पोल्ट्री फार्म ने बदली अजय कुमार को तकदीर

Updated:
विज्ञापन
पोल्ट्री फार्म के पास किसान | Prabhat Khabar Network

पोल्ट्री फार्म के पास किसान | Prabhat Khabar Network

गुमला के अजय कुमार ने ग्रेजुएशन के बाद नौकरी के बजाय पोल्ट्री फार्मिंग को चुना. आज वे स्वरोजगार से अच्छी कमाई कर रहे हैं और युवाओं के लिए प्रेरणा बने हैं.

विज्ञापन

गुमला के डुमरी प्रखंड स्थित नवाडीह गांव निवासी अजय कुमार बैगा ने अपने भाइयों से प्रेरणा लेकर गांव में आधुनिक पोल्ट्री फार्म की शुरुआत की है. अजय बताते हैं कि उनके बड़े भाई गुमला फोरी में कई वर्षों से सफलतापूर्वक पोल्ट्री फार्म का संचालन कर रहे हैं और इस व्यवसाय से अच्छी आय अर्जित कर रहे हैं. उनके साथ कुछ दिन पोल्ट्री फार्म में रहकर भाइयों की सफलता को देखकर उन्होंने भी गांव में रहकर स्वरोजगार अपनाने का निर्णय लिया. ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने नौकरी की तलाश करने के बजाय स्वरोजगार को प्राथमिकता दी और बैंक से ऋण लेकर पोल्ट्री फार्म की स्थापना की.

आगे बताया कि फार्म स्थापित करने के लिए आवश्यक सभी उपकरणों और संसाधनों की व्यवस्था उन्होंने स्वयं की. उनके बाद भाइयों ने उन्हें शालीमार कंपनी से परिचित कराया, जिसके बाद कंपनी के अधिकारियों ने उन्हें पोल्ट्री व्यवसाय की पूरी प्रक्रिया समझाई. इसके बाद कंपनी की ओर से नियमित रूप से चूजों की आपूर्ति शुरू कर दी गई. उन्होंने बताया कि कंपनी के लोग समय-समय पर फार्म का निरीक्षण भी करती है. कंपनी के कर्मचारी चूजों के स्वास्थ्य की निगरानी, दवाइयों की व्यवस्था और आवश्यक तकनीकी सलाह देने के लिए आते रहते हैं. उनकी जिम्मेदारी चूजों का पालन-पोषण, उचित देखभाल और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना है. जब मुर्गियों का वजन लगभग एक से डेढ़ किलोग्राम तक पहुंच जाता है, तब कंपनी उन्हें वापस खरीदकर ले जाती है. बिक्री के समय कंपनी चूजों और अन्य निर्धारित खर्चों की राशि काटकर शेष भुगतान उन्हें करती है, जो उनका लाभ होता है.

अजय कुमार पिछले दो वर्षों से इस व्यवसाय से जुड़े हुए हैं. वर्तमान में दो हजार से अधिक चूजे है. उनका कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में मौसम की अनिश्चितता के कारण कई बार चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. अत्यधिक गर्मी या ठंड से चूजों के प्रभावित होने की आशंका रहती है. इसी कारण कंपनी भी मौसम की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए समय-समय पर ही चूजों की आपूर्ति करती है, ताकि नुकसान की संभावना कम रहे. अजय का मानना है कि यदि सही मार्गदर्शन, मेहनत और धैर्य के साथ कार्य किया जाए तो पोल्ट्री फार्म ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार और आय का एक बेहतर विकल्प बन सकता है.


विज्ञापन
दुर्जय पासवान

लेखक के बारे में

By दुर्जय पासवान

दुर्जय पासवान ने वर्ष 2001 से पत्रकारिता की शुरुआत की. दैनिक जागरण में दो साल काम करने के बाद 2003 में वे प्रभात खबर से जुड़े. इसके साथ ही नयी दुनिया अखबार, प्रहार मैगजीन में भी अपनी सेवा दी. इसके बाद 2010 में वे दैनिक भास्कर गुमला का ब्यूरो इंचार्ज के रूप में काम शुरू किये. भास्कर में पांच साल सेवा देने के बाद दोबारा 2014 में प्रभात खबर में ब्यूरो इंचार्ज के रूप में वापसी की. तब से अबतक प्रभात खबर से जुड़े हुए हैं. उन्होंने नक्सलियों से जुड़ी खबरें, नक्सली घटनाएं, ग्राउंड रिपोर्ट, प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहरों की खोज से संबंधित खबरों पर अच्छा काम किया. इन्हीं खबरों ने उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में पहचान दी. दुर्जय पासवान बहुत लगन से अपना सभी काम का पूरा करते हैं.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola