गोड्डा. ममता वाहन नहीं मिला, टोटो में महिला ने दिया बच्चे को जन्म
Published by :Prabhat Khabar News Desk
Published at :19 Apr 2026 10:20 PM (IST)
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गोड्डा जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था की बड़ी कमी सामने आई है, जहां एंबुलेंस या ममता वाहन न मिलने के कारण गर्भवती महिलाओं को सड़क या टोटो में ही बच्चों को जन्म देना पड़ा। महागामा अनुमंडल के बंदरचुआ और बेलारी गांव की घटनाएं इस विफलता को उजागर करती हैं। सरकारी अस्पतालों में बुनियादी सुविधाएं न होने के चलते मरीज प्राइवेट नर्सिंग होम की ओर मजबूर हो रहे हैं, जहां मनमानी और निजी लाभ का आरोप लग रहा है। चिकित्सा प्रभारी डॉ. खालीद अंजुम का कहना है कि अस्पताल में सभी सुविधाएं हैं, लेकिन कुछ मरीज अपनी मर्जी से प्राइवेट क्लीनिक चले जाते हैं। यह स्थिति प्रशासन की गंभीर लापरवाही और स्वास्थ्य तंत्र की असफलता पर सवाल खड़ा करती है, जो तुरंत सुधार की मांग करती है।
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सरकारी दावों की खुली पोल, एंबुलेंस के अभाव में सड़क बना प्रसव स्थल
बार-बार हो रही घटनाएं, फिर भी नहीं सुधर रही स्वास्थ्य व्यवस्थानिरभ किशोर, गोड्डा
जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है, जहां सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच गहरी खाई साफ नजर आ रही है. आधुनिक सुविधाओं और जननी सुरक्षा जैसी योजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद जरूरत के समय गर्भवती महिलाओं को बुनियादी चिकित्सा सुविधा भी नहीं मिल पा रही है. लगातार सामने आ रही घटनाएं यह बताती हैं कि व्यवस्था कागजों में भले मजबूत दिखती हो, लेकिन वास्तविकता बेहद चिंताजनक और संवेदनशील है.ममता वाहन नहीं मिला, टोटो बना सहारा
महागामा अनुमंडल क्षेत्र की ताजा घटना ने पूरे जिले को झकझोर दिया है. बीती रात करीब डेढ़ बजे महागामा प्रखंड के बंदरचुआ गांव की एक गर्भवती महिला को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हो गई. गांव की साहिया मीनू कुमारी ने ममता वाहन को लगातार तीन से चार बार कॉल किया, लेकिन चालक ने फोन रिसीव नहीं किया. समय पर कोई व्यवस्था नहीं होने के कारण परिजनों ने मजबूरी में गांव के पास के टोटो चालक को बुलाया और महिला को रेफरल अस्पताल महागामा के लिए लेकर रवाना हुए.घर से पांच किमी दूर रास्ते में ही हुआ प्रसव
घर से करीब पांच किलोमीटर दूर सरभंगा गांव के पास रास्ते में ही महिला ने टोटो में एक नवजात शिशु को जन्म दे दिया. यह स्थिति न केवल बेहद दर्दनाक थी, बल्कि जच्चा और बच्चा दोनों की जान के लिए जोखिम भरी भी थी. प्रसव के बाद भी परिजन करीब पांच किलोमीटर का सफर तय कर अस्पताल पहुंचे. वहां जच्चा और बच्चा को बेड उपलब्ध कराया गया, दवा दी गई और जांच के बाद दोनों को स्वस्थ पाया गया. हालांकि यह राहत की बात जरूर रही, लेकिन इस पूरी घटना ने व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर कर दिया.पहले भी हो चुकी है ऐसी घटना
यह कोई पहली घटना नहीं है. इससे पहले 13 मार्च को सदर प्रखंड के बेलारी गांव की निवासी रूक्मिणी देवी ने भी एंबुलेंस या ममता वाहन नहीं मिलने के कारण सदर अस्पताल जाते समय नोनमाटी गांव के पास टोटो में ही बच्चे को जन्म दिया था. उस समय भी जच्चा और बच्चा सुरक्षित रहे थे, लेकिन बार-बार ऐसी घटनाओं का सामने आना यह दर्शाता है कि संबंधित विभाग इनसे कोई सीख नहीं ले रहा है.मानवीय संवेदनाओं पर सवाल
सड़क या वाहन में प्रसव जैसी घटनाएं न केवल स्वास्थ्य व्यवस्था की विफलता को दर्शाती हैं, बल्कि यह समाज की संवेदनशीलता पर भी प्रश्नचिह्न लगाती हैं. यदि समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं हो, तो किसी भी क्षण गंभीर हादसा हो सकता है. यह स्थिति किसी भी सभ्य समाज के लिए चिंताजनक है और त्वरित सुधार की मांग करती है.प्राइवेट नर्सिंग होम की मनमानी
इस बीच महागामा क्षेत्र में प्राइवेट नर्सिंग होम की मनमानी भी सामने आ रही है. सूत्रों और स्थानीय चर्चाओं के अनुसार यह प्रचारित किया जा रहा है कि सरकारी अस्पताल में प्रसव होने से बच्चे कमजोर हो जाते हैं. इसके कारण एक संगठित नेटवर्क सक्रिय हो गया है, जो मरीजों को निजी क्लीनिक की ओर मोड़ रहा है. सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों में देखा गया है कि महागामा रेफरल अस्पताल से आधी रात को गर्भवती महिलाओं को एक सफेद स्कॉर्पियो वाहन से निजी नर्सिंग होम ले जाया जा रहा है. बताया जा रहा है कि यह वाहन किसी निजी संचालक का है और मरीजों को सामान्य प्रसव के लिए प्राइवेट क्लीनिक ले जाया जाता है. यह भी कहा जा रहा है कि सरकारी अस्पताल में सामान्य प्रसव की समुचित व्यवस्था नहीं है.व्यवस्था पर उठते सवाल
यह स्थिति कई गंभीर सवाल खड़े करती है. करोड़ों रुपये की लागत से बने रेफरल अस्पताल में यदि सामान्य प्रसव जैसी बुनियादी सुविधा भी उपलब्ध नहीं है, तो यह पूरे तंत्र की विफलता को दर्शाता है. जरूरत इस बात की है कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से ले और आम लोगों के भरोसे को टूटने से बचाने के लिए ठोस कदम उठाये.क्या कहते हैं चिकित्सा प्रभारी
डिलीवरी के लिए हर एक तरह की व्यवस्था अस्पताल में मौजूद है. लेकिन कभी कभार कुछ-कुछ मरीज अस्पताल आने के बाद खुद की मर्जी से प्राइवेट अस्पताल चले जाते हैं.– डॉ खालीद अंजुम, चिकित्सा प्रभारी महागामा.B
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