कोडरमा में NIA की छापेमारी, 16 लाख नकद, जमीन से संबंधित 22 कागजात बरामद, दो गिरफ्तार
कोडरमा में रेड मारने के लिए पहुंची एनआईए अधिकारियों की खड़ी गाड़ी
झारखंड के कोडरमा जिले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने एक बड़ी दबिश दी है. नवलशाही थाना क्षेत्र में एक विस्फोटक मैगजीन हाउस और कारोबारी शंकर यादव के घर पर NIA ने छापा मारा है. सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई अवैध विस्फोटक सामग्री की आपूर्ति से जुड़ी है.
कोडरमा : पश्चिम बंगाल के बांकुडा जिले में 8 अक्टूबर 2024 को हुए विस्फोट मामले की जांच अब झारखंड तक पहुंच गई है. राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने गुरुवार को कोडरमा जिले में बड़े पैमाने पर छापेमारी कर विस्फोटक आपूर्ति नेटवर्क की जांच तेज कर दी. एनआईए की कोलकाता इकाई की अलग-अलग टीमों ने स्थानीय पुलिस के सहयोग से नवलशाही थाना क्षेत्र के नवादा मौजा स्थित मां दुर्गा इंटरप्राइजेज नामक मैगजीन हाउस समेत चार ठिकानों पर एक साथ कार्रवाई की. इस दौरान 16.07 लाख रुपये से अधिक नकद, जमीन से जुड़े 22 दस्तावेज और विस्फोटक कारोबार से संबंधित कई रिकॉर्ड जब्त किए गए. मामले में दो लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है.
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चार ठिकानों पर एक साथ चली कार्रवाई
जानकारी के अनुसार, एनआईए की टीम ने नवादा मौजा स्थित मां दुर्गा इंटरप्राइजेज मैगजीन हाउस, बदडीहा स्थित शंकर यादव के आवास, नावाडीह (डोमचांच) निवासी महेश मेहता के घर तथा एक अन्य स्थान पर एक साथ छापेमारी की. कार्रवाई बुधवार देर रात शुरू हुई और गुरुवार तक कई घंटों तक जारी रही. छापेमारी के दौरान एनआईए अधिकारियों ने दस्तावेजों, रजिस्टरों, डिजिटल रिकॉर्ड और विस्फोटक आपूर्ति से जुड़े कागजात की गहन जांच की. जांच एजेंसी ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज अपने कब्जे में लिए हैं, जिनका विश्लेषण किया जाएगा.
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16 लाख से अधिक नकदी और 22 दस्तावेज बरामद
एनआईए की कार्रवाई के दौरान बदडीहा निवासी शंकर यादव के घर से 16 लाख 7 हजार 600 रुपये नकद बरामद किए गए. इसके अलावा जमीन से संबंधित 22 अलग-अलग दस्तावेज भी जब्त किए गए हैं. जांच एजेंसी ने विस्फोटक कारोबार से संबंधित रिकॉर्ड बुक और अन्य अभिलेख भी अपने कब्जे में लिए हैं. शंकर यादव को नवादा मौजा में संचालित विस्फोटक केंद्र (मैगजीन हाउस) का संचालक बताया जा रहा है. प्रारंभिक जांच में कुछ अनियमितताएं मिलने के बाद एनआईए ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया.
दो आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ
एनआईए ने इस मामले में शंकर यादव के अलावा नावाडीह (डोमचांच) निवासी महेश मेहता को भी गिरफ्तार किया है. दोनों से कई घंटे तक पूछताछ की गई, जिसके बाद एनआईए की टीम उन्हें अपने साथ ले गई. अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ से विस्फोटक आपूर्ति नेटवर्क के कई महत्वपूर्ण पहलुओं का खुलासा हो सकता है.
