बिशुनपुर. विकास भारती बिशुनपुर द्वारा संचालित ज्ञान निकेतन का 38वां स्थापना दिवस हर्षोल्लास से मनाया गया. गुरुकुल पद्धति पर आधारित शिक्षा के लिए प्रसिद्ध इस संस्थान ने अपनी चार दशकों की गौरवशाली यात्रा को याद किया. कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुआ. मुख्य अतिथि पद्मश्री डॉ अशोक भगत, विकास भारती के संयुक्त सचिव महेंद्र भगत, भिखारी भगत, सतीश कुमार, रवि भगत, मुखिया रामप्रसाद बड़ाइक, विभाग प्रचारक समी, प्रवाल मैत्रा, कुमकुम मैत्रा, ज्ञान निकेतन के प्रधानाचार्य नितेश खेरवार, वरीय वैज्ञानिक सह प्रधान डॉ बृजेश पांडेय, विकास भारती की उपाध्यक्ष रंजना थी. कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने पारंपरिक जनजातीय नृत्य, लोक गीत और नाटक की शानदार प्रस्तुति दी. अशोक भगत ने कहा कि हमारा लक्ष्य इन बच्चों को न केवल शिक्षित करना है, बल्कि अपनी समृद्ध विरासत और मूल्यों से जोड़े रखना भी है. किसी भी संस्थान की पहचान उसकी भव्य इमारतों से नहीं, बल्कि वहां से निकलने वाले विद्यार्थियों के चरित्र और उनकी सफलता से होती है. ज्ञान निकेतन विकास भारती ने बिशुनपुर जैसे क्षेत्र में शिक्षा की लौ जला कर न केवल साक्षरता बढ़ायी है. बल्कि नयी पीढ़ी को वैश्विक चुनौतियों के लिए तैयार किया है. उन्होंने कहा कि आज के दौर में किताबी ज्ञान के साथ-साथ तकनीकी कौशल और नैतिक मूल्यों का होना अनिवार्य है. ज्ञान निकेतन ने हर्षोल्लास के साथ मनाया 38वां स्थापना दिवस विकास भारती बिशुनपुर द्वारा संचालित ज्ञान निकेतन का 38वां स्थापना दिवस हर्षोल्लास से मनाया गया. गुरुकुल पद्धति पर आधारित शिक्षा के लिए प्रसिद्ध इस संस्थान ने अपने चार दशकों की गौरवशाली यात्रा को याद करते हुए उपलब्धियों का स्मरण किया. कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुआ. मुख्य अतिथि पद्मश्री डॉ अशोक भगत, विकास भारती के संयुक्त सचिव महेंद्र भगत, भिखारी भगत, सतीश कुमार, रवि भगत, मुखिया रामप्रसाद बड़ाइक, विभाग प्रचारक समी, प्रवाल मैत्रा, कुमकुम मैत्रा, ज्ञान निकेतन के प्रधानाचार्य नितेश खेरवार, वरीय वैज्ञानिक सह प्रधान डॉ बृजेश पांडेय तथा विकास भारती की उपाध्यक्ष रंजना समेत कई गणमान्य उपस्थित थे. कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने पारंपरिक जनजातीय नृत्य, लोक गीत और नाटक की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं, जिन्हें उपस्थित दर्शकों ने खूब सराहा. मुख्य अतिथि पद्मश्री डॉ अशोक भगत ने कहा कि विकास भारती का उद्देश्य बच्चों को केवल शिक्षित करना नहीं, बल्कि उन्हें अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और मूल्यों से जोड़ कर रखना भी है. उन्होंने कहा कि किसी भी संस्थान की पहचान उसकी भव्य इमारतों से नहीं, बल्कि वहां से निकलने वाले विद्यार्थियों के चरित्र, संस्कार और सफलता से होती है. उन्होंने कहा कि ज्ञान निकेतन ने बिशुनपुर जैसे क्षेत्र में शिक्षा की लौ जलाकर न केवल साक्षरता बढ़ायी है, बल्कि नयी पीढ़ी को वैश्विक चुनौतियों के लिए भी तैयार किया है. आज के दौर में किताबी ज्ञान के साथ-साथ तकनीकी कौशल और नैतिक मूल्यों का होना अत्यंत आवश्यक है.
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