बनेगा ऑटोमोबाइल बॉडी बिल्डिंग क्लस्टर
Updated at : 15 Dec 2016 12:46 AM (IST)
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विकास कोडरमा : जिले में अलग-अलग काम कर रहे आॅटो मोबाइल बॉडी बिल्डर के दिन बदलने वाले हैं. अगर सब कुछ ठीक रहा, तो आनेवाले कुछ वर्षों में अभ्रक नगरी के रूप में पहले से पहचान बनाने वाला यह क्षेत्र आॅटोमोबाइल बॉडी बिल्डिंग के नाम से भी जाना जायेगा. भारत सरकार की मिनिस्टरी आॅफ माइक्रो […]
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विकास
कोडरमा : जिले में अलग-अलग काम कर रहे आॅटो मोबाइल बॉडी बिल्डर के दिन बदलने वाले हैं. अगर सब कुछ ठीक रहा, तो आनेवाले कुछ वर्षों में अभ्रक नगरी के रूप में पहले से पहचान बनाने वाला यह क्षेत्र आॅटोमोबाइल बॉडी बिल्डिंग के नाम से भी जाना जायेगा. भारत सरकार की मिनिस्टरी आॅफ माइक्रो स्मॉल एंड मीडियम इंटरप्राइजेज ने इसके लिए पहल की है.
सरकार कोडरमा में आॅटोमोबाइल बॉडी बिल्डिंग क्लस्टर विकसित करने को लेकर प्रयासरत है. मंत्रालय की इस पहल पर उद्योग विभाग झारखंड व जिला प्रशासन ने भी युद्ध स्तर से काम करना शुरू कर दिया है. इसके लिए बकायदा 15 करोड़ रुपये का डीपीआर तैयार हो गया है. यहीं नहीं क्लस्टर को विकसित करने के लिए करीब 30 एकड़ गैर मजरूरआ भूमि चिह्नित करने का काम भी हो रहा है.
जानकारी के अनुसार कोडरमा जिले के विभिन्न इलाकों खासकर रांची-पटना रोड स्थित चंदवारा के कुछ हिस्सों के अलावा तिलैया से लेकर कोडरमा तक ट्रक व अन्य भारी वाहनों के बॉडी बिल्डिंग का काम छोटे-छोटे स्तर पर अभी संचालित हो रहा है. इन जगहों के अलावा औद्योगिक क्षेत्र के रूप में पहचान बना रहे डोमचांच में सबसे अधिक बॉडी बिल्डिंग गैरेज संचालित हैं.
इन बॉडी बिल्डिंग गैरेजों में छोटे स्तर पर ही पर काम अच्छा होता है और जिले में भारी संख्या में वाहन होने के कारण इन यूनिटों को काम भी मिल रहा है. प्रभात खबर को मिली जानकारी के मुताबिक नये प्रोजेक्ट को लेकर पूर्व मे यहां के डीसी रहे के रवि कुमार जो वर्तमान में उद्योग निदेशक हैं के अलावा डीसी संजीव कुमार बेसरा ने कारगर पहल की है. आॅटोमोबाइल बॉडी बिल्डिंग क्लस्टर विकसित करने को लेकर करोड़ों रुपये के डीपीआर को भी इन दोनों की मदद से बहुत जल्द तैयार कर लिया गया है.
अब इसे स्वीकृति मिलने की देर है. फिलहाल एक साथ करीब 30 एकड़ गैर मजरूआ जमीन चिह्नित करने को लेकर प्रयास हो रहा है. जिला प्रशासन की तैयारी रांची-पटना रोड स्थित चंदवारा से लेकर कोडरमा तक में ही जमीन चिह्नित करने की है. ऐसे में इसमें थोड़ी देर हो रही है. पूरे प्रोजेक्ट को अमलीजामा पहनाने के लिए सर्वे का काम भी पूरा हो गया है. जिला प्रशासन ने जो सर्वे कराया है, उसमें जिले में 150 से 200 आॅटोमोबाइल बॉडी बिल्डिंग गैरेज के यहां संचालित होने की जानकारी सामने आयी है. अगर इन सभी को एक साथ एक जगह जमीन उपलब्ध करा कर कार्य कराया जाये, तो यह एक इंडस्ट्री का रूप ले सकती है. साथ ही ऐसा होने पर आॅटोमोबाइल कंपनियों के बड़े प्रोजेक्ट भी इस इंडस्ट्री को मिल सकते हैं.
क्लस्टर में उपलब्ध होंगी सभी सुविधाएं
आॅटोमोबाइल बॉडी बिल्डिंग क्लस्टर में सभी सुविधाएं भी उपलब्ध रहेंगी. सरकार के उद्योग निदेशक के रवि कुमार ने उपायुक्त संजीव कुमार बेसरा को भेजे पत्र में लिखा है कि उद्योग विभाग एमएसएमइ के तहत झारखंड में क्लस्टर चिह्नित करने का काम कर रहा है.
एमएसइ क्लस्टर डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत क्लस्टर तैयार करने की योजना है. कोडरमा में काफी संख्या में आॅटोमोबाइल बॉडी बिल्डिंग यूनिट संचालित हैं. राज्य सरकार यहां क्लस्टर विकसित कर सभी सुविधाएं उपलब्ध करायेगी. इसमें कॉमन फेसलिटी सेंटर व अन्य सुविधाओं को बढ़ाना प्राथमिकता होगी. उद्योग निदेशक के इस पत्र के बाद जिला प्रशासन ने कोडरमा में आॅटोमोबाइल बॉडी बिल्डिंग यूनिट के संचालकों का एक सर्वे किया. इसमें उनकी सोच व जरूरत को भी शामिल किया गया है.
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