पुराने नोट जमा करने की धीमी पड़ी रफ्तार

Published at :18 Nov 2016 6:43 AM (IST)
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पुराने नोट जमा करने की धीमी पड़ी रफ्तार

नोटबंदी. नौवें दिन दिन भी एटीएम खुलने से पहले ग्राहकों की लगी लंबी कतारें, परेशान रहे लोग कालेधन पर सर्जिकल स्ट्राइक के आठवें दिन बैंकों में पुराने नोट जमा करने की रफ्तार दोपहर तक धीमी पड़ गयी है. वहीं बाजार में कारोबार पर असर दिख रहा है. 500 के नये नोट नहीं आने के कारण […]

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नोटबंदी. नौवें दिन दिन भी एटीएम खुलने से पहले ग्राहकों की लगी लंबी कतारें, परेशान रहे लोग

कालेधन पर सर्जिकल स्ट्राइक के आठवें दिन बैंकों में पुराने नोट जमा करने की रफ्तार दोपहर तक धीमी पड़ गयी है. वहीं बाजार में कारोबार पर असर दिख रहा है. 500 के नये नोट नहीं आने के कारण लोगों को परेशानी हो रही है.
गोड्डा : नोटबंदी के नौवें दिन गुरुवार को बैंकों के खुलने से पहले ही लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी. हालांकि दोपहर होते भीड़ सामान्य हो गयी. पुराने नोट जमा करनेवालों की रफ्तार कम दिख रही है. पैसे निकासी में परेशानी होने के बाद भी कई ग्राहकों ने केंद्र सरकार के कालेधन पर किये गये सर्जिकल स्ट्राइक का समर्थन किया. लोगों ने पीएम द्वारा चलायी गयी मुहिम की सराहना करते कालाधन को गरीबों के बीच बांटने की भी मांग की है. एसबीआइ सहित अन्य बैंकों में भीड़ अन्य दिनों की तुलना मेें कम दिखी.
कुछ प्राइवेट बैंकों के एटीएम के सर्वर फेल होने व नकदी संकट के कारण ग्राहकों को निराश लौटना पड़ा. इधर बाजार में भी नकदी संकट के कारण पिछले दिनों की तुलना में चहल-पहल कम देखी गयी. कई व्यवसायी भी नोट जमा करने व निकासी में व्यस्त देखे गये. वहीं स्टेट बैंक के एटीएम के सामने सुबह से देर शाम तक पैसे निकासी करने लोगों की भीड़ अधिक देखी गयी. गुरुवार को बैंक के अधिकारियों थोड़ी राहत की सांस ली. सभी बैंकों में यही हालत रहा. पदाधिकारियों ने राहत की सांस लेते हुये आराम से ग्राहकों को डील किया.
वहीं जिनके घरों में शादी है वे लोग पैसा निकासी के लिए काफी परेशान दिख रहे हैं. कई लोगों ने बताया कि पैसे की कमी के कारण शादी की तिथियां बदलनी पड़ रही है. वहीं लोगों ने इस दिशा में बैंक प्रबंधन से विशेष व्यवस्था करने की मांग की है.
नहीं पहुंची 500 के नये नोट की खेप, परेशानी: हालांकि अब तक जिले में नये 500 के नोटों की खेप नहीं पहुंचने के कारण लोगों की परेशानी कम नहीं हो रही है. दो हजार के नये नोट से घर की जरूरी सामान खरीदने जाने पर दुकानदार यह कहकर लौटा देते हैं कि छुट्टी रुपये नहीं है. बैंक में दो हजार के के अलावा 100 व 10 रुपये के सिक्के से भुगतान किया गया. वहीं दस रुपये के सिक्के कारण भी परेशानी बढ़ गयी है. हालांकि बैंक प्रबंधन ने साफ कर दिया है कि यह भ्रामक खबर है. 10 रुपये की सिक्के आरबीआइ की करंसी है.
नहीं लेनेवाले लोगों पर कार्रवाई हो सकती है. दस व 15 स्टार वाले सभी सिक्के वैद्य है. किसी को अगर परेशानी हो रही है तो वे पुन: बैंक में जमा कर सकते हैं. बैंक के शाखा प्रबंधकों ने सोमवार व मंगलवार बैंकों में भीड़ कम होने की संभावना जतायी है.
क्या कहते हैं व्यवसायी व लोग
”नोटबंदी के कारण व्यापारी वर्ग प्रभावित है. कारोबार पर असर पड़ा है. खुदरा से लेकर थोक विक्रेताओं को भी परेशानी झेलनी पड़ रही है. कपड़ा व्यवसायी, आटोमोबाइल सेक्टर के उद्यमी व किराना दुकानों के व्यवसायी भी सरकार के इस फैसले से परेशान हैं.
-विजय कुमार परशुरामका, व्यवसायी
”फल से लेकर जरुरी समानों के खरीद बिक्री पर इसका असर पड़ा है. सरकार की नोटबंदी के कारण फलों की खरीद में कमी आयी है. हर छोटे-बड़े व्यापारियों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ा है. कालेधन का सफाया हो कि न हो आने वाले कुछ दिनो में यही हाल रहा तो व्यापारियों का सफाया तो तय है.
-मो नौशाद, फल विक्रेता
”सरकार के नोटबंदी के फैसले से लोगो में खुशी है. कालेधन वाले ही हाय तौबा मचा हैं. सरकार ने फैसला लेकर देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का काम किया है. इसका असर दुरगामी होगा. प्रधानमंत्री ने देश को नयी सौगात देने का काम किया है.”
-शिवेश वर्मा, व्यवसायी
”सरकार के इस फैसले आम लोगों थोड़ी परेशानी हुई है. घर का काम-काज छोड़ कर लोग पिछले एक सप्ताह से बैंक का चक्कर लगा रहे हैं. आम लोगों को ही इससे परेशानी उठानी पड़ रही है. सरकार का यह फैसला समझ से परे है.
-मो शाहीद, ग्रामीण
”सरकार के इस फैसले ने लोगों को परेशानी में डालने का काम किया है. सरकार की जनविरोधी नीतियों में नोटबंदी पहले नंबर पर है. यूपी चुनाव में फायदा उठाने के लिए ऐसा हथकंडा अपनाया गया है.नोटबंदी से पूर्व केंद्र सरकार द्वारा पूरी तैयारी नहीं किये जाने के कारण परेशानी हुई.
-रंजीत कुमार, छात्र नेता
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