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सरिया में आज भी मौजूद है प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ एनजी घोष व पायलट संजय चटर्जी का आशियाना

Updated at : 10 Jun 2024 9:12 AM (IST)
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सरिया में डॉ घोष का बंगला और उनके नाती पायलट संजय. फोटो : प्रभात खबर

सरिया में आज भी प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ एनजी घोष और पायलट संजय चटर्जी का आशियाना मौजूद है. डॉ घोष ने आश्रम रोड में अपना बंगला बनवाया था.

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सरिया (गिरिडीह), लक्ष्मी नारायण पांडेय : सरिया हजारीबाग रोड रेलवे स्टेशन (सरिया) से एक किमी दूर सरिया नगर पंचायत के वार्ड नंबर 3 (चंद्रमारणी मोहल्ला) में रूबी लॉज नामक एक बंगला है. 1950 के दशक में कोलकाता के प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ ननी गोपाल घोष ने इस बनवाया था.

सरिया के आश्रम रोड में डॉ घोष ने बनवाया था अपना बंगला

डॉ घोष के नाती सरकारी पायलट संजय चटर्जी ने बताया कि सरिया का हरा-भरा शुद्ध वातावरण शांतिप्रिय नाना को यहां खींच लाया. उन्होंने यहां आश्रम रोड सरिया में अपना बंगला बनवाया. डॉ घोष उस समय कोलकाता मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में थे. हावड़ा के प्रसिद्ध चिकित्सक, जनरल फिजिशियन व सर्जन के रूप में उनकी ख्याति थी.

सरिया में 3 माह बिताते थे डॉ एनजी घोष

छुट्टियां बिताने के लिए अक्तूबर, दिसंबर व जनवरी में अपने परिवार के साथ गिरिडीह जिले के सरिया आया करते थे. शेष समय बंगले की देखभाल स्थानीय केयरटेकर के जिम्मे था. फूलों से सजी क्यारियां तथा फलों से लदे आम, नींबू, शरीफा, जामुन, गुलाब जामुन, बेल, चीकू, कनौद सहित कई मौसमी फल आदि के वृक्ष, शीशम, यूकेलिप्टस आदि वृक्ष बंगले की शोभा बढ़ाते रहे हैं.

डॉ घोष को गुजरे हो गये चार दशक

1984 ईस्वी में डॉ एनजी घोष ने कोलकाता में अंतिम सांस ली. इसके पश्चात रूबी लॉज की देखरेख उनकी सुपुत्री नंदिता चटर्जी उर्फ रुबी व नाती संजय चटर्जी, नतिनी रश्मि चटर्जी करते हैं. संजय चटर्जी (51) वर्तमान में एयर इंडिया में पायलट हैं. इनकी बहन रश्मि चटर्जी पश्चिम बंगाल के एक प्रसिद्ध विद्यालय में शिक्षिका हैं.

अब कुछ ही लोगों का रह गया है संपर्क

पायलट संजय चटर्जी फिलहाल सरिया स्थित अपने बंगले की मरम्मत कराने को लेकर यहां पहुंचे हैं. उन्होंने बताया कि आज से सौ साल पहले जब बंगाली परिवार सरिया में बसे थे, तो यहां की आबोहवा, पर्यावरण, स्थानीय लोगों के व्यवहार तथा वातावरण अभी से भिन्न थे. समय के साथ सब कुछ बदलने लगा. नतीजतन बंगाली समुदाय के लोग अपनी कोठियां बेचकर जाने लगे.

आनंद भवन, मौनी बाबा आश्रम देखते आते हैं बंगाली समुदाय के लोग

कुछ लोगों के पास समयाभाव भी था, जिस कारण लोग सरिया से अपना आशियाना बेचकर चले गये. कुछ बंगले ही शेष बचे हैं जिसमें बंगाली समुदाय के लोग आना-जाना करते हैं. बंगाली समुदाय के बनाये गये मंदिर आनंद भवन आश्रम, वसु श्री कोठी, मौनी बाबा आश्रम में आज भी समय-समय पर लोग सैकड़ों की संख्या में पूजा करने देश के विभिन्न जगहों से बंगाली समुदाय के लोग पहुंचते हैं.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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