-139 के किनारे जंगल के बीच स्थित बाबा वीर कुंवर चेगौना धाम आस्था और श्रद्धा का ऐसा केंद्र है, जहां से गुजरने वाले राहगीरों का शीश अनायास ही झुक जाता है. लंबे समय से यह स्थल स्थानीय लोगों के साथ-साथ झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ के श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है. बाबा वीर कुंवर के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों से भी श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं.
पशुपालकों के संरक्षक माने जाते हैं बाबा वीर कुंवर
स्थानीय मान्यता के अनुसार बाबा वीर कुंवर को पशुपालकों का संरक्षक और योद्धा देवता माना जाता है. पुराने समय में पशु लोगों की जीविका और जीवन का महत्वपूर्ण आधार हुआ करते थे. ऐसे में पशुपालक समुदाय के बीच बाबा वीर कुंवर के प्रति विशेष श्रद्धा विकसित हुई, जो आज भी पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही है. श्रद्धालु बाबा से सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं.
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राहगीरों की आस्था ने बढ़ाई धाम की पहचान
एनएच-139 के किनारे मंदिर स्थित होने के कारण समय के साथ चेगौना धाम की पहचान दूर-दूर तक फैलती गई. मार्ग से गुजरने वाले लोग मंदिर के सामने रुककर बाबा वीर कुंवर को नमन करते हैं और मन्नत मांगते हैं. मान्यता है कि मनोकामना पूरी होने पर श्रद्धालु दोबारा धाम पहुंचकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं. यही लोक आस्था धीरे-धीरे इस स्थल को प्रमुख धार्मिक केंद्र के रूप में पहचान दिलाती गई.
जंगल की हरियाली में धार्मिक आस्था का अनूठा संगम
चेगौना धाम की खासियत केवल इसकी धार्मिक मान्यता तक सीमित नहीं है. जंगल के बीच स्थित मंदिर और चारों ओर फैली हरियाली यहां पहुंचने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करती है. बाबा के दर्शन और पूजा-अर्चना के बाद लोग कुछ समय प्राकृतिक वातावरण में बिताना पसंद करते हैं. धार्मिक आस्था और प्रकृति का यह संगम चेगौना धाम को एक अलग पहचान देता है.
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1970 के दशक में रखी गई मंदिर की नींव
स्थानीय लोगों के अनुसार बाबा वीर कुंवर की प्रतिमा मंदिर निर्माण से पहले से ही यहां स्थापित थी. बताया जाता है कि वर्ष 1970 के दशक में मंदिर निर्माण की नींव रखी गई. हालांकि बाबा की पूजा इससे काफी पहले से होती आ रही थी. वर्षों से चली आ रही परंपरा और लोक मान्यताओं ने इस स्थल को लोगों की आस्था से गहराई से जोड़ दिया है. आज छतरपुर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए यह धार्मिक स्थल होने के साथ सामाजिक मेल-जोल का भी प्रमुख केंद्र बन चुका है.
सावन में कांवरियों के लिए होती है विशेष व्यवस्था
श्रावण मास में चेगौना धाम की रौनक और बढ़ जाती है. बाबा नगरी जाने वाले कांवरियों और श्रद्धालुओं के लिए पूरे माह विशेष व्यवस्था की जाती है. उनके ठहरने की व्यवस्था के साथ निःशुल्क भंडारे का आयोजन भी किया जाता है. धाम परिसर में वर्षभर धार्मिक अनुष्ठान होते हैं. इसके अलावा प्रत्येक वर्ष यहां सैकड़ों विवाह भी संपन्न कराए जाते हैं.
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पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होने की उम्मीद
स्थानीय लोगों का कहना है कि चेगौना धाम की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित करते हुए इसे राज्य स्तरीय पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाना चाहिए. धाम में पेयजल, प्रकाश, स्वच्छता, बैठने के लिए शेड सहित अन्य बुनियादी सुविधाओं का विस्तार होने से श्रद्धालुओं को काफी सहूलियत मिलेगी. लोगों का मानना है कि पर्यटन की दृष्टि से चेगौना धाम को विकसित किये जाने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे. क्षेत्रवासियों को उम्मीद है कि प्रशासन और सरकार इस प्राचीन आस्था स्थल के विकास की दिशा में ठोस पहल करेगी.
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