होलिका दहन : दो मार्च की रात्रि 11.53 बजे से 12.50 बजे के मध्य उचित समय : आचार्य

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हाल ही में समाचार माध्यमों से होलिका दहन हेतु ब्रह्म मुहूर्त (प्रात: पांच बजे) का समय प्रसारित किया गया है

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गुमला. हाल ही में समाचार माध्यमों से होलिका दहन हेतु ब्रह्म मुहूर्त (प्रात: पांच बजे) का समय प्रसारित किया गया है. जिसे गुमला के ब्राह्मण समाज ने शास्त्रीय मर्यादाओं और पंचांगीय गणनाओं के अनुकूल नहीं बताया है. इस विषय पर गुमला क्षेत्र के प्रतिष्ठित विद्वानों एवं आचार्यों ने विचार-विमर्श के उपरांत होलिका दहन का उचित समय दो मार्च की रात्रि 11.53 बजे से 12.50 बजे तक बताया है. आचार्य विकास मिश्रा बबलू, आचार्य अभय मिश्रा, आचार्य अरुणजय पाठक व आचार्य अमित पूरी ने कहा है कि शास्त्रों के अनुसार ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से पूर्व का समय) ईश्वरीय आराधना, संध्या वंदन और सात्विक कार्यों के लिए सुरक्षित है. इस पावन समय में होलिका दहन जैसा कृत्य और उत्सव का हुड़दंग करना सर्वथा अशास्त्रीय है. होलिका दहन एक निशा-कृत्य है, जिसे प्रदोष काल या अर्द्धरात्रि के शुद्ध मुहूर्त में ही संपन्न किया जाना चाहिये. उन्होंने कहा कि दो मार्च की रात्रि में मृत्युलोक की भद्रा प्रभावी है. शास्त्र स्पष्ट निर्देश देते हैं कि भद्रा के मुख काल का त्याग अनिवार्य है. महावीर पंचांग की सूक्ष्म गणना के अनुसार भद्रा के उतरार्द्ध (पुच्छ काल) का ही चयन श्रेष्ठ है. जिसके अनुसार होलिका दहन के लिए दो मार्च की रात्रि 11.53 बजे से 12.50 बजे के मध्य का समय शुद्ध है. आचार्यों ने श्रद्धालुओं से विनम्र निवेदन किया है कि किसी भी प्रकार की भ्रामक सूचनाओं में नहीं आये और अर्द्धरात्रि 11.53 बजे से 12.50 बजे के बीच ही होलिका दहन करें.

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