1954 में खुले विद्यालय को विलय करने पर ग्रामीणों ने िकया विरोध

Published at :02 Jun 2018 5:11 AM (IST)
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1954 में खुले विद्यालय को विलय करने पर ग्रामीणों ने िकया विरोध

गुमला : सदर प्रखंड के मधुबन स्थित राजकीयकृत प्रावि मंगनाटोली को नवप्राथमिक विद्यालय पबेया-2 में विलय किये जाने का मंगनाटोली के ग्रामीणों ने विरोध किया है. ग्रामीणों के अनुसार, गांव के बच्चों की शिक्षा-दीक्षा को ध्यान में रखते हुए गांव के लोगों ने टाना भगतों के सहयोग से वर्ष 1954 में मंगनाटोली में विद्यालय की […]

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गुमला : सदर प्रखंड के मधुबन स्थित राजकीयकृत प्रावि मंगनाटोली को नवप्राथमिक विद्यालय पबेया-2 में विलय किये जाने का मंगनाटोली के ग्रामीणों ने विरोध किया है. ग्रामीणों के अनुसार, गांव के बच्चों की शिक्षा-दीक्षा को ध्यान में रखते हुए गांव के लोगों ने टाना भगतों के सहयोग से वर्ष 1954 में मंगनाटोली में विद्यालय की स्थापना की. वर्ष 1966 में विद्यालय को सरकारी दर्जा मिला. विद्यालय में 32 बच्चे अध्ययनरत हैं. भौगोलिक दृष्टिकोण से बच्चों की शिक्षा-दीक्षा के लिए उक्त विद्यालय बहुत ही अनुकूल है, परंतु अब शिक्षा विभाग द्वारा मंगनाटोली के विद्यालय को पबेया-2 के नवप्राथमिक विद्यालय में विलय किया जा रहा है,

जिससे गांव के लोग चिंतित हैं. ग्रामीणों ने उपायुक्त से गांव के विद्यालय को दूसरे गांव के विद्यालय में विलय नहीं करने की गुहार लगायी है. इस संबंध में ग्रामीणों ने उपायुक्त को आवेदन दिया है. आवेदन की प्रतिलिपि राज्यपाल, मुख्यमंत्री, शिक्षामंत्री और शिक्षा अधीक्षक गुमला को भी प्रेषित की गयी है. माणिकचंद साहू, प्रो जगतपाल सिंह, सुरेंद्र टाना भगत, धुमा टाना भगत, महावीर साहू, राजेंद्र साहू, गजाधर साहू, सहनू साहू व माको उरांव आदि ग्रामीणों ने बताया कि मंगनाटोली विद्यालय में मधुबन मंगनाटोली सहित भभरी, पबेया व मुसाटोली आदि गांवों के भी बच्चे पढ़ते हैं, जो प्राय: एक किमी के दायरे में है. हमारे गांव से पबेया-2 विद्यालय की दूरी काफी है.

मंगनाटोली के ग्रामीणों ने उपायुक्त को आवेदन दे विद्यालय को विलय नहीं करने की लगायी गुहार.
वर्ष 1966 में िवद्यालय को सरकारी स्कूल का दर्जा िमला
गुमला
नहीं बनी 20 लाख की मशीन, अब पीपीपी मोड में चलेगा अल्ट्रासाउंड
323 रुपया में होगा अल्ट्रासाउंड
गुमला सदर अस्पताल में जून माह के अंतिम सप्ताह में पीपीपी मोड में अल्ट्रासाउंड शुरू होने से प्रति अल्ट्रासाउंड लोगों को 323 रुपये देने होंगे. लेेकिन जब सदर अस्पताल में अल्ट्रासाउंड संचालित होता था, तो प्रति अल्ट्रासाउंड 250 रुपया का चार्ज लिया जाता था. अब 323 रुपये लगेंगे. इस कारण अल्ट्रासाउंड कराने वाले व्यक्ति को 73 रुपया अधिक खर्च उठाना पड़ेगा.
डॉक्टर उच्च शिक्षा पर गये
सदर अस्पताल में मार्च माह में डॉक्टर कुमार राजू ने अल्ट्रासाउंड चिकित्सक के रूप में योगदान दिया था. उनके आने पर लगा था कि सदर अस्पताल में अल्ट्रासाउंड शुरू होगा, लेकिन वे कुछ ही दिन रहे. इसके बाद एनओसी लेकर डीएनबी में उच्च शिक्षा के लिए एडमिशन ले लिया, जिसके कारण सदर अस्पताल का
अपना अल्ट्रासाउंड भी शुरू नहीं हो सका.
चूहों ने तार कुतर दिया था
तीन साल पहले सदर अस्पताल में अल्ट्रासाउंड चिकित्सक डॉ अमर मिश्र का ट्रांसफर होने के बाद से सदर अस्पताल में अल्ट्रासाउंड बंद था. उनके ट्रांसफर के बाद कोई भी अल्ट्रासाउंड चिकित्सक की पोस्टिंग सदर अस्पताल में नहीं हुई थी. बंद रहते हुए अल्ट्रासाउंड मशीन की तार को चूहों ने कुतर डाला. वहीं अंदर की मशीन भी चालू हालत में नहीं रहने के कारण खराब हो गयी. इसकी जानकारी दो माह पूर्व अल्ट्रासाउंड मशीन को देखने आये कर्मियों ने दी. इधर, अमर कुमार के बाद डॉक्टर कुमार राजू आये थे, परंतु खराब अल्ट्रासाउंड देख कर वे भी एनओसी लेकर चले गये.
अल्ट्रासाउंड का पैसा लैप्स
सदर अस्पताल की अल्ट्रासाउंड मशीन खराब होने पर नयी खरीदारी करने के संबंध में डीएस से पूछने पर कहा कि पूर्व सीएस डॉ एसएन झा के समय सरकार से फंड आया था, लेकिन सरकार का आदेश है कि जब अस्पताल में अल्ट्रासाउंड चिकित्सक रहे, तो आप खरीदारी कर सकते हैं. लेकिन बिना चिकित्सक के खरीदारी करने से वह बेकार पड़ा रहेगा. उन्होंने बताया कि पूर्व सीएस के समय पैसा आया था. लेेकिन उस समय उनका ट्रांसफर होने के कारण पैसा लैप्स कर गया. अभी अस्पताल के पास फंड व चिकित्सक दोनों नहीं है.
शीघ्र शुरू कराया जायेगा : डीएस
डीएस डॉ आरएन यादव ने कहा कि अभियान निदेशक का पत्र मिला है. जून से पीपीपी मोड में अल्ट्रासाउंड शुरू होने का है, लेकिन अभी तक जिस कंपनी को अल्ट्रासाउंड शुरू कराना है, वे नहीं पहुंचे हैं. स्थल का चयन नहीं किया है. बात चल रही है. हम उनका सहयोग कर शीघ्र अस्पताल में अल्ट्रासाउंड शुरू कराने का प्रयास कर रहे हैं.
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