1954 में खुले विद्यालय को विलय करने पर ग्रामीणों ने िकया विरोध

गुमला : सदर प्रखंड के मधुबन स्थित राजकीयकृत प्रावि मंगनाटोली को नवप्राथमिक विद्यालय पबेया-2 में विलय किये जाने का मंगनाटोली के ग्रामीणों ने विरोध किया है. ग्रामीणों के अनुसार, गांव के बच्चों की शिक्षा-दीक्षा को ध्यान में रखते हुए गांव के लोगों ने टाना भगतों के सहयोग से वर्ष 1954 में मंगनाटोली में विद्यालय की […]
गुमला : सदर प्रखंड के मधुबन स्थित राजकीयकृत प्रावि मंगनाटोली को नवप्राथमिक विद्यालय पबेया-2 में विलय किये जाने का मंगनाटोली के ग्रामीणों ने विरोध किया है. ग्रामीणों के अनुसार, गांव के बच्चों की शिक्षा-दीक्षा को ध्यान में रखते हुए गांव के लोगों ने टाना भगतों के सहयोग से वर्ष 1954 में मंगनाटोली में विद्यालय की स्थापना की. वर्ष 1966 में विद्यालय को सरकारी दर्जा मिला. विद्यालय में 32 बच्चे अध्ययनरत हैं. भौगोलिक दृष्टिकोण से बच्चों की शिक्षा-दीक्षा के लिए उक्त विद्यालय बहुत ही अनुकूल है, परंतु अब शिक्षा विभाग द्वारा मंगनाटोली के विद्यालय को पबेया-2 के नवप्राथमिक विद्यालय में विलय किया जा रहा है,
जिससे गांव के लोग चिंतित हैं. ग्रामीणों ने उपायुक्त से गांव के विद्यालय को दूसरे गांव के विद्यालय में विलय नहीं करने की गुहार लगायी है. इस संबंध में ग्रामीणों ने उपायुक्त को आवेदन दिया है. आवेदन की प्रतिलिपि राज्यपाल, मुख्यमंत्री, शिक्षामंत्री और शिक्षा अधीक्षक गुमला को भी प्रेषित की गयी है. माणिकचंद साहू, प्रो जगतपाल सिंह, सुरेंद्र टाना भगत, धुमा टाना भगत, महावीर साहू, राजेंद्र साहू, गजाधर साहू, सहनू साहू व माको उरांव आदि ग्रामीणों ने बताया कि मंगनाटोली विद्यालय में मधुबन मंगनाटोली सहित भभरी, पबेया व मुसाटोली आदि गांवों के भी बच्चे पढ़ते हैं, जो प्राय: एक किमी के दायरे में है. हमारे गांव से पबेया-2 विद्यालय की दूरी काफी है.
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