सिसई में सड़क-नाली की बदहाली पर फूटा जनआक्रोश, प्रशासन को 15 दिन का अल्टीमेटम; आंदोलन की चेतावनी
सड़क-नाला निर्माण को लेकर ज्ञापन सौंपते हुए लोग : प्रभात खबर
गुमला के सिसई में जर्जर सड़क और बुनियादी सुविधाओं की कमी से जनता परेशान. संघर्ष समिति ने प्रशासन को 15 दिन का अल्टीमेटम देते हुए बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है.
गुमला : जिले के सिसई क्षेत्र में लंबे समय से सड़क, नाली, जल निकासी और यात्री सुविधाओं की बदहाल स्थिति को लेकर लोगों का आक्रोश अब खुलकर सामने आया है. सिसई बचाव संघर्ष समिति ने समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर एक दवसीय धरना-प्रदर्शन करने और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपने का निर्णय लिया है. समिति ने प्रशासन को 15 दिनों का अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि निर्धारित अवधि में सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को व्यापक रूप दिया जायेगा.
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समिति की ओर से जारी ज्ञापन में लक्ष्मी नारायण यादव ने कहा कि सिसई प्रखंड के लोग वर्षों से बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं. जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ समय पर नहीं मिलने और सड़क समेत अन्य समस्याओं के समाधान में लगातार हो रही देरी से लोगों में नाराजगी बढ़ रही है. इसके विरोध में स्थानीय व्यवसायियों ने 31 जुलाई 2026 को अपने प्रतिष्ठान बंद रखकर विरोध जताया था. इसके बाद प्रखंड मुख्यालय के समीप धरना देकर सरकार और प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराने का निर्णय लिया गया.
रेड़वा-महुआडीपा सड़क के निर्माण की मांग
समिति की प्रमुख मांग रेड़वा से महुआडीपा तक पुरानी एनएच-43 सड़क की ढलाई और कालीकरण कर निर्माण कराने की है. ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से जर्जर सड़क के कारण राहगीरों और वाहन चालकों को आवागमन में परेशानी होती है. बरसात के दिनों में स्थिति और गंभीर हो जाती है. समिति ने सड़क के दोनों किनारों पर ढक्कनयुक्त पक्की नाली बनाने की भी मांग की है. बारिश के दौरान जलजमाव और गंदगी के कारण स्थानीय लोगों को परेशानी उठानी पड़ती है. लोगों का कहना है कि सड़क निर्माण के साथ जल निकासी की स्थायी व्यवस्था भी जरूरी है.
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बस पड़ाव और नालियों की व्यवस्था सुधारने की मांग
सिसई बस पड़ाव में सार्वजनिक शौचालय, पेयजल और यात्रियों के बैठने की समुचित व्यवस्था कराने की मांग की गयी है. इसके अलावा सड़क किनारे फैली गंदगी और जाम नालियों की सफाई तथा जल निकासी की व्यवस्था दुरुस्त करने की बात कही गयी है. समिति ने जामा मस्जिद से कुम्हार मोड़ और मदरसा रोड से सिसई तालाब तक नालियों की शीघ्र निकासी कराने की मांग रखी है, ताकि जलजमाव की समस्या से लोगों को राहत मिल सके.
एनएच विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल
समिति ने एनएच विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाये हैं. लोगों का आरोप है कि सड़कें जर्जर होती जा रही हैं और नालियां लंबे समय से जाम हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो रही है. लोगों का कहना है कि सड़क की मरम्मत कब होगी, इसका इंतजार वर्षों से किया जा रहा है. ग्रामीणों ने व्यंग्य करते हुए कहा कि शायद सड़क की मरम्मत के लिए किसी विशेष शुभ मुहूर्त का इंतजार किया जा रहा है. हर बरसात के साथ सड़क की स्थिति और खराब होती जा रही है, जबकि समस्या का स्थायी समाधान अब तक नहीं हुआ.
15 दिन में कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन तेज
ज्ञापन में स्पष्ट चेतावनी दी गयी है कि 15 दिनों के भीतर मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो सिसई प्रखंडवासी गुमला-रांची एनएच-43 फोरलेन सड़क, सभी व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और स्थानीय बाजार-हाट को अनिश्चितकाल के लिए बंद कर चक्का जाम करने को मजबूर होंगे. समिति ने कहा है कि इसके बाद होने वाले प्रदर्शन और किसी भी तरह की कार्रवाई की जिम्मेदारी सरकार और प्रशासन की होगी. फिलहाल सिसई के लोगों का सीधा सवाल है कि सड़क कब बनेगी और व्यवस्था कब सुधरेगी ?
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