पलामू टाइगर रिजर्व के पुराने गौरव को लौटाने की पहल, ‘वन प्रहरी दीदियों’ के साथ फील्ड डायरेक्टर की रणनीतिक बैठक

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फील्ड डायरेक्टर ने ''वन प्रहरी दीदियों'' के साथ की बैठक | Prabhat Khabar Network

पलामू टाइगर रिजर्व के संरक्षण के लिए वन विभाग ने महिला सशक्तिकरण की नई मिसाल पेश की है। अब वन प्रहरी दीदियां जंगलों और वन्यजीवों की सुरक्षा में निभाएंगी अहम भूमिका।

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संतोष कुमार की रिपोर्ट

बेतला नेशनल पार्क. पलामू टाइगर रिजर्व के गौरवशाली इतिहास को पुनर्जीवित करने, जैव विविधता को सुरक्षित रखने और वनों व वन्यजीवों के संरक्षण में स्थानीय समुदायों की भूमिका को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से बेतला में एक उच्च स्तरीय रणनीतिक बैठक का आयोजन किया गया. इस विशेष बैठक में मुख्य वन संरक्षक सह फील्ड डायरेक्टर एस आर नटेश ने क्षेत्र के विभिन्न संवेदनशील वन क्षेत्रों में सक्रिय रूप से कार्यरत ''वन प्रहरी दीदियों'' ( महिला वन रक्षकों) के साथ सीधा संवाद किया. बैठक के दौरान वनों के टिकाऊ प्रबंधन, मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने और बाघों के अनुकूल माहौल तैयार करने में महिलाओं की भागीदारी पर विस्तृत चर्चा की गयी

सहयोग के बिना अवैध गतिविधियों को रोकना कठिन

बैठक में फील्ड डायरेक्टर एस आर नटेश ने कहा कि पलामू टाइगर रिजर्व के पुराने व ऐतिहासिक गौरव को वापस लाने के लिए अब पारंपरिक तरीकों से हटकर सामूहिक जन-भागीदारी पर काम करने की सख्त आवश्यकता है. उन्होंने स्पष्ट किया कि सुदूरवर्ती और घने जंगलों की सुरक्षा केवल वन विभाग के गिने-चुने अधिकारियों या फील्ड स्टाफ के बल पर संभव नहीं है. जब तक स्थानीय ग्रामीणों का दिल से सहयोग नहीं मिलेगा, तब तक शिकार और वनों की कटाई जैसी अवैध गतिविधियों पर पूर्ण विराम लगाना कठिन है.

बाघ पर्यावरण चक्र का सबसे बड़ा और शीर्ष का जानवर

पारिस्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम) में बाघों के सर्वोच्च महत्व को रेखांकित करते हुए फील्ड डायरेक्टर ने कहा कि बाघ हमारे पर्यावरण चक्र का सबसे बड़ा और शीर्ष का जानवर है. यदि बाघ सुरक्षित है, तो हमारा जंगल और पानी का स्रोत भी सुरक्षित है. विभाग द्वारा पलामू टाइगर रिजर्व के मुख्य कोर क्षेत्रों और बफर जोन में बाघों के लिए एक पूरी तरह से अनुकूल, सुरक्षित और शिकार से भरपूर वातावरण तैयार करने का निरंतर प्रयास किया जा रहा है. इस महा-अभियान में स्थानीय महिलाओं की भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण कड़ी साबित होने वाली है, और विभाग को उनसे इस दिशा में भरपूर सहयोग की अपेक्षा है.

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महिलाओं का जंगलों से सीधा जुड़ाव

बैठक में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि वन्यजीवों और जंगलों को बचाने की जिम्मेदारी केवल पुरुषों तक सीमित नहीं रह सकती. ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं का जंगलों से सीधा जुड़ाव (ईंधन की लकड़ी और वनोपज संग्रह के कारण) होता है, इसलिए उनकी सक्रियता वन्यजीव अपराधों को रोकने में गेम-चेंजर साबित होगी.ये वन प्रहरी दीदियां न केवल जंगलों की भौतिक निगरानी (पेट्रोलिंग) में वन कर्मियों का सहयोग कर रही हैं, बल्कि वे वन विभाग और स्थानीय ग्रामीणों के बीच एक मजबूत कम्युनिटी एंबेसडर (संवाद सेतु) की भूमिका भी निभाएंगी. वे गांवों में जाकर वन्यजीवों के प्रति जागरूकता फैलाएंगी और शिकारियों या बाहरी संदिग्ध तत्वों की गतिविधियों की सूचना तुरंत वन विभाग को उपलब्ध कराएंगी.

