शिकायत के बाद भी जांच से बाहर सड़क! बाबूलाल ने DC को लिखा पत्र

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नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने पाकुड़ में सड़क व गार्डवाल निर्माण में अनियमितता पर जताई चिंता. उपायुक्त को लिखा पत्र, जांच की मांग.

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नगर प्रतिनिधि, पाकुड़. झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने इलामी-बागानपाड़ा पीसीसी सड़क और गार्डवाल निर्माण में कथित अनियमितता की जांच की मांग की है.इस संबंध में उन्होंने पाकुड़ उपायुक्त को पत्र लिखकर ग्रामीणों की शिकायत के बावजूद योजना को जांच सूची से बाहर रखने के मामले की भी जांच कराने की मांग की है.

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मरांडी ने कहा है कि इलामी पंचायत में डीएमएफटी मद से निर्मित सड़क और सत्तार मौलवी के घर के पास बने गार्डवाल की गुणवत्ता को लेकर ग्रामीणों ने शिकायत की थी. शिकायत के बाद भी योजना को जांच के दायरे में नहीं लाया जाना गंभीर मामला है.उन्होंने तत्काल दोनों योजनाओं को जांच सूची में शामिल करने की मांग की है.

शिकायत के बाद बनी जांच टीम, सूची से योजना गायब

बाबूलाल मरांडी ने पत्र में बताया कि उन्होंने इस मामले में 16 अगस्त को मुख्यमंत्री को भी पत्र भेजकर जांच की मांग की थी.इसके बाद 18 अगस्त को विभिन्न योजनाओं की स्थल जांच के लिए जांच दल गठित किया गया. हालांकि, जांच के लिए तैयार सूची में इलामी-बागानपाड़ा सड़क और गार्डवाल योजना को शामिल नहीं किया गया.

उन्होंने इसे संदेह पैदा करने वाला मामला बताते हुए कहा कि शिकायत के बावजूद योजना को जांच सूची से बाहर रखना अपने आप में जांच का विषय है.

सड़क की लंबाई से लेकर निर्माण सामग्री तक हो जांच

नेता प्रतिपक्ष ने सड़क और गार्डवाल की तकनीकी जांच कराने की मांग की है. उन्होंने सड़क की लंबाई, चौड़ाई और मोटाई के साथ निर्माण में इस्तेमाल सामग्री की गुणवत्ता की जांच पर जोर दिया है. इसके अलावा स्वीकृत प्राक्कलन, मापी-पुस्तिका, बिल-वाउचर और भुगतान से संबंधित अभिलेखों की भी जांच करने को कहा.

उन्होंने संबंधित अधिकारियों द्वारा योजना के सत्यापन की प्रक्रिया की भी जांच कराने की मांग की है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप हुआ है या नहीं.

जांच सूची से बाहर रखने वाले की भी हो पहचान

मरांडी ने योजना को जांच सूची से बाहर रखने में जिम्मेदार पदाधिकारी या कर्मी की भूमिका की अलग से जांच कराने की मांग की है. उन्होंने कहा कि यदि जांच में जानबूझकर जांच को प्रभावित करने या दोषियों को संरक्षण देने की पुष्टि होती है, तो संबंधित अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए.

उन्होंने उपायुक्त से पूरे मामले की निष्पक्ष और तकनीकी जांच कराकर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की.


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