सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में पेंच, डीसी की जनसुनवाई में सामने आईं कई शिकायतें

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राशन कार्ड हाथ में, फिर भी तीन माह से अनाज नहीं | Prabhat Khabar Network

गढ़वा जनसुनवाई में राशन, पेंशन और सरकारी लापरवाही के कई मामले सामने आए. उपायुक्त ने अधिकारियों को जांच कर जल्द समाधान के निर्देश दिए हैं.

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गढ़वा. सरकारी योजनाओं का लाभ पाने के लिए पात्रता पूरी करने के बावजूद आम लोगों को दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं. मंगलवार को उपायुक्त पशुपतिनाथ मिश्रा की जनसुनवाई में पहुंचे फरियादियों की शिकायतों ने सरकारी व्यवस्था की जमीनी तस्वीर सामने ला दी. किसी के पास राशन कार्ड है, लेकिन तीन महीने से अनाज नहीं मिला. कोई दिव्यांग पेंशन के लिए परेशान है. कहीं ग्रामीणों ने बिना ग्रामसभा के सेविका-सहायिका के चयन का आरोप लगाया, तो कहीं लापरवाही से करीब 390 मतदाताओं का बूथ बदलने की शिकायत सामने आयी. समाहरणालय सभागार में उपायुक्त पशुपति नाथ मिश्रा ने एक-एक कर फरियादियों की शिकायतें सुनीं और संबंधित पदाधिकारियों को कार्रवाई का निर्देश दिया.

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कार्ड बना, तीन माह से राशन बंद

सदर प्रखंड के सुखबाना निवासी चंद्रदेव राम की शिकायत सरकारी राशन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करती है. चंद्रदेव के पास राशन कार्ड है, लेकिन पिछले तीन माह से उन्हें राशन नहीं मिल रहा है. आवेदन के अनुसार वह अत्यंत गरीब हैं और किराये के मकान में रहते हैं. राशन चालू कराने के लिए प्रखंड से लेकर जिला स्तर तक कई बार प्रयास के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ. सवाल यह है कि जब राशन कार्ड बना है और लाभुक पात्र है, तो तीन महीने तक उसके हिस्से का अनाज आखिर कहां अटक गया? उपायुक्त ने मामले की जांच कर राशन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है.

पेंशन के लिए भी सरकारी दरवाजे पर दस्तक

डंडई प्रखंड के रारो गांव निवासी खुश्दिल अंसारी ने दिव्यांगता पेंशन की मांग की. उनका कहना है कि वह अत्यंत गरीब और दिव्यांग हैं तथा आय का कोई दूसरा साधन नहीं है. जीवनयापन के लिए पेंशन की जरूरत है. सरकारी योजनाओं में पात्र लोगों को लाभ दिलाने के दावों के बीच पेंशन के लिए इस तरह जनसुनवाई तक पहुंचना व्यवस्था की पहुंच पर सवाल खड़ा करता है.

ग्रामसभा नहीं, फिर सेविका-सहायिका का चयन कैसे?

चिनिया प्रखंड के बेता गांव के ग्रामीणों ने सेविका एवं सहायिका के चयन में नियमों की अनदेखी का आरोप लगाया है. ग्रामीणों के अनुसार 14 अगस्त को ग्रामसभा के माध्यम से चयन होना था, लेकिन गांव में ग्रामसभा कराये बिना ही चयन कर दिया गया. ग्रामीणों ने दोबारा ग्रामसभा आयोजित कर नियमानुसार चयन कराने की मांग की है. यदि ग्रामीणों का आरोप सही है, तो सवाल सिर्फ चयन प्रक्रिया का नहीं, बल्कि ग्रामसभा की भूमिका और पारदर्शिता का भी है. आखिर जिस प्रक्रिया में ग्रामीणों की भागीदारी अनिवार्य मानी जाती है, वह प्रक्रिया गांव में हुए बिना पूरी कैसे हो गयी?

बूथ बदलने से 390 मतदाता परेशान

मेराल प्रखंड के पेंदली के ग्रामीणों ने एसआइआर प्रक्रिया में बीएलओ एवं संबंधित कर्मियों की लापरवाही का आरोप लगाया है. ग्रामीणों के अनुसार पेंदली स्थित बूथ संख्या 101 के करीब 390 मतदाताओं के नाम काटकर लगभग तीन किलोमीटर दूर टेटूका कला स्थित बूथ संख्या 102 में जोड़ दिये गये हैं. ग्रामीणों ने इस पर नाराजगी जताते हुए संबंधित कर्मियों पर कार्रवाई और मतदाताओं के नाम वापस बूथ संख्या 101 में जोड़ने की मांग की है.

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जनसुनवाई बनी व्यवस्था की जमीनी पड़ताल

जनसुनवाई में राशन, पेंशन, भूमि विवाद, अवैध कब्जा, आवास, मुआवजा, अतिक्रमण, रोजगार और बकाया मजदूरी समेत कई शिकायतें पहुंचीं. शिकायतों की प्रकृति बताती है कि सरकारी योजनाओं और सेवाओं की अंतिम कड़ी पर अब भी कई लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है. उपायुक्त ने संबंधित अधिकारियों को शिकायतों का संवेदनशीलता और तत्परता से निष्पादन करने का निर्देश दिया है. अब देखना यह है कि जनसुनवाई में सामने आयी शिकायतें केवल आदेश और आवेदन तक सीमित रहती हैं या वास्तव में जमीन पर समाधान भी दिखता है.

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