गुमला : धर्म बदलने को तैयार हैं आदिवासियों ने कहा, प्रशासन करे पहल, तो बदल सकता है मन

Published at :14 Jun 2018 9:01 AM (IST)
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गुमला : धर्म बदलने को तैयार हैं आदिवासियों ने कहा, प्रशासन  करे पहल, तो बदल सकता है मन

दुर्जय पासवान/अजीत कुमार गुमला : आदिवासी समुदाय के कुछ लोगों ने प्रशासन से दुखी होकर इस्लाम धर्म कबूल करने का निर्णय लिया है. दो माह पहले देवी मंडप को लेकर उत्पन्न विवाद के बाद थाना में प्राथमिकी दर्ज की गयी है. इसमें आदिवासी समुदाय के कुछ लोगों को नोटिस आया है. इसी मामले को लेकर […]

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दुर्जय पासवान/अजीत कुमार
गुमला : आदिवासी समुदाय के कुछ लोगों ने प्रशासन से दुखी होकर इस्लाम धर्म कबूल करने का निर्णय लिया है. दो माह पहले देवी मंडप को लेकर उत्पन्न विवाद के बाद थाना में प्राथमिकी दर्ज की गयी है. इसमें आदिवासी समुदाय के कुछ लोगों को नोटिस आया है.
इसी मामले को लेकर आदिवासी समुदाय के कुछ लोग प्रशासन से बात करने गये थे, लेकिन उनकी बातों को नहीं सुना गया. इसके बाद आहत होकर आदिवासी समुदाय ने धर्म बदलने का फैसला लिया है. घाघरा में धर्म परिवर्तन की जो बात चल रही है, अगर इसमें थोड़ा प्रशासन पहल करे, तो लोगों का मन बदल सकता है, क्योंकि लोग प्रशासन से दुखी हैं. यह दुख अब आक्रोश का रूप ले रहा है.
आदिवासी समुदाय के लोगों ने बताया कि देवी मंडप के विवाद के बाद बैठक में समझौता हो गया था. उसमें किसी के ऊपर केस करने की बात नहीं हुई थी, लेकिन पुलिस प्रशासन ने केस कर दिया. आक्रोश को रोकने के लिए प्रशासन को कुछ करना होगा. नहीं तो जिस प्रकार की स्थिति घाघरा में उत्पन्न हो रही है, यह बड़ा रूप ले सकता है. क्योंकि बुधवार को दूसरे दिन भी आदिवासी समुदाय की बैठक अखड़ा में हुई.
बैठक की सूचना पर प्रशासनिक व पुलिस पदाधिकारी गये, लेकिन यहां प्रशासन ने लोगों से बात नहीं की. वे चुपचाप वहां से खिसक गये. अगर प्रशासन उस समय आदिवासियों से बात करता, तो संभव था कि कुछ हल निकल जाता. लेकिन प्रशासन प्रयास कर रहा था कि थाने में बुला कर मामले को खत्म करें, जबकि आदिवासी समुदाय के लोग थाना में जाने को तैयार नहीं हुए थे. दो-तीन सदस्य थाना गये थे, परंतु वे भी चुपचाप थाना से निकल गये.
समझौता के बाद भी किया केस
आदिवासियों समुदाय के लोगों के अनुसार, दो माह पहले देवी मंडप के विवाद के बाद आदिवासी व एक दूसरे समुदाय के लोगों ने थाने में लिखित आवेदन दिया था, लेकिन केस दर्ज करने से पहले समझौता हो गया था.
परंतु घाघरा पुलिस ने उक्त दोनों आवेदन पर केस दर्ज कर लिया था. एक समुदाय से अनिल नाग ने कुछ लोगों को नामजद आरोपी बनाया था, जबकि आदिवासी समुदाय की ओर से भउवा पहान ने अज्ञात पर केस किया था. आदिवासी समुदाय के लोगों का कहना था कि दूसरे समुदाय के लोगों ने सड़क जाम की थी. प्रशासन ने उसका वीडियो बनाया था. उस वीडियो के आधार पर दूसरे पक्ष के लोगों को भी गिरफ्तार किया जाना चाहिए था, परंतु दो माह हो गया, अभी तक अनुसंधान तक नहीं हुआ है और आदिवासी समुदाय के लोगों को परेशान करने के लिए नोटिस भेजा जा रहा है.
मीडिया पर भी निकाली भड़ास
बैठक में कुछ स्थानीय लोगों ने मीडिया पर भी भड़ास निकाली. लोगों का कहना था कि घाघरा के कुछ अखबार के स्थानीय प्रतिनिधि समाचार लिखने में भेदभाव करते हैं. आदिवासी समुदाय का जब कोई मामला आता है, तो न्यूज नहीं छपता है. अगर छपता है, तो एक कोने में जगह दी जाती है. वहीं दूसरे समुदाय के लोगों की खबर को प्राथमिकता दी जाती है.
इस्लाम धर्म कबूल करने से पहले देना होगा लिखित : रवि पहान
घाघरा में आदिवासी परिवार के लोगों के इस्लाम धर्म कबूल करने के निर्णय की खबर प्रकाशित होने के बाद 20 सूत्री सदस्य रवि पहान ने कहा है कि ये गलत है कि सरना समाज के लोग इस्लाम कबूल करना चाहते हैं.
महज एक-दो लोगों के कारण पूरा आदिवासी समाज को जोड़ना सही नहीं है. घाघरा के सभी गणमान्य लोग जानते हैं कि आदिवासियों की जमीन सबसे ज्यादा कौन हड़पा है. मैं सबसे पहले आगवानी करने वाले से कहना चाहता हूं कि इस्लाम धर्म कबूल करना है, तो आदिवासी समाज को लिखित देनी चाहिए कि आदिवासी को मिलने वाला सरकारी लाभ नहीं लेंगे. इसके लिए देश का हर नागरिक स्वतंत्र हैं. परंतु यह सही नहीं है कि घाघरा के 100 लोग इस्लाम कबूल करना चाहते हैं. घाघरा के हर आदिवासी को इस पर सोचना होगा.
क्या कहते हैं आदिवासी समुदाय के लोग व नेता
हमलोगों को लूटा जा रहा है. हमारे आनी वाली पीढ़ी भी बोलेगी कि हमारे पास कुछ नहीं बचा. इससे पहले हम अपना धर्म बदल ले रहे हैं. ताकि मुसलिम बन कर अल्पसंख्यकों का लाभ तो ले सके.
सोमारी देवी, ग्रामीण
हमलोग अपने धर्म व धरोहर के लिए आवाज उठाते हैं, तो हमें झूठे केस में फंसा दिया जाता है. हमारी संस्कृतिक धरोहर पर प्रहार किया जा रहा है. अगर हमें बोलने का अधिकार नहीं, तो अपने धर्म में क्यों रहे.
सुनीता उरांव, ग्रामीण
हम पूरे परिवार के साथ इस्लाम धर्म कबूल करने जा रहे हैं. अगर प्रशासन रोक सके, तो रोक ले. हम किसी दबाव में नहीं है. प्रशासन से हमें किसी प्रकार की मदद नहीं मिलती है. इससे दुखी हैं.
बिनो उरांव, ग्रामीण
घाघरा में जिन लोगों ने इस्लाम धर्म कबूल करने की बात की है. वे गुस्से में हैं. उन लोगों को समझाने का प्रयास किया जा रहा है. मामला सलट जायेगा. दो-तीन दिन में मामला खत्म हो जायेगा.
भिखारी भगत, आदिवासी नेता
धर्म बदलने से किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकता है. कोई समस्या है, तो उस समस्या को मिल बैठ कर दूर किया जाना चाहिए. आदिवासी देश के कोने-कोने में हैं. इसकी परंपरा, संस्कृति, धरोहर व धर्म सबसे सुंदर है. ,
अशोक भगत, अध्यक्ष, आछासं
हमारे परिवार के सभी लोग जब धर्म बदलने को तैयार हैं, तो फिर हम क्यों पीछे रहे. मदद मांगते हैं, तो कोई मदद नहीं करता है. घाघरा में सभी लोग बिक गये हैं.
नीलम कुमारी, ग्रामीण
आदिवासी कहलाने का क्या मतलब. जब हमें कोई सहायता ही नहीं मिलती है. दूसरे धर्म वाले हर समय हमारे ऊपर हावी हो जाते हैं. हमें कोई सुरक्षा नहीं मिलती है. प्रशासन भी आंख मूंदे रहता है.
गुड्डी देवी, ग्रामीण
हम अपने धर्म, संस्कृति, धरोहर व परंपरा की रक्षा के लिए यह कदम उठा रहे हैं. अगर प्रशासन मदद नहीं करेगा, तो मजबूरन धर्म बदलना होगा. धर्म बदलने का निर्णय हम सभी का है.
सीतामुनी किंडो, ग्रामीण
हमारी जमीन पर दूसरे समुदाय के लोग रह रहे हैं. अब वे लोग हमें भगाने में लगे हुए हैं. जब हमें अपने धरोहर व धर्म की रक्षा के लिए जेल जाना पड़ेगा, तो फिर क्यों न हम अपना धर्म छोड़ कर दूसरा धर्म अपना लें.
समीर भगत, आदिवासी नेता
दो माह पहले देवी मंडप का विवाद हुआ था. कुछ लोगों ने जानबूझ कर विवाद पैदा कराया था. समझौता के बाद मामला खत्म हो गया था, लेकिन पुलिस ने केस दर्ज कर विवाद को बढ़ा दिया है.
भिनेश्वर भगत, आदिवासी नेता
क्या कहते हैं अधिकारी
धर्म परिवर्तन करने वाले लोगों से बात करेंगे. आखिर उनकी जो समस्या है, उसका समाधान क्यों नहीं हो रहा है. बात कर लोगों को समझाया जायेगा. अगर पहले से धर्मांतरण का मन बनाये हैं, तो इसका भी कारण पता किया जायेगा. मैं लोगों से बात कर मामले का हल निकालने का प्रयास करूंगा.
नागेंद्र कुमार सिन्हा, डीडीसी, गुमला
अगर आदिवासी समुदाय के लोग किसी के दबाव व प्रलोभन में धर्म बदलने जा रहे हैं, तो कानून संगत कार्रवाई की जायेगी. स्वेच्छा से धर्म बदल सकते हैं, लेकिन उसके लिए कानून के तहत चलना होगा. देवी मंडप विवाद में दोनों पक्षों की ओर से केस किया गया है. इस मामले में कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जायेगी.
भूपेंद्र प्रसाद राउत, एसडीपीओ, गुमला
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