टाटा कमिंस : बोनस मैट्रिक्स के श्रेय को लेकर त्रिकोणीय घमासान, पक्ष-विपक्ष के दावों के बीच पूर्व महामंत्री भी कूदे
सांकेतिक तस्वीर.
टाटा कमिंस में आगामी बोनस समझौते से पहले यूनियन में श्रेय को लेकर घमासान मचा हुआ है. सत्ता पक्ष, विपक्ष और पूर्व महामंत्री बोनस मैट्रिक्स के श्रेय पर एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं. जानिए कौन क्या कह रहा है.
जमशेदपुर : टाटा कमिंस में आगामी बोनस समझौते से पहले यूनियन में ''क्रेडिट वॉर'' तेज हो गया है. बोनस मैट्रिक्स के श्रेय को लेकर सत्ता पक्ष, विपक्ष और पूर्व महामंत्री आमने-सामने आ गये हैं. यूनियन के संयुक्त महामंत्री सह प्रवक्ता शंभू शरण ने कहा कि टाटा कमिंस कर्मचारियों के सालाना बोनस के लिए बनाया गया मैट्रिक्स करीब 12 साल पुराना है. जिसे 2014 में तत्कालीन महामंत्री सुशील श्रीवास्तव के समय प्रॉफिट, प्रोडक्शन और बीआईएस मापदंडों पर तैयार किया गया था. केवल हर साल एओपी व प्रॉफिट लक्ष्य बदलता है. हालिया वेज रिवीजन में इसी 2014 वाले मैट्रिक्स को अगले 4 साल के लिए यथावत रिन्यू किया गया है.
पूर्व नेतृत्व की देन है वर्तमान आधार: विपक्ष
विपक्षी खेमे के अनुसार, मैट्रिक्स की नींव 2013 में तत्कालीन महामंत्री सुनील ने रखी थी. इसके बाद 2019 में तत्कालीन महामंत्री अरुण सिंह ने इसे रिफाइन किया. जिससे 18.5% से 19% लाभ मिला. 2022 में दीप्तेंदु चक्रवर्ती के समय इसे सुदृढ़ कर 20% बोनस सुनिश्चित हुआ. विपक्ष का आरोप है कि मौजूदा कमेटी ने पूर्व-निर्मित सफल ढांचे को बिना बदलाव सिर्फ स्वीकार किया है.
वर्तमान लाभ हमारे संशोधनों का नतीजा: अरुण सिंह
यूनियन के पूर्व महामंत्री सह कंपनी से बर्खास्त अरुण सिंह ने 2014 के दावों को खारिज करते हुए कहा कि मौजूदा लाभ उनके कार्यकाल के बदलावों का परिणाम हैं. 2016 में उनके कार्यकाल में 95% टारगेट पर ही 10% वेटेज का प्रावधान हुआ. बीआईएस का न्यूनतम वेटेज 1 से बढ़ाकर 1.5 फिक्स कराया गया और पीपीएम मानकों में ढील दिलाकर 7% वेटेज सुरक्षित किया गया. 2019 में इसे और मजबूत किया गया. अत: इसे 2014 की व्यवस्था बताना तथ्यहीन है.
बोनस पर जल्द होगी वार्ता
बोनस वार्ता को लेकर यूनियन के संयुक्त महामंत्री सह प्रवक्ता शंभू शरण ने कहा कि जल्द ही वार्ता होगी. कमिंस में मैट्रिक्स के आधार पर कर्मचारियों को बोनस तय है. जल्द ही यूनियन प्रबंधन को पत्र सौंपकर समझौते को अंतिम रूप देगी.
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