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प्रकृति की गोद में बगडू पहाड़, लोहरदगा का उभरता पर्यटन स्थल बना आकर्षण का केंद्र

Updated at : 28 Dec 2025 8:56 PM (IST)
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प्रकृति की गोद में बगडू पहाड़, लोहरदगा का उभरता पर्यटन स्थल बना आकर्षण का केंद्र

प्रकृति की गोद में बगडू पहाड़, लोहरदगा का उभरता पर्यटन स्थल बना आकर्षण का केंद्र

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लोहरदगा़ प्रकृति की अनुपम खूबसूरती को करीब से देखना हो तो बगडू पहाड़ एक बेहतरीन स्थल बनकर उभरा है. हरियाली से ढकी पहाड़ियों की श्रृंखला, शांत वातावरण और मनोहारी दृश्य लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं. बगडू पहाड़ से लोहरदगा शहर का विहंगम नजारा साफ दिखाई देता है, जो यहां आने वालों को खास अनुभव देता है. पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता : हिंडाल्को प्रबंधन की ओर से किये गये सुनियोजित प्रयासों के कारण बगडू पहाड़ की प्राकृतिक सुंदरता और निखर कर सामने आयी है. पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए पहाड़ी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर पौधरोपण किया गया है. साथ ही आने-जाने के लिए सुव्यवस्थित रास्तों का निर्माण और साफ-सफाई की बेहतर व्यवस्था की गयी है. इन्हीं प्रयासों के चलते यह इलाका अब एक आकर्षक प्राकृतिक स्थल का रूप ले चुका है और दूर-दूर से लोग यहां की स्वच्छ व शांत आबोहवा का आनंद लेने पहुंच रहे हैं. पर्यटकों को आश्चर्यचकित करता है बगड़ू पहाड़ : बगडू पहाड़ में आदिवासी संस्कृति को सहेजती घुमकुड़िया, अंतरिक्ष के नजारों को दिखाने वाला ताराघर (डोम) और प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर बिरसा उपवन लोगों के लिए खास आकर्षण हैं. डोम के भीतर बैठकर ऐसा एहसास होता है मानो किसी आधुनिक विज्ञान केंद्र में हों. बिरसा उपवन में बड़ी संख्या में औषधीय पौधे और मसालों के पेड़ लगाये गये हैं, जिन्हें देखकर पर्यटक आश्चर्यचकित रह जाते हैं. यही कारण है कि झारखंड प्रशासनिक सेवा के प्रशिक्षु अधिकारियों को भी सरकार द्वारा यहां भ्रमण के लिए भेजा जाता है, ताकि वे पर्यावरण संरक्षण और प्रबंधन के इस मॉडल को समझ सकें. मछली पालन और बतख पालन : हिंडाल्को कंपनी ने बगड़ू पहाड़ पर बॉक्साइट खनन के बाद बने गड्ढों का उपयोग मछली पालन और बतख पालन के लिए किया है. इनमें भरा पानी जलस्तर को बनाये रखने में सहायक है. पहाड़ों से गिरने वाले दो झरने इस क्षेत्र की सुंदरता को और बढ़ाते हैं, जिनका पानी तालाबों में पहुंचता है. अपनी अलग पहचान बना रहा है बगड़ू पहाड़ :स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले यह क्षेत्र उपेक्षित था, लेकिन हिंडाल्को की पहल से बगड़ू पहाड़ अब अपनी अलग पहचान बना रहा है. यह स्थल हिंडाल्को परिसर में स्थित है, इसलिए यहां आने के लिए अनुमति आवश्यक है. गेट पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों को परिचय देने के बाद प्रवेश की अनुमति मिलती है. यहां घूमने आने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है, खासकर युवा वर्ग और प्रकृति प्रेमी यहां आकर सुकून महसूस कर रहे हैं. पर्यावरण संतुलन और प्राकृतिक सौंदर्य के संरक्षण की दिशा में किया गया यह प्रयास सराहनीय है. बगडू पहाड़ अब न केवल प्राकृतिक सुंदरता का प्रतीक बन रहा है, बल्कि लोहरदगा जिले के लिए एक नये पर्यटन स्थल के रूप में भी पहचान बना रहा है. लोहरदगा शहर से लगभग 15 किलोमीटर दूर है बगडू पहाड़ : बगडू पहाड़ में आजादी से पहले 1942-43 में इंडियन एल्युमिनियम कंपनी (इंडाल) द्वारा बॉक्साइट खनन की शुरुआत की गयी थी. यहां से रोपवे के माध्यम से बॉक्साइट लोहरदगा रेलवे स्टेशन भेजा जाता था और वहां से मालगाड़ी द्वारा मूरी फैक्ट्री पहुंचाया जाता था. यह व्यवस्था आज भी जारी है, हालांकि, अब इसका स्वामित्व हिंडाल्को के पास है. बगड़ू पहाड़ से लोगों की भावनाएं जुड़ी हैं. यह स्थल लोहरदगा शहर से लगभग 15 किलोमीटर दूर स्थित है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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SHAILESH AMBASHTHA

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By SHAILESH AMBASHTHA

SHAILESH AMBASHTHA is a contributor at Prabhat Khabar.

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