मतदाताओं में उत्साह की कमी जोड़-घटाव में लगे उम्मीदवार

लोहरदगा : लोहरदगा विधानसभा में इस बार कांटे की टक्कर नजर आ रही है. यहां मतदान का प्रतिशत काफी अच्छा नहीं रहा और लोगों ने कहा कि मतदाताओं में उत्साह इस बार देखने को नहीं मिला. जिस तरीके से राजनीति में बदलाव आया उससे मतदाताओं में भी निराशा देखी गयी. लोहरदगा विभानसभा क्षेत्र में कुल […]
लोहरदगा : लोहरदगा विधानसभा में इस बार कांटे की टक्कर नजर आ रही है. यहां मतदान का प्रतिशत काफी अच्छा नहीं रहा और लोगों ने कहा कि मतदाताओं में उत्साह इस बार देखने को नहीं मिला. जिस तरीके से राजनीति में बदलाव आया उससे मतदाताओं में भी निराशा देखी गयी. लोहरदगा विभानसभा क्षेत्र में कुल 11 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. भाजपा के सुखदेव भगत, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष डॉ रामेश्वर उरांव एवं आजसू के नीरू शांति भगत के बीच मुकाबला है.
सभी उम्मीदवार चुनाव के बाद अपनी जीत का दावा कर रहे हैं. मुकाबला रोचक के साथ-साथ कांटे का भी है. मतदाताओं की खामोशी उम्मीदवारों को परेशान कर रही है. चुनाव के बाद और चुनाव के पहले की स्थिति में अंतर देख कर नेताओं के भी होश उड़ गये. कहीं किसी के साथ गद्दारी हुई तो किसी के वोट बैंक में रातों-रात सेंधमारी हुई. कोई अपना सब कुछ लेकर पराया हो गया. तो कहीं सारी मेहनत बेकार चली गयी.
इसी जोड़-घटाव में उम्मीदवार लगे हैं लेकिन उनके आसपास व साथ-साथ रहनेवाले लोग जीत का दावा कर रहे हैं वो भी पूरे आंकड़े के साथ. भले ही वो आंकड़ा फर्जी ही क्यों न हो. कुछ समय के लिए तो उम्मीदवारों को सुकून मिल रहा है. मतदाताओं में उत्साह की कमी उम्मीदवारों को भी खल रही थी. वैसे तो विधानसभा का चुनाव इस बार बिना मुद्दों के लड़ा गया लेकिन अंदर ही अंदर कई मुद्दे ऐसे थे जो राजनीति को गर्म किये हुए थे.
किसी के लिए यह सीट कैरियर वाला था तो किसी के लिए प्रतिष्ठा वाली सीट थी. शाम, दाम, दंड, भेद सभी अपनाये गये. कौआ कान ले गया पर लोगों ने ज्यादा ध्यान दिया. यही कारण रहा कि यहां के मूल मुद्दे सामने नहीं आये. जनता नेताओं के बदले रूप को देख कर दंग थी. चर्चा का बाजार गर्म था और अभी भी जीत-हार की चर्चा लगातार हो रही है. लोहरदगा विधानसभा इस बार हॉट सीट बना हुआ है और सब की नजर यहां के चुनाव परिणाम पर है.
यही कारण है कि इस बार देश की राजधानी से लेकर राज्य की राजधानी तक से मिडिया कर्मी लोहरदगा में डेरा जमाये हुए थे. चुनाव तो गुजर गया. अब जीत-हार को लेकर दावे प्रति दावे किये जा रहे हैं. कोई सट्टेबाजी में व्यस्त है तो कोई बाजी लगाकर ही अपने दावे को पुख्ता कर रहा है.
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By Prabhat Khabar Digital Desk
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