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बेतला रेंज की 30 महिलाओं से शुरुआत

इस रणनीतिक अभियान के पहले चरण में बेतला रेंज की 30 स्थानीय महिलाओं को बतौर ''वन प्रहरी दीदी'' इंगेज किया गया है. इस पहल का मुख्य उद्देश्य वनों एवं वन्य प्राणियों की सुरक्षा को चाक-चौबंद करना और जंगलों में शिकार की घटनाओं पर पूर्ण विराम लगाना है. ये महिलाएं वन्यजीवों के अवैध व्यापार या किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर पैनी नजर रखेंगी. इसके साथ ही वन प्रहरी दीदियां ग्रामीण क्षेत्रों में एक मजबूत खुफिया सूचना तंत्र (इनफॉर्मेशन नेटवर्क) विकसित करेंगी. वे एक मानक सुरक्षा चिह्न बनकर वन विभाग के काम को जमीनी स्तर पर मजबूती प्रदान करेंगी.

लोग आगे आयेंगे तो बचेंगे जंगल

अगर लोग आगे नहीं आएंगे तो जंगल बचेगा नहीं.इसी सोच के साथ ये महिलाएं खुद आगे बढ़कर ग्रामीणों को जंगल और वन्यजीवों को बचाने के लिए प्रेरित (मोटिवेट) करेंगी. महिलाएं गांवों में एक मजबूत एकजुट संगठन तैयार करेंगी जो शिकारियों के खिलाफ सामाजिक प्रतिरोध खड़ा करेगा. महिलाओं की कुशल संगठन क्षमता को ध्यान में रखकर ही उन्हें यह बड़ी जिम्मेदारी दी गई है. वर्तमान में यह व्यवस्था बेतला रेंज में लागू की गयी है, जिसे आने वाले दिनों में पलामू टाइगर रिजर्व के अन्य सभी रेंजों में भी विस्तारित किया जायेगा.

जन-सहयोग और इको-टूरिज्म से बदलेगी रिजर्व की तस्वीर

फील्ड डायरेक्टर एस आर नटेश ने बैठक के दौरान उपस्थित महिला स्वयं सहायता समूहों और वन प्रहरी दीदियों को आश्वस्त किया कि विभाग न केवल उनके सहयोग की अपेक्षा रखता है, बल्कि उनकी आजीविका में सुधार के लिए भी पूरी तरह प्रतिबद्ध है. पलामू टाइगर रिजर्व के अंतर्गत आने वाले गांवों में महिलाओं को इको-टूरिज्म, स्थानीय हस्तशिल्प और गैर-लकड़ी वन उत्पाद के प्रसंस्करण से जोड़ा जा रहा है, ताकि वन संरक्षण के साथ-साथ उनका आर्थिक सशक्तिकरण भी हो सके. उन्होंने कहा कि जब स्थानीय लोग यह समझ जाएंगे कि जंगल और वन्यजीव उनके रोजगार का जरिया बन रहे हैं, तो वे खुद आगे बढ़कर इनकी रक्षा करेंगे.

पलामू टाइगर रिजर्व प्रबंधन की एक बड़ी उम्मीद

यह पूरी पहल जन-वन भागीदारी के तहत उठाया गया एक दूरदर्शी कदम है. अधिकारियों ने स्पष्ट संदेश दिया है कि जब तक समाज का हर जन मिलकर वन को बचाने की कोशिश नहीं करेगा, तब तक पूर्ण संरक्षण संभव नहीं है. वन प्रहरी दीदियां गांव और जंगल के बीच संतुलन का नया अध्याय लिखेंगी.


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विकाश नाथ

लेखक के बारे में

By विकाश नाथ

26 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्यरत हूं. रिपोर्टिंग के साथ डेस्क का काम करने भी अनुभव प्राप्त है. खेल डेस्क में भी काम करने का अनुभव है. रुरल के संस्करणों को देखता हूं.

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