झुमरीतिलैया: उत्तम क्षमा धर्म के साथ शुरू हुआ दसलक्षण पर्युषण महापर्व

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मुनीश्री का चरण पखारते. | Prabhat Khabar Network

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झुमरीतिलैया में जैन धर्म का दसलक्षण पर्युषण महापर्व उत्तम क्षमा धर्म के साथ शुरू हो गया है. मुनि श्री 108 सुयश सागर गुरुदेव के सान्निध्य में श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना की. उन्होंने क्षमा को वीरों का आभूषण बताते हुए इसके महत्व पर प्रकाश डाला.

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झुमरीतिलैया. जैन धर्म का दसलक्षण पर्युषण महापर्व बुधवार को उत्तम क्षमा धर्म के साथ शुरू हुआ. जैन मंदिर में चातुर्मास कर रहे मुनि श्री 108 सुयश सागर गुरुदेव के सान्निध्य में श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना और अभिषेक में भाग लिया. सुबह ब्रह्म मुहूर्त से ही महिला, पुरुष और बच्चे केसरिया एवं श्वेत वस्त्रों में मंदिर पहुंचे.

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प्रवचन के दौरान मुनि सुयश सागर ने उत्तम क्षमा धर्म पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पर्युषण पर्व श्रावक के आत्मकल्याण का सबसे बड़ा पर्व है. यह मनुष्य को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने में सहायक होता है.

पर्युषण महापर्व भगवान महावीर के मूल सिद्धांतों पर आधारित है. उन्होंने कहा कि क्षमा वीरों का आभूषण है. जीवन में क्षमा को धारण करने से परिवार और समाज में शांति कायम हो सकती है. क्षमा ऐसा हथियार है, जिससे किसी को नुकसान नहीं पहुंचता और आपसी बैर व दुश्मनी दूर हो जाती है.

उन्होंने कहा कि पर्युषण पर्व के दौरान जैन समाज के लोग यह संकल्प लेते हैं कि प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी भी जीव को कष्ट नहीं पहुंचायेंगे तथा जाने-अनजाने में हुई गलतियों के लिए सभी जीवों से क्षमा मांगेंगे. दसलक्षण पर्व प्रकृति और पर्यावरण से भी जुड़ा है.

मानसून के दौरान मनाया जाने वाला यह पर्व समाज को प्रकृति के साथ जुड़ने की सीख देता है. मौके पर गुरुदेव सुयश सागर ने दस दिवसीय शिविर में शामिल होने वाले श्रावकों को विशेष पूजा, नियम और व्रत प्रदान किया. पंडित अभिषेक शास्त्री ने शांति धारा से पूर्व की विधि संपन्न करायी. मूलनायक श्री पारसनाथ भगवान का प्रथम अभिषेक एवं शांति धारा करने का सौभाग्य सुरेश कुमार-नरेंद्र झांझरी परिवार को मिला.

श्रीजी का विहार कर पांडुकशिला पर विराजमान करने एवं भगवान आदिनाथ पर प्रथम अभिषेक का सौभाग्य संजय-कर्तव्य ठोलिया परिवार को प्राप्त हुआ. भगवान महावीर का विहार कर प्रथम अभिषेक एवं शांति धारा का सौभाग्य ललित सिद्धांत सेठी, महावीर प्रसाद एवं तारा देवी सेठी, सिलचर को मिला. मंडप पर अखंड दीपक स्थापना का सौभाग्य सुरेंद्र-सरिता काला परिवार को मिला.

नये मंदिर में भगवान महावीर की शांति धारा का सौभाग्य सुशील-सुमित छाबड़ा परिवार और प्रदीप-प्रतीक पांडया परिवार को प्राप्त हुआ. भगवान आदिनाथ की बेदी पर शांति धारा का सौभाग्य प्राची सेठी के जन्मदिन के अवसर पर विजय-विवेक सेठी परिवार को मिला. पर्युषण महापर्व के पहले दिन की संध्या में भव्य आरती और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुआ़ कार्यक्रम को सफल बनाने में समाज के अध्यक्ष, मंत्री, चातुर्मास कमेटी के संयोजक, मीडिया प्रभारी नवीन जैन एवं राजकुमार अजमेरा समेत समाज के अन्य सदस्य लगे हैं.

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