ईश्वर व माता-पिता से भी ऊपर है शिक्षक का दर्जा

Published at :05 Sep 2016 7:06 AM (IST)
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ईश्वर व माता-पिता से भी ऊपर है शिक्षक का दर्जा

आज के इस आधुनिक युग में पूरानी मान्यताओं का ह्रास हुआ है इसका मुख्य कारण वर्तमान शिक्षा प्रणाली तथा भौतिकवादी युग है जामताड़ा : शिक्षक समाज के निर्माता हैं.कहते हैं कि माता-पिता से भी ऊपर दर्जा शिक्षक का होता है. शिक्षकों को समाज में सम्मान से देखा जाता है. लेकिन आज के इस आधुनिक युग […]

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आज के इस आधुनिक युग में पूरानी मान्यताओं का ह्रास हुआ है

इसका मुख्य कारण वर्तमान शिक्षा प्रणाली तथा भौतिकवादी युग है
जामताड़ा : शिक्षक समाज के निर्माता हैं.कहते हैं कि माता-पिता से भी ऊपर दर्जा शिक्षक का होता है. शिक्षकों को समाज में सम्मान से देखा जाता है. लेकिन आज के इस आधुनिक युग में पूरानी मान्यताओं का ह्रास हुआ है. इसका मुख्य कारण वर्तमान शिक्षा प्रणाली तथा भौतिकवादी युग को माना जा रहा है.
जामताड़ा आदर्श मवि के सहायक शिक्षक तथा राष्ट्रपति से पु
रस्कार प्राप्त शिक्षक सुनील कुमार बास्की ने कहा कि शिक्षकों को आज के समय में कुछ सम्मान गिरा है. इसमें कहीं कोई संदेह नहीं है. कहा कि इसके पीछे वर्तमान शिक्षा प्रणाली तथा भौतिकवादी युग के कारण ही शिक्षकों को मान सम्मान में कमी आयी है. विद्यालयों में शिक्षण प्रणाली अब शिक्षकों को करने के बजाय बच्चों को खिलाने-पीलाने की व्यवस्था है. जिससे शिक्षक बदनाम भी हो रहे हैं. जबकि शिक्षक मजबूरी में सरकारी निर्देशों को पालन कर रहे हैं.
समाज में नैतिकता नाम की चीज अब बहुत कम रह गयी है. इस भौतिकवादी युग में भी लोगों का धीरे-धीरे मानसिकता में बदलाव हो रहा है तथा नैतिकता का भी पतन हो रहा है. समाज में अभिभावकों के आचरण का भी बच्चे अनुकरण करते हैं. अभिभावक जिस आचरण के होंगे, बच्चें भी उसी आचरण को अपनायेंगे. इस कारण से भी बच्चें भी शिक्षक को सम्मान नहीं दे रहे हैं. उन्होंने शिक्षकों को चहारदीवारी के अंदर से निकल कर समाज के साथ मिलकर चलने की अपील की.
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