सर दोराबजी टाटा के कार्यकाल में भारत ने ओलिंपिक में जीता था पहला गोल्ड

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टीम की तस्वीर.

जमशेदपुर के सर दोराबजी टाटा के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत ने ओलंपिक की स्वर्णिम यात्रा शुरू की. उनकी पहल से भारत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान मिली और हॉकी में पहला गोल्ड आया.

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जमशेदपुर : भारतीय खेलों के विकास में जमशेदपुर का बहुत बड़ा योगदान रहा है. भारतीय ओलिंपिक संघ के संस्थापक अध्यक्ष सर दोराबजी टाटा थे. उनकी दूरदर्शी नेतृत्व में ही भारत ने ओलिंपिक के मंच पर अपनी स्वर्णिम यात्रा की शुरुआत की थी. सर दोराबजी टाटा ने व्यक्तिगत स्तर पर वित्तीय सहायता प्रदान कर भारत के चार एथलीटों और दो पहलवानों के दल को 1920 एंटवर्प ओलिंपिक में भेजाथा. इसी पहल के साथ भारत ने अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर पहली बार कदम रखा. उनके प्रयासों से भारत को ओलिंपिक में प्रतिनिधित्व मिला.

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अंतरराष्ट्रीय ओलिंपिक समिति के सदस्य के रूप में चुना गया

1924 पेरिस ओलंपिक में उन्हें अंतरराष्ट्रीय ओलिंपिक समिति के सदस्य के रूप में चुना गया. 1927 में सर दोराबजी टाटा भारतीय ओलंपिक संघ के पहले अध्यक्ष बने. 1928 एम्स्टर्डम ओलंपिक में उनकी अध्यक्षता में गठित भारतीय हॉकी टीम ने देश के लिए पहला ओलिंपिक स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा.

खिलाड़ी से खेल प्रशासक तक का सफर

कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में अध्ययन के दौरान सर दोराबजी टाटा खुद एक उत्कृष्ट एथलीट रहे और उन्होंने कई खेल प्रतियोगिताओं में खिताब जीते. खेलों के प्रति इसी व्यक्तिगत रुचि और समर्पण के कारण वे एक दूरदर्शी खेल प्रशासक बने. 1928 के एम्स्टर्डम ओलंपिक के लिए एक मजबूत और संतुलित भारतीय हॉकी टीम का चयन व उसका मार्गदर्शन करने का मुख्य श्रेय उन्हीं को जाता है. भारतीय खेलों को वैश्विक पहचान दिलाने में जमशेदपुर और टाटा घराने का योगदान अतुलनीय माना जाता है.


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