रंका के प्राचीन ठाकुरबाड़ी मंदिर में श्रद्धा-उल्लास से मना जन्माष्टमी
श्रीकृष्ण की वेशभूषा में सजे नन्हे-मुन्ने बच्चे | Prabhat Khabar Network
रंका के प्राचीन ठाकुरबाड़ी मंदिर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। बच्चों की वेशभूषा और पूजा ने भक्तों का मन मोह लिया।
राजपरिवार की देखरेख में हुआ पूजा-अर्चना का आयोजन, कृष्ण रूप में सजे बच्चों ने मोहा मन; डेढ़ सौ वर्ष पहले आम श्रद्धालुओं के लिए खुला था मंदिर
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रंका, गढ़वा : रंका के प्राचीन ठाकुरबाड़ी मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण की जन्माष्टमी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनायी गयी. आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में महिला, पुरुष और बच्चे मंदिर पहुंचे और पूजा-अर्चना की. देर रात भक्तों ने बाल गोपाल को झूला झुलाया और सुख, शांति व समृद्धि की कामना की. श्रीकृष्ण के जयकारों से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय हो उठा.
कृष्ण रूप में सजे बच्चों ने मोहा मन
राजकुमार गोवर्धन प्रसाद सिंह के मार्गदर्शन और देखरेख में मंदिर में पूजा-अर्चना की गयी. इस दौरान श्रीकृष्ण की वेशभूषा में सजे नन्हे-मुन्ने बच्चे आकर्षण का केंद्र बने रहे. मोर मुकुट, हाथ में बांसुरी और पारंपरिक वेशभूषा में सजे बच्चों ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया.
डेढ़ सौ वर्ष पहले आम श्रद्धालुओं के लिए खुला था मंदिर
राजकुमार गोवर्धन प्रसाद सिंह ने बताया कि सैकड़ों वर्ष पूर्व राजपरिवार की ओर से ठाकुरबाड़ी मंदिर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की पूजा-अर्चना की जाती थी. करीब डेढ़ सौ वर्ष पहले मंदिर का पट आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया. उस समय प्रखंड क्षेत्र के दूर-दराज के इलाकों से बड़ी संख्या में लोग जन्माष्टमी पर यहां पूजा करने पहुंचते थे.
उन्होंने बताया कि पहले जन्माष्टमी के दौरान मंदिर का पूरा परिसर भक्तों से भरा रहता था. हालांकि, अब जगह-जगह जन्माष्टमी का आयोजन होने के कारण धीरे-धीरे यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या कम हुई है.
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