आधुनिकता की मार से विलुप्ति के कगार पर फोम, रेशम और जरी की राखियां
रक्षाबंधन पर आधुनिक स्टोन और कार्टून राखियों के दौर में फोम, रेशम और जरी की पारंपरिक राखियों की मांग क्यों घट रही है, जानें पूरी खबर।
जगरनाथ पासवान, गुमला
आपके शहर में
भाई-बहन के प्रेम का त्योहार रक्षाबंधन इस वर्ष 28 अगस्त को मनाया जायेगा. सावन पूर्णिमा पर बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षासूत्र बांधकर उनकी लंबी उम्र की कामना करेंगी, वहीं भाई बहनों की रक्षा का संकल्प लेंगे. त्योहार को लेकर गुमला शहर में राखियों का बाजार सजकर तैयार है और बहनों ने खरीदारी शुरू कर दी है. एक समय था जब फोम, रेशम और जरी से बनी राखियों की बाजार में जबरदस्त मांग हुआ करती थी. करीब डेढ़ से दो दशक पहले बहनें भाइयों के लिए बड़ी-बड़ी फोम की राखियां पसंद करती थीं. इन राखियों में नोट और सिक्के भी लगाये जाते थे. वहीं जरी की राखियों में ओम, स्वास्तिक सहित कई आकर्षक डिजाइन बनाये जाते थे. ये राखियां उस समय भाइयों के लिए बहनों की पहली पसंद हुआ करती थीं. लेकिन आधुनिकता के दौर में इन पारंपरिक राखियों की मांग लगातार कम होती गयी. इसके साथ ही इन्हें बनाने वाले कारीगरों की संख्या भी घटती गई और अब ऐसे कारीगर लगभग नहीं के बराबर रह गये हैं. उनकी जगह स्टोन, लाइटिंग, म्यूजिकल, टेडी बियर और लुंबा जैसी आधुनिक राखियों ने ले ली हैं.
गुमला के बाजार में दिल्ली, कोलकाता, मुंबई व अहमदाबाद की राखियों की धूम
गुमला के बाजार में दिल्ली, कोलकाता, मुंबई और अहमदाबाद से मंगाई गयी. विभिन्न डिजाइन की राखियां उपलब्ध हैं. बाजार में दो रुपये से लेकर 500 रुपये प्रति पीस तक की राखियां बिक रही हैं. इनमें स्टोन, बुटी, डोरी, फोम, रेशम और जरी की राखियों के अलावा टेडी बियर, लाइटिंग और गेम वाली राखियां शामिल हैं. बच्चों को आकर्षित करने के लिए पबजी, फ्री फायर, लूडो और कैरम जैसे गेम पर आधारित राखियां भी बाजार में हैं. वहीं कार्टून कैरेक्टर में बाल गणेशा, मोटू-पतलू, बेनटेन, स्पाइडरमैन, मिकी माउस, बाहुबली, पोकमैन और एंग्री बर्ड जैसी राखियां बच्चों को खूब लुभा रही हैं.
स्टोन राखियों की सबसे अधिक मांग
राखी विक्रेताओं के अनुसार इस वर्ष स्टोन से बनी राखियों की सबसे अधिक मांग है. वहीं बच्चियों के बीच लाइटिंग और कार्टून वाली राखियां पहली पसंद बनी हुई हैं. पिछले कुछ वर्षों तक शहर में गिने-चुने दुकानदार ही राखियों की बिक्री करते थे, लेकिन अब राखी विक्रेताओं की संख्या काफी बढ़ गयी है. शहर के मुख्य पथ से लेकर मोहल्लों की गलियों तक राखियों की दुकानें सज गयी हैं. राखी व्यवसायी हिमांशु केशरी ने बताया कि हर वर्ष दिल्ली, कोलकाता, मुंबई और अहमदाबाद जैसे बड़े शहरों से राखियां मंगाकर गुमला में बिक्री की जाती है. इस वर्ष बच्चों के लिए कई तरह की स्पेशल राखियां मंगायी गयी हैं, जो उन्हें खास तौर पर आकर्षित कर रही हैं.
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