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भाषा व संस्कृतिक बचेगी, तभी हम बचेंगे : चंद्र किशोर

Updated at : 01 Nov 2025 9:25 PM (IST)
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भाषा व संस्कृतिक बचेगी, तभी हम बचेंगे : चंद्र किशोर

भाषा व संस्कृतिक बचेगी, तभी हम बचेंगे : चंद्र किशोर

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प्रतिनिधि, गुमला कार्तिक उरांव महाविद्यालय गुमला के समीप लकड़ी प्रार्थना मैदान में खड़िया जनजाति ने बंदोई पर्व पूर्व संध्या मनाया. कार्यक्रम का शुभारंभ खड़िया जनजाति के नौ गोत्र और बासली गाय की पारंपरिक पूजा पाठ जेठा पाहन ने किया. स्वागत भाषण अनुज सोरेंग ने किया. बुद्धिमान खड़िया ने अपनी गीतों के माध्यम से बंदोई पर्व की विशेषताओं को बताये. सुनीता किड़ो ने खड़िया समाज में नशापान के दुष्ट परिणाम के विषय में बताते हुए कहा कि हमारे बच्चे पढ़ाई से भटक कर नशापन की ओर जा रहे हैं और एक्सीडेंट में मारे जा रहे हैं. बिशु सोरेंग ने कहा भाषा व संस्कृत ही हमारी पहचान है. इसे बचाना हम सभी समाज के लोगों का दायित्व बनता है. डॉ चंद्र किशोर केरकेट्टा ने कहा खड़िया जनजाति को बचाना है तो भाषा संस्कृति को बचाना बहुत जरूरी है. किसी जनजाति की पहचान उनकी भाषा से ही होती है. भाषा को बचाने के लिए हमारे माता बहने और ग्रामीण क्षेत्र के सभी को एक मंच पर आना होगा. भाषा बचेगी. तभी खड़िया समाज बन सकती है और भाषा को ही हमारी पहचान है. वंदना टेटे ने कहा कि हमारे समाज के लोगों को भाषा के साथ-साथ साहित्य का भी जानकारी होनी चाहिए. संस्कृति को बचाने के लिए ग्रामीण स्तर में सही से दस्तूर करना चाहिए. निकोलस किड़ो ने कहा कि हमारी परंपरा गीतों पर आधारित है. हमारा इतिहास भी गीतों पर आधारित है. इसलिए सामाजिक गीत और नृत्य को जीवित रखना बहुत जरूरी है. कुलकांत केरकेट्टा ने कहा कि खड़िया समाज को सामाजिक ताकत देने के लिए राजनीति में आना अति आवश्यक है. जिला परिषद के उपाध्यक्ष संयुक्ता देवी ने कहा कि खड़िया समाज बहुत ईमानदार और मेहनती समाज है. इसकी अपना भाषा संस्कृति है और इसकी रक्षा के लिए अभी यह संघर्ष कर रही है।. राजेश खड़िया के स्कूल के छात्रों ने खड़िया जनजातियों के महा बंदोई के बारे में नाटक के माध्यम से प्रस्तुत किया. कार्यक्रम में 220 खोड़हा नृत्य दल ने भाग लिया. मौके पर आरती केरकेट्टा, शांति कुल्लू, अनिमा, शिरोमणि, असरू खड़िया, दिनेश खड़िया, प्रो समीर खड़िया, मांगरा खड़िया, रोशन टेटे, सोमरा खड़िया, यूजीन कुल्लू, अभिषेक सोरेंग, सुरेश खड़िया, अघनू खड़िया, मनोहर खड़िया, मुनि कुल्लू, दिव्या डुंगडुंग, मधुरी कुल्लू, अटल डुंगडुंग, बालगोविंद खड़िया, सनी खड़िया,बसंत टेटे, सुदेश खड़िया, तर्शिला केरकेट्टा, समाज के हजारों माता बहने और भाई-बहनों उपस्थित थे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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Akarsh Aniket

लेखक के बारे में

By Akarsh Aniket

Akarsh Aniket is a contributor at Prabhat Khabar.

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