झुमरी तिलैया जैन मंदिर में दसलक्षण महापर्व के दूसरे दिन मनाया उत्तम मार्दव धर्म, जैन संत सुयश सागर ने दिया विनम्रता का संदेश

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झुमरी तिलैया जैन मंदिर में दसलक्षण महापर्व उत्साह से मनाया गया. इस अवसर पर जैन संत सुयश सागर जी ने प्रवचन देते हुए अहंकार छोड़कर कोमलता व विनम्रता अपनाने का महत्व समझाया. धार्मिक शिविर में भी श्रद्धालुओं को धर्मशास्त्र की शिक्षा दी जा रही है.

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झुमरी तिलैया. जैन मंदिर में दसलक्षण महापर्व के दूसरे दिन श्रद्धालुओं ने उत्तम मार्दव धर्म भक्ति और श्रद्धा के साथ मनाया. इस अवसर पर जैन संत 108 सुयश सागर जी ने प्रवचन दिया. उन्होंने कहा कि फूलों की तरह मन के भावों में कोमलता होना ही मार्दव धर्म है. कोमलता हर जीव को पसंद होती है, इसलिए मनुष्य को मृदुभाषी और विनम्र होना चाहिए.

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मनुष्य अहंकार के कारण दुखी

उन्होंने कहा कि आज मनुष्य अहंकार के कारण दुखी है. यदि व्यक्ति अहंकार का त्याग कर दे तो उसका जीवन सरल हो सकता है. चित्त में मृदुता और व्यवहार में विनम्रता ही मार्दव धर्म है. यह मान कषाय के अभाव में प्रकट होता है. संत ने कहा कि जाति, कुल, रूप, ज्ञान, तप, वैभव, प्रभुत्व और संपत्ति का गुणगान कर इतराना अहंकार है. मान कषाय पर विजय प्राप्त करना ही उत्तम मार्दव धर्म कहलाता है.

ब्रह्म मुहूर्त से चल रहा धार्मिक शिविर

पर्यूषण महापर्व के तहत ब्रह्म मुहूर्त से ही जैन संत सुयश सागर जी के सानिध्य में धार्मिक शिविर का आयोजन किया जा रहा है. शिविर में महिला और पुरुष श्रद्धालुओं को योग, पूजा-विधि और धर्मशास्त्र की शिक्षा दी जा रही है. आयोजकों के अनुसार, यह शिविर श्रद्धालुओं के आत्मकल्याण में सहायक होगा. शिविर के संयोजक कुणाल ठोलिया और सिद्धांत सेठी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं. प्रातः बड़ा मंदिर में मूलनायक भगवान पारसनाथ के प्रथम अभिषेक एवं शांतिधारा का सौभाग्य विनोद, सुमित, विनीत लाला एवं गोलू सोगानी परिवार को मिला. श्रीजी का विहार कर पांडुकशिला पर विराजमान कराने और भगवान आदिनाथ का अभिषेक करने का सौभाग्य सुनील एवं सौरभ सेठी परिवार को प्राप्त हुआ. भगवान की दूसरी ओर से शांतिधारा राकेश आदित्य छाबड़ा परिवार ने की.

पंडाल परिसर में भगवान महावीर स्वामी के श्रीविहार एवं प्रथम अभिषेक का सौभाग्य रूपचंद, अनिल बढ़जात्या, मंजू देवी, विक्की कासलीवाल दुर्ग परिवार को मिला. भगवान महावीर स्वामी की शांतिधारा सुयश सागर, कौशल्या सागर और सोहम सागर जी ग्रुप परिवार की ओर से की गई.

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भगवान महावीर स्वामी की शांतिधारा करने का सौभाग्य

सौरभ काला के जन्मदिन के अवसर पर उनके पिता सुरेंद्र काला को भगवान महावीर स्वामी की शांतिधारा करने का सौभाग्य मिला. नया मंदिर में भगवान महावीर स्वामी की शांतिधारा सुरेश नरेंद्र झाझरी परिवार एवं मानिकचंद मनीष सेठी परिवार ने की. भगवान आदिनाथ की वेदी का सौभाग्य हृदय पाटनी और उनके सुपुत्र प्रवीण पाटनी परिवार को मिला.

संध्या में बिट्टू दीदी, दुर्ग छत्तीसगढ़ का प्रवचन हुआ. इसके बाद जैन युवक समिति, महिला समाज एवं बालिका समिति की ओर से भव्य आरती और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया. उक्त जानकारी जैन समाज के मीडिया प्रभारी नवीन जैन एवं राजकुमार अजमेरा ने दी.

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