पाकुड़ में दो और कोल ब्लॉक का रास्ता साफ, लिट्टीपाड़ा के मार्गो ईस्ट और मार्गों वेस्ट से निकलेगा कोयला
कोयला खनन का प्रतीकात्मक फोटो | Prabhat Khabar Network
पाकुड़ जिले के लिट्टीपाड़ा प्रखंड में स्थित मार्गो ईस्ट और मार्गो वेस्ट कोल ब्लॉक अब झारखंड एक्सप्लोरेशन एंड माइनिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड (जेइएमसीएल) के हाथों में हैं. इन ब्लॉकों में 865 मिलियन टन कोयला भंडार है, जिससे क्षेत्र में रोजगार और आर्थिक विकास की उम्मीद जगी है.
पाकुड़ : पाकुड़ जिले के लिट्टीपाड़ा प्रखंड में स्थित मार्गो ईस्ट और मार्गो वेस्ट कोल ब्लॉक अब झारखंड सरकार की कंपनी झारखंड एक्सप्लोरेशन एंड माइनिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड (जेइएमसीएल) ने हासिल किया हैं. 17 सितंबर को नयी दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में कोयला मंत्रालय की ओर से संबंधित दस्तावेज और आगे की प्रक्रिया से जुड़े महत्वपूर्ण औपचारिक कार्यक्रम होंगे. जिसमें जेइएमसीएल के प्रबंध निदेशक वरुण रंजन भी शामिल होंगे और एमओयू पर हस्ताक्षर होगा.
मिली जानकारी के अनुसार दोनों कोल ब्लॉकों में करीब 865 मिलियन टन भू-वैज्ञानिक कोयला भंडार है. इन दोनों खदानों के विकसित होने से पाकुड़ के कोयला क्षेत्र में आने वाले वर्षों में खनन गतिविधियों के साथ रोजगार और आर्थिक गतिविधियों के विस्तार की संभावना है.

दोनों कोल ब्लॉक में 865 मिलियन टन कोयला
कोयला मंत्रालय के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार मार्गो ईस्ट में 450 मिलियन टन और मार्गो वेस्ट में 415 मिलियन टन भू-वैज्ञानिक कोयला संसाधन है. दोनों कोल ब्लॉक राजमहल कोलफील्ड क्षेत्र में स्थित हैं. मंत्रालय की ओर से अगस्त में आयोजित वाणिज्यिक कोयला खदानों की नीलामी में जेइएमसीएल ने दोनों ब्लॉक हासिल किए. मार्गो ईस्ट के लिए जेइएमसीएल की अंतिम बोली 10.25 प्रतिशत और मार्गो वेस्ट के लिए 6.50 प्रतिशत राजस्व हिस्सेदारी रही.

दोनों खदानों से सालाना करीब सात मिलियन टन उत्पादन की क्षमता
मार्गो ईस्ट कोल ब्लॉक का खनन पट्टा क्षेत्र 554.8 हेक्टेयर है. यहां करीब 450 मिलियन टन कोयला भंडार और 3.6 मिलियन टन प्रतिवर्ष की पीक रेटेड उत्पादन क्षमता बतायी गयी है. वहीं मार्गो वेस्ट 507.9 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला है. इसमें 415 मिलियन टन कोयला भंडार और 3.32 मिलियन टन प्रतिवर्ष की पीक रेटेड उत्पादन क्षमता है. इस तरह दोनों ब्लॉकों की प्रस्तावित उत्पादन क्षमता करीब 6.92 मिलियन टन प्रतिवर्ष होगी. दोनों ब्लॉकों में जी-10 ग्रेड का कोयला उपलब्ध है.
ओपन-कास्ट खनन पद्धति से होगा कोल खनन
तकनीकी आकलन के अनुसार दोनों कोल ब्लॉकों में ओपन-कास्ट खनन पद्धति अपनाये जाने की संभावना है. खनन शुरू होने के बाद कोयले के उत्पादन के साथ परिवहन, मशीनरी, निर्माण, रखरखाव और अन्य सहायक गतिविधियों में भी स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं.
