धनबाद से गुमला जेल तक सुजीत सिन्हा का 'राज': सलाखों के पीछे चलती थी पार्टी, पैसे के दम पर बना रखा था सिस्टम

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गैंगस्टर सुजीत सिन्हा की फाइल फोटो जो वायरल हुई थी लेफ्ट हैंड साइड में और राइट हैंड साइड में गुमला जेल की तस्वीर

गैंगस्टर सुजीत सिन्हा की फाइल फोटो जो वायरल हुई थी लेफ्ट हैंड साइड में और राइट हैंड साइड में गुमला जेल की तस्वीर

गैंगस्टर सुजीत सिन्हा को धनबाद से गुमला जेल शिफ्ट किया गया था, लेकिन वहां भी उसका राज कायम रहा. जेल में खुलेआम पार्टी और पैसों के दम पर सिस्टम चलाने की बात सामने आई है. जानें कैसे उसने जेल में भी अपना दबदबा बनाए रखा.

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गुमला : गैंगस्टर सुजीत सिन्हा को जब गुमला जेल में रखा गया था, तो वहां भी इसका शासन चलता था. 2021 के नवंबर में उसे धनबाद जेल से गुमला जेल शिफ्ट किया गया था. लेकिन पैसा और पावर के बल पर सुजीत गुमला जेल में भी राज करने लगा. वह वहां खुलेआम पार्टी करता था.

अमन साहू के साथ भी सुजीत सिन्हा का गठजोड़ था

अमन साहू के साथ भी सुजीत सिन्हा का गठजोड़ था. इसके अलावा लातेहार में कोल साइडिंग पर आगजनी और फायरिंग में भी अमन साहू औन सुजीत सिन्हा के उग्रवादी संगठन से संबंध उजागर हुए थे. पलामू पुलिस के अनुसार, एटीएस की टीम तीन गाड़ियों से कड़ी सुरक्षा में अमन साहू को रायपुर सेंट्रल जेल से लेकर रांची आ रही थी इसी क्रम में अमन साहू गिरोह के गुर्गों ने एटीएस की तीन गाड़ियों के बीच चल रही स्कॉपियों पर बम से हमल किया. इसके बाद फायरिंग करने लगे. इसका फायदा उठाते हुए अमन साहू एक जवान का इंसास राइफल छीन कर गाड़ी से कूदकर पुलिस पर फायरिंग करते हुए भागने लगा. फायरिंग में हवलदार राकेश कुमार घायल हो गये उनकी जांघ में गोली लगी. इसके बाव एटीएस रांची की टीम ने आत्मरक्षार जवाबी फायरिंग की. इसी क्रम में पुलिस की गोली पीठ में लगने से अमन साहू की मौके पर मौत हो गयी थी. ये घटना 12 मार्च 2025 की है.

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कोयलांचल शांति सेना के संचालन में भी था हाथ

पुलिस जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि कोयलांचल शांति सेना का संचालन गैंगस्टर सुजीत सिन्हा और प्रिंस खान के निर्देश पर हो रहा था. सुजीत सिन्हा के जेल में रहने के दौरान उसकी पत्नी रिया सिन्हा पूरे नेटवर्क का संचालन कर रही थी. रिया अभी चाईबासा जेल में है. रिया सिन्हा ही दोनों गैंगों के बीच समन्वय स्थापित कर रही थी और आपराधिक गतिविधियों को संचालित कर रही थी. रांची में सुजीत के इशारे पर इनामुल हक उर्फ बबलू खान अपने साथियों के साथ मिलकर कारोबारियों और उद्योगपतियों से लेवी की वसूली करता था. यह रकम सुजीत सिन्हा के गुर्गों के माध्यम से प्रिंस खान तक पहुंचायी जाती थी. इसके बाद यूएइ के रास्ते पैसे पाकिस्तान भेजे जाते थे. वहां मौजूद गिरोह के सदस्य इन पैसों का इस्तेमाल अवैध हथियार खरीदने और अन्य गैर-कानूनी गतिविधियों में करते थे.

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समीर उरांव

लेखक के बारे में

By समीर उरांव

इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.

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