आवास योजना की खुली पोल, जर्जर घर छोड़ दूसरों के घर शरण लेने को मजबूर है सबर परिवार
अपने परिवार के साथ रूहबरी सबर.
घाटशिला के छतरडांगा गांव में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने घर बारिश में जर्जर हो गए हैं, जिससे सबर परिवार दूसरों के घरों में शरण लेने को मजबूर हैं।
घाटशिला : घाटशिला प्रखंड की कालचिती पंचायत स्थित छतरडांगा गांव में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने घरों की गुणवत्ता पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं. लगातार बारिश ने निर्माण की खामियों को उजागर कर दिया है. इससे सबर परिवारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. सबर परिवार दूसरों के घरों में शरण लेने को मजबूर हैं.
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बिचौलियों के हस्तक्षेप से खराब रही मकान की गुणवत्ता
मंगलवार को रूहबरी सबर, शुक्रा सबर और बनमाली सबर ने बताया - लगभग एक दशक पहले उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर मिला था. प्रति आवास करीब 1 लाख 30 हजार रुपए के साथ मजदूरी की राशि भी दी गयी थी. लेकिन, निर्माण में लापरवाही और बिचौलियों के हस्तक्षेप के कारण मकान की गुणवत्ता बेहद खराब रही. परिजनों का आरोप है कि घर निर्माण में घटिया सामग्री, विशेषकर काले ईंट का उपयोग किया गया. इससे मकान टिकाऊ नहीं बन सका. वर्ष 2017-18 में बने ये मकान आज रहने लायक नहीं बचे हैं. वर्तमान स्थिति यह है कि रूहबरी सबर किसी तरह अपने जर्जर घर में रह रही हैं, जबकि शुक्रा सबर और बनमाली सबर अपने परिवार के साथ दूसरों के घरों में शरण लेने को मजबूर हैं.
मुखिया ने बीडीओ को दी मामले की जानकारी
बारिश के इस मौसम में जर्जर मकानों की हालत ने आवास योजना के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. जरूरत है कि प्रशासन जल्द से जल्द जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करे और प्रभावित परिवारों को सुरक्षित आवास उपलब्ध कराये. इधर, मुखिया बैद्यनाथ मुर्मू ने बताया कि मामले की जानकारी उन्हें है और इसे बीडीओ को अवगत करा दिया गया है.
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