17 सितंबर को दिल्ली में होगा कार्यक्रम
मार्गो ईस्ट और मार्गो वेस्ट के जेइएमसीएल के पक्ष में जाने के बाद अब परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया पर फोकस है. 17 सितंबर को नयी दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में कोयला मंत्रालय की ओर से संबंधित दस्तावेज और आगे की प्रक्रिया से जुड़े महत्वपूर्ण औपचारिक कार्यक्रम होंगे. वाणिज्यिक कोयला खदानों की नीलामी व्यवस्था के तहत सफल बोलीदाता को आगे कोयला खदान विकास एवं उत्पादन करार (सीएमडीपीए) समेत निर्धारित वैधानिक प्रक्रियाएं पूरी करनी होती हैं. इसके बाद खनन परियोजना के विकास, भूमि, पर्यावरणीय स्वीकृति, आधारभूत संरचना और अन्य आवश्यक प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाया जाता है.
रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिल सकता है लाभ
दोनों कोल ब्लॉक के विकसित होने से लिट्टीपाड़ा और आसपास के क्षेत्रों में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है. खनन परियोजनाओं के साथ परिवहन, मशीनरी संचालन, मरम्मत, आपूर्ति, खान से जुड़े सेवा क्षेत्र और स्थानीय कारोबार में भी गतिविधियां बढ़ सकती हैं. जेइएमसीएल के अनुसार नये कोल ब्लॉक राज्य में कोयला उत्पादन बढ़ाने के साथ राजस्व और रोजगार के अवसरों को मजबूत करने में सहायक होंगे. हालांकि वास्तविक रोजगार और उत्पादन का स्तर परियोजनाओं के विकास, स्वीकृत खनन योजना और परिचालन शुरू होने के बाद ही स्पष्ट होगा.
जवाड़दाहा नॉर्थ से जेइएमसीएल का बढ़ा दायरा
जेइएमसीएल के पास पहले से ही जवाड़दाहा नॉर्थ कोल ब्लॉक भी है. इस ब्लॉक को कंपनी ने 2025 में वाणिज्यिक कोयला खदान नीलामी के 11वें दौर में हासिल किया था. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार जवाड़दाहा नॉर्थ में 510 मिलियन टन भू-वैज्ञानिक कोयला भंडार है. जेइएमसीएल ने इसके लिए 10 प्रतिशत राजस्व हिस्सेदारी की अंतिम बोली लगायी थी.
जवाड़दाहा नॉर्थ का क्षेत्र पाकुड़, गोड्डा और साहिबगंज जिलों तक फैला है. इसमें लिट्टीपाड़ा, सुंदरपहाड़ी और बरहेट क्षेत्र शामिल हैं. इस तरह मार्गो ईस्ट, मार्गो वेस्ट और जवाड़दाहा नॉर्थ को मिलाकर जेइएमसीएल के पास इन परियोजनाओं में 1.375 अरब टन यानी 1375 मिलियन टन से अधिक भू-वैज्ञानिक कोयला संसाधन हो जाता है. यह आंकड़ा तीनों ब्लॉकों के आधिकारिक उपलब्ध भंडार को जोड़ने पर निकलता है.
पाकुड़ के लिए बड़ा बदलाव
पाकुड़ पहले से ही कोयला खनन और परिवहन गतिविधियों का प्रमुख केंद्र है. नये कोल ब्लॉकों के विकास से जिले के लिट्टीपाड़ा क्षेत्र में खनन आधारित आर्थिक गतिविधियों का दायरा बढ़ सकता है. हालांकि इसके साथ भूमि, पर्यावरण, पुनर्वास, परिवहन और स्थानीय लोगों की आजीविका से जुड़े मुद्दों पर भी निर्धारित नियमों के तहत ध्यान देना होगा.
राज्य में खनन गतिविधियों को मिलेगी नयी गति : वरुण रंजन
जेइएमसीएल के एमडी वरुण रंजन ने कहा कि मार्गो ईस्ट और मार्गो वेस्ट कोल ब्लॉक का जेइएमसीएल को मिलना झारखंड के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है. इन दोनों ब्लॉकों में उपलब्ध बड़े कोयला भंडार का वैज्ञानिक और निर्धारित मानकों के अनुरूप उपयोग राज्य में कोयला उत्पादन को नयी गति देगा. परियोजनाओं के विकसित होने से पाकुड़ जिले में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर बढ़ेंगे तथा स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी. उन्होंने कहा कि जेइएमसीएल आवश्यक वैधानिक प्रक्रियाओं को पूरा करते हुए खनन परियोजनाओं को आगे बढ़ायेगा. स्थानीय समुदायों के हितों और पर्यावरणीय मानकों का ध्यान रखते हुए परियोजनाओं को विकसित करने पर कंपनी का जोर रहेगा.
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