बांकुडा विस्फोट से जुड़ी हैं जांच की कड़ियां
जानकारी के अनुसार, 8 अक्टूबर 2024 को पश्चिम बंगाल के बांकुडा जिले में मोटरसाइकिल से विस्फोटक पदार्थ ले जाने के दौरान अचानक विस्फोट हो गया था. इस घटना में दो लोगों की मौत हो गई थी. स्थानीय स्तर पर मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई थी, लेकिन बाद में जांच की गति धीमी पड़ गई. इसके बाद इस मामले की जांच एनआईए को सौंपी गई. जांच एजेंसी ने जब विस्फोटक की आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) की पड़ताल शुरू की, तो शुरुआती सुराग धनबाद तक पहुंचे. धनबाद में जांच के दौरान यह जानकारी सामने आई कि विस्फोटकों का अवैध कारोबार कोडरमा से संचालित होने की आशंका है. इसके बाद एनआईए ने धनबाद से आगे जांच बढ़ाते हुए कोडरमा में कार्रवाई की.
अवैध विस्फोटक नेटवर्क की होगी गहन जांच
एनआईए अब यह पता लगाने में जुटी है कि कोडरमा से विस्फोटकों की अवैध आपूर्ति का नेटवर्क कितना बड़ा है और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही है. जांच एजेंसी जब्त किए गए दस्तावेजों, लेन-देन के रिकॉर्ड, लाइसेंस संबंधी कागजात और अन्य अभिलेखों की जांच कर रही है. अधिकारियों का मानना है कि इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों और संभावित खरीदारों तक पहुंचने के लिए डिजिटल और वित्तीय रिकॉर्ड की भी जांच की जाएगी. यदि जांच में अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो आगे और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं.
पहले भी विवादों में रहा है कोडरमा
कोडरमा का नाम अवैध विस्फोटक आपूर्ति के मामलों में पहले भी सामने आ चुका है. कुछ वर्ष पूर्व नक्सली संगठनों को अवैध रूप से विस्फोटक उपलब्ध कराने के मामलों में भी यहां जांच एजेंसियों ने कार्रवाई की थी. हालांकि पिछले कुछ वर्षों में विस्फोटक कारोबार को लेकर बड़े स्तर पर छापेमारी की घटनाएं कम देखने को मिली थीं. इस ताजा कार्रवाई के बाद एक बार फिर जिले में विस्फोटक कारोबार की निगरानी और लाइसेंसधारकों की गतिविधियों पर सवाल उठने लगे हैं.
कोडरमा पुलिस की चार टीमों ने दिया सहयोग
पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, एनआईए की कार्रवाई में कोडरमा पुलिस की चार अलग-अलग टीमों को लगाया गया था. छापेमारी अभियान में एनआईए के 12 अधिकारी और कर्मचारी शामिल थे, जबकि स्थानीय पुलिस की ओर से 28 जवान और अधिकारी सुरक्षा एवं सहयोग के लिए तैनात किए गए थे. पूरे अभियान के दौरान सभी ठिकानों की घेराबंदी कर सघन तलाशी ली गई, ताकि किसी भी प्रकार के साक्ष्य नष्ट न हो सकें.
जांच के बाद सामने आ सकते हैं बड़े खुलासे
एनआईए की इस कार्रवाई को बांकुडा विस्फोट मामले की जांच में एक महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है. जांच एजेंसी अब जब्त किए गए दस्तावेजों, वित्तीय लेन-देन, लाइसेंस रिकॉर्ड और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का विश्लेषण करेगी. अधिकारियों का मानना है कि इन साक्ष्यों के आधार पर अवैध विस्फोटक आपूर्ति नेटवर्क, उससे जुड़े लोगों और संभावित लाभार्थियों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी सामने आ सकती है. फिलहाल एनआईए पूरे मामले की कई पहलुओं से जांच कर रही है और आने वाले दिनों में इस मामले में और भी अहम खुलासे तथा नई कार्रवाई होने की संभावना जताई जा रही है.
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