बरखास्त जेइ विवेकानंद चौधरी के विरुद्ध गिरफ्तारी वारंट
Updated at : 10 Feb 2017 9:10 AM (IST)
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सर्टिफिकेट केस होने के बाद टर्नअप नहीं होने पर जिला नीलाम पत्र पदाधिकारी ने जारी किया वारंट कोडरमा : लाखों रुपये की सरकारी राशि का गबन कर भुगतान नहीं करने वाले दो जूनियर इंजीनियरों के विरुद्ध गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया है. जिला नीलाम पत्र पदाधिकारी मनीषा वत्स ने भ्रष्टाचार के आरोप में पूर्व में […]
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सर्टिफिकेट केस होने के बाद टर्नअप नहीं होने पर जिला नीलाम पत्र पदाधिकारी ने जारी किया वारंट
कोडरमा : लाखों रुपये की सरकारी राशि का गबन कर भुगतान नहीं करने वाले दो जूनियर इंजीनियरों के विरुद्ध गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया है.
जिला नीलाम पत्र पदाधिकारी मनीषा वत्स ने भ्रष्टाचार के आरोप में पूर्व में बरखास्त किये गये जेइ विवेकानंद चौधरी व एनआरइपी के जूनियर इंजीनियर अशोक कुमार के विरुद्ध गुरुवार को वारंट जारी किया है. जानकारी के अनुसार जिला परिषद के कनीय अभियंता रहते विवेका चौधरी पर करीब 40 लाख रुपये तो एनआरइपी के जेइ अशोक कुमार पर 41 लाख रुपये का गबन का आरोप है. डीसी संजीव कुमार बेसरा के निर्देश पर दिसंबर 2016 में दोनों के विरुद्ध जिला नीलाम पत्र पदाधिकारी मनीषा वत्स के पास दो अलग-अलग सर्टिफिकेट केस दर्ज किये गये थे. विवेका चौधरी पर जिला अभियंता जिला परिषद ने 39 लाख, 69 हजार, 969 रुपये के गबन का तो जेइ अशोक कुमार पर कार्यपालक अभियंता एनआरइपी ने 41 लाख रुपये के गबन का आरोप लगाया था.
विवेका चौधरी को वर्ष 2008-09 व 2009-10 में जिला परिषद में कनीय अभियंता रहते समय शिक्षा मद की तीन योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए कुल दो करोड़, 12 लाख, 48 हजार रुपये अग्रिम दिया गया था. पर एक करोड़, 67 लाख, 60 हजार के कार्य की मापी पुस्तिका समर्पित की गयी. डीडीसी की अध्यक्षता में गठित जांच टीम ने पाया था कि उक्त योजनाओं में विवेकानंद चौधरी से 44 लाख, 87 हजार 369 रुपये वसूलना है. बाद में विवेका ने पांच लाख 17 हजार 400 रुपये विभाग को जमा करा दिया. शेष 39 लाख, 69 हजार, 969 रुपये विवेकानंद चौधरी से वसूलना है.
थाना में दर्ज मामले में पुलिस रही है शिथिल : गबन के पूरे मामले को लेकर सात सितंबर 2016 को ही जिला अभियंता जिला परिषद सलील किशोर दुबे ने कोडरमा थाना में कांड संख्या 197/16 दर्ज कराया था. मामला दर्ज होने के बाद पुलिस प्रशासन के लचीला रूख का फायदा विवेका चौधरी को मिला था और बाहर ही बाहर अदालत से जमानत मिल गयी थी.
गत छह दिसंबर को नाटकीय ढंग से पुलिस ने उसे इस मामले में गिरफ्तार भी किया था, पर कुछ ही घंटे में हाईकोर्ट से जमानत का कागजात आ जाने पर उसे छोड़ देना पड़ा था. विवेका चौधरी पर पूर्व में भी कई योजनाओं में गड़बड़ी का आरोप है. अब सर्टिफिकेट केस में गिरफ्तारी वारंट निर्गत होने पर मुश्किलें बढ़ सकती है. हाल ही में कोडरमा के गांधी चौक पर पारित नक्शा के विरुद्ध मार्केट कांप्लेक्स के निर्माण में भी विवेका के विरुद्ध कार्रवाई की तैयारी चल रही है. इससे पूर्व सर्टिफिकेट केस दर्ज होने के बाद विवेका चौधरी व अशोक कुमार को नोटिस निर्गत कर अपना पक्ष रखने के लिए 30 दिन का समय दिया गया था, पर इस दौरान दोनों टर्नअप नहीं हुए.
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