कलियुग में केवल हरिनाम से ही उद्धार संभव: कथावाचक

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बिंदापाथर में आयोजित सात दिवसीय भारत माता मेला सह श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन, नवद्वीप धाम से आये कथावाचक मुकुंद दास अधिकारी महाराज ने श्रीमद्भागवत कथा सुनायी.

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प्रतिनिधि, बिंदापाथर बिंदापाथर में आयोजित सात दिवसीय भारत माता मेला सह श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन, सोमवार की रात्रि, नवद्वीप धाम से आये कथावाचक मुकुंद दास अधिकारी महाराज ने श्रीमद्भागवत कथा के अंतर्गत “प्रेमावतार श्रीकृष्ण चैतन्य महाप्रभु के अवतार लीला महिमा ” का मधुर वर्णन किया. उन्होंने बताया कि कलियुग में केवल हरिनाम ही उद्धार का माध्यम है. भगवान श्रीकृष्ण स्वयं राधिकाजी के भाव और अंगकांति को लेकर श्रीगौरांग रूप में अवतीर्ण होंगे और हरिनाम संकीर्तन के माध्यम से भक्ति का प्रचार करेंगे. कथा में हरिदास ठाकुरजी के जीवन से जुड़े प्रसंगों का भी उल्लेख हुआ. उन्होंने हरिनाम की महिमा बताते हुए कहा कि एक शुद्ध हरिनाम से भगवत प्रेम प्राप्त होता है और नामाभास से भी मुक्ति संभव है. गोपाल चक्रवर्ती ने हरिनाम की शक्ति को नकारते हुए अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया. परिणामस्वरूप, गोपाल को कुष्ठ रोग हो गया, लेकिन बाद में महाप्रभुजी की कृपा और हरिनाम के बल पर वह स्वस्थ और भगवद-भक्त बन गया. कथा के दौरान अन्य प्रसंगों में चापाल गोपाल की कथा भी सुनाई गयी. उसकी दुराचार प्रवृत्ति के कारण उसे कुष्ठ रोग हुआ, लेकिन महाप्रभुजी की कृपा से वह भी स्वस्थ और भक्ति मार्ग पर लौट आया. कार्यक्रम में कथा के साथ सुमधुर भजनों की प्रस्तुति ने श्रद्धालुओं को भक्ति से सराबोर कर दिया. उपस्थित भक्तगण कथा के भावपूर्ण प्रसंगों में रमकर झूमते और हरिनाम का गुणगान करते रहे.

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